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Rampur Bushahar News: दिल्ली-मुंबई तक छाई किन्नौरी सेब की लाली, बागवानों के चेहरे खिले
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कल्पा में सेब के तुड़ान में जुट कामगार। संवाद
किन्नौर सेब सीजन : दिल्ली, मुंबई, चंडीगढ़ समेत 12 मंडियों में भेजी 24 लाख पेटियां
बागवानों को मिल रहे अच्छे दाम, तैयार फसल को ठेके पर देकर भी कमा रहे मोटा मुनाफा
दिल्ली, मुंबई, चंडीगढ़ जैसे बड़े शहरों में किन्नौर के सेब की सबसे अधिक मांग
बीरबल नेगी
सांगला (किन्नौर)। किन्नौर में सेब सीजन इन दिनों चरम पर चल रहा है। किन्नौर से दिल्ली, मुंबई, चंडीगढ़ समेत 12 मंडियों के लिए अभी तक सेब की करीब 24 लाख पेटियां भेजी जा चुकी हैं। किन्नौर जिले के सेब ने देशभर की मंडियों में अपनी खास पहचान बनाई है। इसकी मिठास और उत्कृष्ट गुणवत्ता के चलते मांग इस साल भी बेहतर है। जिले के ऊपरी क्षेत्रों में भी सेब का सीजन जोरों पर है। बागवान बेहतर दाम मिलने से खुश हैं। टापरी फल मंडी में 22 किलोग्राम के यूनिवर्सल कार्टन के लिए उन्हें 2,500 से 3,500 रुपये तक की कीमत मिल रही है। कई बागवानों ने अपने बगीचे सीधे ठेके पर बड़े कारोबारियों या फर्मों को दे दिए हैं। बागवानों के मुताबिक बगीचों को ठेके पर देने से अच्छा मुनाफा हुआ है। साथ ही ढुलाई, पैकिंग और तुड़ान आदि कार्य भी नहीं करवाने पड़ते। बड़े कारोबारी अपने कामगारों से सीधे सेब का तुड़ान करवाकर तैयार फसल को ले जाते हैं। एक बागवान के मुताबिक उसने अपने छह बीघा भूमि पर लगी तैयार सेब की फसल को 9 लाख रुपये में सीधे कारोबारी को बेचा, जबकि फसल को तैयार करने में उनका खर्च करीब दो लाख रुपये हुआ था। वहीं, एक अन्य बागवान ने बताया कि करीब 10 बीघा बगीचे में तैयार फसल को 12 लाख रुपये में बेचा है। संवाद
कहां कितनी पेटियां भेजी गईं
उद्यान विभाग के मुताबिक इस साल अभी तक किन्नौर से 10,057 वाहनों से करीब 23,89,910 सेब की पेटियां देश और प्रदेश की मंडियों में भेजी जा चुकी हैं। निचार ब्लॉक का सीजन लगभग समाप्त हो गया है। यहां से 9,48,757 पेटियां भेजी गई हैं। कल्पा और पूह ब्लॉक में सीजन चरम पर है। कल्पा से 6,97,138 पेटियां और पूह से 7,44,015 पेटियां देश भर की मंडियों में भेजी जा चुकी हैं। किन्नौर के सेब की सबसे अधिक मांग दिल्ली, मुंबई, चंडीगढ़ जैसे बड़े शहरों में है। किन्नौर से अब तक सबसे अधिक सेब की 6,38,909 पेटियां दिल्ली भेजी गई हैं। चंडीगढ़ के लिए 5,89,543 और मुंबई के लिए 4,25,663 पेटियां भेजी गई हैं। इसके अलावा रामपुर के बिथल को 3,78,934, सोलन को 97,821, सैंज को 82,689, मतियाणा को 62,330, परमाणु को 38,139, नारकंडा को 36,362, शिमला को 20,374, रतनपुर को 17,746, खेगसू को 1460 पेटियों भेजी गई हैं। किन्नौर में अब तक 1,01,180 सेब का कार्टन और 13,645 सेब के ट्री बंडल पहुंचे हैं।
इस साल 28 लाख पेटियों के उत्पादन का अनुमान
उद्यान विभाग ने इस साल करीब 28 लाख पेटियों के उत्पादन का अनुमान लगाया है, जो पिछले साल से कम है। पिछले साल किन्नौर में 35.18 लाख पेटियों का उत्पादन हुआ था। इस बार निचार क्षेत्र में उत्पादन में कमी आई है, जबकि कल्पा और पुह में पिछले साल के बराबर उत्पादन रहेगा।
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किन्नौर ने 12 मंडियों में अब तक करीब 24 लाख पेटियां भेजी जा चुकी हैं। किन्नौर से निकलने वाले सेब की हर पेटी का हिसाब रखा जा रहा है। किन्नौर में सेब सीजन नवंबर के मध्य तक चलने की संभावना है।-- डॉ. शमशेर सिंह देहरू, उप निदेशक, उद्यान विभाग किन्नौर
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बागवानों को मिल रहे अच्छे दाम, तैयार फसल को ठेके पर देकर भी कमा रहे मोटा मुनाफा
दिल्ली, मुंबई, चंडीगढ़ जैसे बड़े शहरों में किन्नौर के सेब की सबसे अधिक मांग
बीरबल नेगी
सांगला (किन्नौर)। किन्नौर में सेब सीजन इन दिनों चरम पर चल रहा है। किन्नौर से दिल्ली, मुंबई, चंडीगढ़ समेत 12 मंडियों के लिए अभी तक सेब की करीब 24 लाख पेटियां भेजी जा चुकी हैं। किन्नौर जिले के सेब ने देशभर की मंडियों में अपनी खास पहचान बनाई है। इसकी मिठास और उत्कृष्ट गुणवत्ता के चलते मांग इस साल भी बेहतर है। जिले के ऊपरी क्षेत्रों में भी सेब का सीजन जोरों पर है। बागवान बेहतर दाम मिलने से खुश हैं। टापरी फल मंडी में 22 किलोग्राम के यूनिवर्सल कार्टन के लिए उन्हें 2,500 से 3,500 रुपये तक की कीमत मिल रही है। कई बागवानों ने अपने बगीचे सीधे ठेके पर बड़े कारोबारियों या फर्मों को दे दिए हैं। बागवानों के मुताबिक बगीचों को ठेके पर देने से अच्छा मुनाफा हुआ है। साथ ही ढुलाई, पैकिंग और तुड़ान आदि कार्य भी नहीं करवाने पड़ते। बड़े कारोबारी अपने कामगारों से सीधे सेब का तुड़ान करवाकर तैयार फसल को ले जाते हैं। एक बागवान के मुताबिक उसने अपने छह बीघा भूमि पर लगी तैयार सेब की फसल को 9 लाख रुपये में सीधे कारोबारी को बेचा, जबकि फसल को तैयार करने में उनका खर्च करीब दो लाख रुपये हुआ था। वहीं, एक अन्य बागवान ने बताया कि करीब 10 बीघा बगीचे में तैयार फसल को 12 लाख रुपये में बेचा है। संवाद
कहां कितनी पेटियां भेजी गईं
उद्यान विभाग के मुताबिक इस साल अभी तक किन्नौर से 10,057 वाहनों से करीब 23,89,910 सेब की पेटियां देश और प्रदेश की मंडियों में भेजी जा चुकी हैं। निचार ब्लॉक का सीजन लगभग समाप्त हो गया है। यहां से 9,48,757 पेटियां भेजी गई हैं। कल्पा और पूह ब्लॉक में सीजन चरम पर है। कल्पा से 6,97,138 पेटियां और पूह से 7,44,015 पेटियां देश भर की मंडियों में भेजी जा चुकी हैं। किन्नौर के सेब की सबसे अधिक मांग दिल्ली, मुंबई, चंडीगढ़ जैसे बड़े शहरों में है। किन्नौर से अब तक सबसे अधिक सेब की 6,38,909 पेटियां दिल्ली भेजी गई हैं। चंडीगढ़ के लिए 5,89,543 और मुंबई के लिए 4,25,663 पेटियां भेजी गई हैं। इसके अलावा रामपुर के बिथल को 3,78,934, सोलन को 97,821, सैंज को 82,689, मतियाणा को 62,330, परमाणु को 38,139, नारकंडा को 36,362, शिमला को 20,374, रतनपुर को 17,746, खेगसू को 1460 पेटियों भेजी गई हैं। किन्नौर में अब तक 1,01,180 सेब का कार्टन और 13,645 सेब के ट्री बंडल पहुंचे हैं।
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इस साल 28 लाख पेटियों के उत्पादन का अनुमान
उद्यान विभाग ने इस साल करीब 28 लाख पेटियों के उत्पादन का अनुमान लगाया है, जो पिछले साल से कम है। पिछले साल किन्नौर में 35.18 लाख पेटियों का उत्पादन हुआ था। इस बार निचार क्षेत्र में उत्पादन में कमी आई है, जबकि कल्पा और पुह में पिछले साल के बराबर उत्पादन रहेगा।
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किन्नौर ने 12 मंडियों में अब तक करीब 24 लाख पेटियां भेजी जा चुकी हैं। किन्नौर से निकलने वाले सेब की हर पेटी का हिसाब रखा जा रहा है। किन्नौर में सेब सीजन नवंबर के मध्य तक चलने की संभावना है।

कल्पा में सेब के तुड़ान में जुट कामगार। संवाद