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Rampur Bushahar News: कोटखाई राज दरबार से नौ दिन बाद मूल मंदिर लौटीं दुर्गा माता पुजैली
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. नवरात्र के दौरान विधि-विधान से हुई पूजा-अर्चना, श्रद्धालुओं ने माता के दर्शन कर मांगी सुख-समृद्धि की कामना
संवाद न्यूज एजेंसी
कोटखाई (रोहड़ू)।
कोटखाई राज दरबार में नवरात्र के दौरान निभाई जाने वाली सदियों पुरानी धार्मिक परंपरा मंगलवार को संपन्न हो गई। नौ दिन तक राज दरबार में विराजमान रहने के बाद दुर्गा माता पुजैली की पालकी मंगलवार शाम पांच बजे अपने मूल मंदिर के लिए रवाना हुई। साथ ही राज दरबार में नवरात्र के दौरान चलने वाली विशेष पूजा-अर्चना का समापन हो गया। परंपरा के अनुसार, नवरात्र के पहले दिन दुर्गा माता पुजैली की पालकी को उनके मूल मंदिर से कोटखाई राज दरबार लाया जाता है। यहां माता नौ दिन तक विराजमान रहती हैं। इस दौरान माता के पुजारी प्रतिदिन सुबह और शाम राज दरबार पहुंचकर विधि-विधान से पूजा-अर्चना करते हैं। नवरात्र के दौरान क्षेत्र के श्रद्धालु राज दरबार पहुंचकर माता के दर्शन करते हैं और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। स्थानीय लोगों के लिए इस परंपरा का विशेष धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व है। यह परंपरा क्षेत्र की आस्था और प्राचीन देव संस्कृति से जुड़ी हुई है। नवरात्र संपन्न होने के बाद माता की पालकी को धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ वापस मूल मंदिर पहुंचाया जाता है। मंगलवार शाम पांच बजे पालकी के राज दरबार से रवाना होने के साथ ही नौ दिनों से जारी धार्मिक अनुष्ठान संपन्न हो गए।
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संवाद न्यूज एजेंसी
कोटखाई (रोहड़ू)।
कोटखाई राज दरबार में नवरात्र के दौरान निभाई जाने वाली सदियों पुरानी धार्मिक परंपरा मंगलवार को संपन्न हो गई। नौ दिन तक राज दरबार में विराजमान रहने के बाद दुर्गा माता पुजैली की पालकी मंगलवार शाम पांच बजे अपने मूल मंदिर के लिए रवाना हुई। साथ ही राज दरबार में नवरात्र के दौरान चलने वाली विशेष पूजा-अर्चना का समापन हो गया। परंपरा के अनुसार, नवरात्र के पहले दिन दुर्गा माता पुजैली की पालकी को उनके मूल मंदिर से कोटखाई राज दरबार लाया जाता है। यहां माता नौ दिन तक विराजमान रहती हैं। इस दौरान माता के पुजारी प्रतिदिन सुबह और शाम राज दरबार पहुंचकर विधि-विधान से पूजा-अर्चना करते हैं। नवरात्र के दौरान क्षेत्र के श्रद्धालु राज दरबार पहुंचकर माता के दर्शन करते हैं और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। स्थानीय लोगों के लिए इस परंपरा का विशेष धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व है। यह परंपरा क्षेत्र की आस्था और प्राचीन देव संस्कृति से जुड़ी हुई है। नवरात्र संपन्न होने के बाद माता की पालकी को धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ वापस मूल मंदिर पहुंचाया जाता है। मंगलवार शाम पांच बजे पालकी के राज दरबार से रवाना होने के साथ ही नौ दिनों से जारी धार्मिक अनुष्ठान संपन्न हो गए।