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Rampur Bushahar News: चेक बाउंस के मामले में सरकारी ठेकेदार को छह माह का कारावास
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अदालत ने शिकायतकर्ता को 1.80 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश भी दिया
संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर बुशहर। अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट रामपुर की अदालत ने चेक बाउंस के मामले में सरकारी ठेकेदार को छह माह के साधारण कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही शिकायतकर्ता को 1.80 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश भी दिया है। मामले का शिकायतकर्ता दुकानदार है। दोषी राज कुमार पेशे से सरकारी ठेकेदार है। 20 जुलाई 2019 को ठेकेदार बिल्डिंग मटीरियल खरीदने के लिए शिकायतकर्ता की दुकान पर गया और 90 हजार रुपये का सामान खरीदा। राशि का भुगतान करने के लिए चेक दुकानदार को दिया, जो बाउंस हो गया। शिकायतकर्ता ने आरोपी से उस रकम की मांग की, लेकिन उसने टाल दिया। बार-बार कहने के बावजूद रकम का पेमेंट नहीं किया। इसके बाद, शिकायतकर्ता ने कानूनी डिमांड नोटिस भेजा। आरोपी को नोटिस मिला, लेकिन कोई पेमेंट नहीं किया। इसलिए, यह शिकायत फाइल की गई है। अदालत ने फैसला दिया है कि आरोपी यह साबित करने में नाकाम रहा है कि शिकायत करने वाले के प्रति आरोपी की कोई कानूनी जिम्मेदरी नहीं है। कोर्ट इस नतीजे पर पहुंचता है कि शिकायत करने वाले ने रिकॉर्ड पर ठोस और भरोसेमंद सबूत पेश करके बिना किसी शक के अपना केस साबित कर दिया है। आरोपी को एनआई एक्ट की धारा-138 के तहत किए गए अपराध के लिए दोषी ठहराया जाता है। दोषी को छह महीने की साधारण जेल की सज़ा दी जाती है। इसके अलावा, दोषी को शिकायत करने वाले को 1.80 लाख रुपये का मुआवजा देने का निर्देश दिया जाता है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर बुशहर। अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट रामपुर की अदालत ने चेक बाउंस के मामले में सरकारी ठेकेदार को छह माह के साधारण कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही शिकायतकर्ता को 1.80 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश भी दिया है। मामले का शिकायतकर्ता दुकानदार है। दोषी राज कुमार पेशे से सरकारी ठेकेदार है। 20 जुलाई 2019 को ठेकेदार बिल्डिंग मटीरियल खरीदने के लिए शिकायतकर्ता की दुकान पर गया और 90 हजार रुपये का सामान खरीदा। राशि का भुगतान करने के लिए चेक दुकानदार को दिया, जो बाउंस हो गया। शिकायतकर्ता ने आरोपी से उस रकम की मांग की, लेकिन उसने टाल दिया। बार-बार कहने के बावजूद रकम का पेमेंट नहीं किया। इसके बाद, शिकायतकर्ता ने कानूनी डिमांड नोटिस भेजा। आरोपी को नोटिस मिला, लेकिन कोई पेमेंट नहीं किया। इसलिए, यह शिकायत फाइल की गई है। अदालत ने फैसला दिया है कि आरोपी यह साबित करने में नाकाम रहा है कि शिकायत करने वाले के प्रति आरोपी की कोई कानूनी जिम्मेदरी नहीं है। कोर्ट इस नतीजे पर पहुंचता है कि शिकायत करने वाले ने रिकॉर्ड पर ठोस और भरोसेमंद सबूत पेश करके बिना किसी शक के अपना केस साबित कर दिया है। आरोपी को एनआई एक्ट की धारा-138 के तहत किए गए अपराध के लिए दोषी ठहराया जाता है। दोषी को छह महीने की साधारण जेल की सज़ा दी जाती है। इसके अलावा, दोषी को शिकायत करने वाले को 1.80 लाख रुपये का मुआवजा देने का निर्देश दिया जाता है।