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Rampur Bushahar News: बलिदानी डोला राम आज भी युवाओं के हीरो, नित्थर के 20 जवान सेना में
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कारगिल युद्ध में नित्थर के शकरौली गांव के सपूत हुए थे बलिदानी
पत्नी बोलीं-बलिदान देकर देश के लिए अफना कर्ज चुका गए पति
हितेश भारती
नित्थर (कुल्लू)।
कारगिल युद्ध के दौरान कुल्लू से एकमात्र नित्थर उपतहसील के गांव शकरोली के बलिदानी डोला राम आज भी युवाओं के लिए हीरो हैं। उनके बलिदानी होने के बाद अब तक क्षेत्र से बीस युवा में सेना में जा चुके हैं। बलिदानी डोला राम की पत्नी प्रेमा देवी बताती हैं कि देश प्रेम उनकी नस-नस में भरा था और बलिदान होकर देश के लिए अपना कर्ज भी चुका गए। आज बलिदानी के बेटे अश्वनी कटोच और अंकुश कटोच अपना व्यवसाय कर रहे हैं। वे केंद्र सरकार से जो सुविधा मिल रही है, इससे संतुष्ट हैं। बलिदानी डोला राम की देश के प्रति समर्पण को भावना को देखते हुए नित्थर क्षेत्र से तब से लेकर अभी तक बीस से ज्यादा जवान सैनिक बन चुके हैं और अभी भी सेना में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। क्षेत्र का हर युवा सेना में जाना चाहता है। डोला राम के छोटे भाई स्वर्ण कटोच का कहना है कि डोला राम अच्छे बॉक्सर थे। उस समय इतनी सुविधा गांव के स्कूल में नहीं थी। उनकी रुचि स्पोर्ट्स में बहुत थी। मैं खुद कबड्डी में स्टेट और नेशनल खेला हूं। माता का देहांत दो 2002 में हुआ। मुझे मेरे भाई की वजह से काफी सम्मान मिला है l डोला राम के चाचा के लड़के पूर्व सैनिक हीरा सिंह कटोच ने बताया कि बलिदानी डोला राम की रुचि सेना में जाने की थी।
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सियाचिन की चोटी पर बंकर में घुसकर मारे थे आतंकी
कारगिल युद्ध के दौरान सियाचिन की चोटी पर दुश्मनों की टोह लेने के लिए सैनिक डोला राम को भेजा गया। ऑपरेशन विजय के दौरान डोला राम और उनके साथी अपनी टुकड़ी को चोटी पर पहुंचाने के लिए सबसे आगे जाकर रास्ता बना रहे थे। उन्हें सियाचिन की चोटी पर पहुंच कर दुश्मनों की तमाम जानकारी अपनी सेना की टुकड़ी तक पहुंचानी थी। इसी बीच शहीद डोला राम की नजर बंकर में छिपे घुसपैठियों पर पड़ी। इसके बाद डोला राम ने अपने साथियों के साथ आतंकियों को बंकरों में घुसकर मारना शुरू किया। छाती पर पांच गोलियां खाने के बावजूद डोला राम और उनके साथियों ने बलिदान होने से पहले 17 आतंकियों को मार गिराया था।
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पत्नी बोलीं-बलिदान देकर देश के लिए अफना कर्ज चुका गए पति
हितेश भारती
नित्थर (कुल्लू)।
कारगिल युद्ध के दौरान कुल्लू से एकमात्र नित्थर उपतहसील के गांव शकरोली के बलिदानी डोला राम आज भी युवाओं के लिए हीरो हैं। उनके बलिदानी होने के बाद अब तक क्षेत्र से बीस युवा में सेना में जा चुके हैं। बलिदानी डोला राम की पत्नी प्रेमा देवी बताती हैं कि देश प्रेम उनकी नस-नस में भरा था और बलिदान होकर देश के लिए अपना कर्ज भी चुका गए। आज बलिदानी के बेटे अश्वनी कटोच और अंकुश कटोच अपना व्यवसाय कर रहे हैं। वे केंद्र सरकार से जो सुविधा मिल रही है, इससे संतुष्ट हैं। बलिदानी डोला राम की देश के प्रति समर्पण को भावना को देखते हुए नित्थर क्षेत्र से तब से लेकर अभी तक बीस से ज्यादा जवान सैनिक बन चुके हैं और अभी भी सेना में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। क्षेत्र का हर युवा सेना में जाना चाहता है। डोला राम के छोटे भाई स्वर्ण कटोच का कहना है कि डोला राम अच्छे बॉक्सर थे। उस समय इतनी सुविधा गांव के स्कूल में नहीं थी। उनकी रुचि स्पोर्ट्स में बहुत थी। मैं खुद कबड्डी में स्टेट और नेशनल खेला हूं। माता का देहांत दो 2002 में हुआ। मुझे मेरे भाई की वजह से काफी सम्मान मिला है l डोला राम के चाचा के लड़के पूर्व सैनिक हीरा सिंह कटोच ने बताया कि बलिदानी डोला राम की रुचि सेना में जाने की थी।
सियाचिन की चोटी पर बंकर में घुसकर मारे थे आतंकी
कारगिल युद्ध के दौरान सियाचिन की चोटी पर दुश्मनों की टोह लेने के लिए सैनिक डोला राम को भेजा गया। ऑपरेशन विजय के दौरान डोला राम और उनके साथी अपनी टुकड़ी को चोटी पर पहुंचाने के लिए सबसे आगे जाकर रास्ता बना रहे थे। उन्हें सियाचिन की चोटी पर पहुंच कर दुश्मनों की तमाम जानकारी अपनी सेना की टुकड़ी तक पहुंचानी थी। इसी बीच शहीद डोला राम की नजर बंकर में छिपे घुसपैठियों पर पड़ी। इसके बाद डोला राम ने अपने साथियों के साथ आतंकियों को बंकरों में घुसकर मारना शुरू किया। छाती पर पांच गोलियां खाने के बावजूद डोला राम और उनके साथियों ने बलिदान होने से पहले 17 आतंकियों को मार गिराया था।
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