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चेबड़ी में पारंपरिक गीत गाकर मनाया दीपावली का पर्व
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नित्थर के चेबडी में पारंपरिक तरीके से दिवाली पर्व मनाते लोग।
- फोटो : RAMPUR-HP
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नित्थर (कुल्लू)। नित्थर उपतहसील के चेबड़ी गांव में माता भुवनेश्वरी का भव्य मंदिर है। इस मंदिर परिसर में दीपावली हर्षोल्लास और पारंपरिक तरीके से मनाई गई। गर्भगृह में स्थापित माता की मूर्ति को सजाया गया। दीपावली की संध्या को विधिवत पारंपरिक पूजा की गई। हर तीन साल के बाद बुढ़ा महादेव दीपावाली में शिरकत करते हैं। कई परपंरिक लोक गीत गाकर तब इस दीपावली का आनंद लोगों ने लिया
शाम को सभी लोग अपने-अपने घरों में गणेश और माता लक्ष्मी की पूजा करने के बाद मंदिर में इकट्ठा हुए और शाम को गड़िए का आगमन हुआ। इसमें झल्ली और घरोली गांव के लोगों ने गाड़िए की भूमिका निभाई। मशाल जलाकर दीपावली के पारंपरिक गीत गाते हुए कुंड जलाकर दिवाली की शुरुआत की।
चेबडी गांव के लोग माता भुवनेश्वरी के मंदिर में ब्रह्म भक्ति गीत गाते हुए रात भर नाचते रहे।
मंदिर के कारदार, पुरोहित और बुद्धिजीवियों के मुताबिक दीपावली के दिन पारंपरिक रीति रिवाजों से दीपावली पर और उसके अगले दिन कार्यक्रम का आयोजन होता है। परंपराओं का बखूबी निर्वहन कर रहे हैं।
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स्थानीय निवासी बैनर्जी शर्मा ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने जब इंद्र के प्रकोप से गोकुल को बचाने के लिए गोवर्धन पूजा की थी। भुवनेश्वरी माता के मंदिर के प्रांगण में गोवर्धन पूजा की जाती है और पारंपरिक गीत गाए जाते हैं।
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शाम को सभी लोग अपने-अपने घरों में गणेश और माता लक्ष्मी की पूजा करने के बाद मंदिर में इकट्ठा हुए और शाम को गड़िए का आगमन हुआ। इसमें झल्ली और घरोली गांव के लोगों ने गाड़िए की भूमिका निभाई। मशाल जलाकर दीपावली के पारंपरिक गीत गाते हुए कुंड जलाकर दिवाली की शुरुआत की।
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चेबडी गांव के लोग माता भुवनेश्वरी के मंदिर में ब्रह्म भक्ति गीत गाते हुए रात भर नाचते रहे।
मंदिर के कारदार, पुरोहित और बुद्धिजीवियों के मुताबिक दीपावली के दिन पारंपरिक रीति रिवाजों से दीपावली पर और उसके अगले दिन कार्यक्रम का आयोजन होता है। परंपराओं का बखूबी निर्वहन कर रहे हैं।
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स्थानीय निवासी बैनर्जी शर्मा ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने जब इंद्र के प्रकोप से गोकुल को बचाने के लिए गोवर्धन पूजा की थी। भुवनेश्वरी माता के मंदिर के प्रांगण में गोवर्धन पूजा की जाती है और पारंपरिक गीत गाए जाते हैं।