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बगीचों में सड़ रहा सेब, बागवानों को नहीं सरकार का सहारा : नरेश शर्मा
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पूर्व एपीएमसी शिमला किन्नौर अध्यक्ष नरेश शर्मा ठियोग में प्रैसवार्ता करते हुए। संवाद
पूर्व एपीएमसी अध्यक्ष ने प्रदेश सरकार पर लगाए आरोप
संवाद न्यूज एजेंसी
ठियोग ( रामपुर बुशहर)। ऊपरी शिमला में बारिश और आपदा के कारण ग्रामीण सड़कों, राज्य मार्गों और राष्ट्रीय राजमार्गों की हालत बेहद खराब हो गई है। पूर्व एपीएमसी अध्यक्ष नरेश शर्मा ने प्रेस वार्ता के दौरान कहा कि किसानों-बागवानों की मुश्किलें दिन-प्रतिदिन बढ़ रही हैं। बगीचों में सेब सड़ने के कगार पर है, लेकिन सरकार की घोषणाएं केवल कागजों तक ही सीमित नजर आ रही हैं। उन्होंने कहा कि वर्ष 2020 में कोरोनाकाल के दौरान किसानों ने अपनी सब्जियों को बेहतर दाम दिलाने में सफलता हासिल की थी। बागवानों को सरकार की किसी ठोस नीति का सहारा नहीं मिल रहा है। वर्तमान में सेब की फसल को बाजार तक पहुंचाना चुनौती बन गया है। पूर्व अध्यक्ष ने मांग की है कि सरकार तुरंत बागवानी को सहारा देने के लिए ठोस कदम उठाए और ग्रामीण सड़कों की मरम्मत को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करे। एपीएमसी फंड और मार्केटिंग बोर्ड के फंड के जरिये ग्रामीण सड़कों को दुरुस्त करने की पहल होनी चाहिए ताकि किसानों और बागवानों को उनकी मेहनत का उचित दाम मिल सके। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने जल्द कोई ठोस रणनीति नहीं बनाई, तो किसानों-बागवानों की स्थिति और बदतर हो जाएगी। इसका सीधा असर प्रदेश की आर्थिक स्थिति पर भी पड़ेगा। पिछले दिनों भाजपा के नेताओं ने अगली बार सत्ता में आने के बाद टेलिस्कोपिक कार्टन को दोबारा छूट देने की बात पर नरेश शर्मा ने यूनिवर्सल कार्टन को बागवानों के लिए बेहतर बताया। उन्होंने कहा कि यह निर्णय कांग्रेस सरकार के नेतृत्व में लिया गया। इसमें भाजपा के अधिकतर और बड़े नेता कांग्रेस के इस निर्णय के साथ खड़े थे। हालांकि, कुछ भाजपा नेताओं ने टेलिस्कोपिक कार्टन को शुरू करने की बात कही है, जो उनका अपना निजी बयान है। इसके बारे में कुछ अधिक कहना संभव नहीं है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
ठियोग ( रामपुर बुशहर)। ऊपरी शिमला में बारिश और आपदा के कारण ग्रामीण सड़कों, राज्य मार्गों और राष्ट्रीय राजमार्गों की हालत बेहद खराब हो गई है। पूर्व एपीएमसी अध्यक्ष नरेश शर्मा ने प्रेस वार्ता के दौरान कहा कि किसानों-बागवानों की मुश्किलें दिन-प्रतिदिन बढ़ रही हैं। बगीचों में सेब सड़ने के कगार पर है, लेकिन सरकार की घोषणाएं केवल कागजों तक ही सीमित नजर आ रही हैं। उन्होंने कहा कि वर्ष 2020 में कोरोनाकाल के दौरान किसानों ने अपनी सब्जियों को बेहतर दाम दिलाने में सफलता हासिल की थी। बागवानों को सरकार की किसी ठोस नीति का सहारा नहीं मिल रहा है। वर्तमान में सेब की फसल को बाजार तक पहुंचाना चुनौती बन गया है। पूर्व अध्यक्ष ने मांग की है कि सरकार तुरंत बागवानी को सहारा देने के लिए ठोस कदम उठाए और ग्रामीण सड़कों की मरम्मत को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करे। एपीएमसी फंड और मार्केटिंग बोर्ड के फंड के जरिये ग्रामीण सड़कों को दुरुस्त करने की पहल होनी चाहिए ताकि किसानों और बागवानों को उनकी मेहनत का उचित दाम मिल सके। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने जल्द कोई ठोस रणनीति नहीं बनाई, तो किसानों-बागवानों की स्थिति और बदतर हो जाएगी। इसका सीधा असर प्रदेश की आर्थिक स्थिति पर भी पड़ेगा। पिछले दिनों भाजपा के नेताओं ने अगली बार सत्ता में आने के बाद टेलिस्कोपिक कार्टन को दोबारा छूट देने की बात पर नरेश शर्मा ने यूनिवर्सल कार्टन को बागवानों के लिए बेहतर बताया। उन्होंने कहा कि यह निर्णय कांग्रेस सरकार के नेतृत्व में लिया गया। इसमें भाजपा के अधिकतर और बड़े नेता कांग्रेस के इस निर्णय के साथ खड़े थे। हालांकि, कुछ भाजपा नेताओं ने टेलिस्कोपिक कार्टन को शुरू करने की बात कही है, जो उनका अपना निजी बयान है। इसके बारे में कुछ अधिक कहना संभव नहीं है।