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Rampur Bushahar News: 1500 मीटर प्रभावित क्षेत्र में लगे पक्की आरसीसी की दीवार
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निजी कंपनी प्रबंधन क्रेट वायर लगाकर कर रही इतिश्री
संघर्ष समिति ने कंपनी प्रबंधन को दिया सात दिन का अल्टीमेटम
नहीं लिया उचित निर्णय तो परियोजना के मुख्यद्वार पर होगा अनिश्चितकालीन धरना
संवाद न्यूज एजेंसी
सांगला (किन्नौर)। सांगला के कामरू में डैम साइट पर क्रेट वायर लगाने का संघर्ष समिति कामरू, प्रभावित पंचायत के प्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने रोष जताया है। ग्रामीणों और समिति ने जेएसडब्लू कंपनी प्रबंधन को सात दिन का अल्टीमेटम दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि कंपनी प्रबंधन अपने ही तरीके से प्रपोजल बनाकर डैम साइट पर क्रेट वायर मनमर्जी से लगा रही है। क्रेट वायर लगाना स्थायी निवारण नहीं है, क्योंकि यहां हर वर्ष बास्पा नदी का जलस्तर बढ़ने से बैराज साइट पर लगी क्रेट वायर बह जाती है और इससे ग्रामीणों की भूमि का कटान होता आ रहा है। इससे कामरू गांव के हजारों लोगों के सेब के बगीचे को हर वर्ष नुकसान पहुंचता है।
संघर्ष समिति कामरू के अध्यक्ष कृष्ण सिंह नेगी, सदस्य रोहित नेगी, शमशेर सिंह नेगी, विजेंद्र सिंह नेगी, ओमकार नेगी, कुलभूषण नेगी, प्रदीप कुमार नेगी, राणा नेगी, नीरज नेगी, योजिंद्र सिंह, विशाल नेगी, राज कुमार नेगी, धर्म प्रकाश नेगी और हेमंद सिंह नेगी सहित प्रभावित ग्रामीणों ने बताया कि यदि कंपनी प्रबंधन ने सात दिन के भीतर उचित निर्णय नहीं लिया तो जेएसडब्लू परियोजना के मुख्यद्वार पर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर बैठकर उग्र आंदोलन किया जाएगा।
लोगों ने कहा कि जेएसडब्ल्यू कंपनी प्रबंधन से बैराज के दोनों ओर 1500 मीटर का प्रभावित क्षेत्र है। इस स्थान पर पक्की आरसीसी दीवार लगाकर स्थाई बंदोबस्त किया जाना चाहिए। डैम साइट से निजी ठेकेदारों को रेता व बजरी न निकालने की भी ग्रामीणों ने मांग की है। उन्होंने कहा कि ठेकेदार अपने मुनाफे के लिए अधिक खोदाई करते हैं, जिससे ग्रामीणों के खेतो में हर वर्ष भूमि कटान हो रहा है। ऐसे में ग्रामीणों की नकदी फसल सहित भूमि कटान से उन्हें क्षति पहुंच रही है। पूर्व की भांति जेपी कंपनी के समय वैली के चांसू से छितकुल करीब आधा दर्जन से अधिक ग्राम पंचायतों के लोगों को बजरी और रेता मुफ्त में आवंटित किया जाता था, जिससे सिल्ट कम मात्रा में निकलती थी। ऐसे में गहराई कम होने से स्थानीय लोगों का नुकसान कम होता रहा। संघर्ष समिति ने कहा कि ग्लोबल वार्मिंग के कारण इस वर्ष बरसात अधिक होगी, यदि इस दौरान कंपनी प्रबंधन ने स्थायी बंदोबस्त नहीं किया तो बैराज साइट के 1500 मीटर के दायरे में होने वाले नुकसान की जिम्मेवारी निजी कंपनी की होगी।
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क्रेट वायर के लिए ही प्रपोजल बना है
जेएसडब्ल्यू परियोजना के एचओपी कौशिक मौलिक ने बताया कि परियोजना के डिजाइन विंग की ओर से इस तरह का प्रपोजल बना है कि हम वहां पक्की आरसीसी दीवार नहीं, बल्कि क्रेट वायर ही लगाई जाएगी।
- संवाद
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संघर्ष समिति ने कंपनी प्रबंधन को दिया सात दिन का अल्टीमेटम
नहीं लिया उचित निर्णय तो परियोजना के मुख्यद्वार पर होगा अनिश्चितकालीन धरना
संवाद न्यूज एजेंसी
सांगला (किन्नौर)। सांगला के कामरू में डैम साइट पर क्रेट वायर लगाने का संघर्ष समिति कामरू, प्रभावित पंचायत के प्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने रोष जताया है। ग्रामीणों और समिति ने जेएसडब्लू कंपनी प्रबंधन को सात दिन का अल्टीमेटम दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि कंपनी प्रबंधन अपने ही तरीके से प्रपोजल बनाकर डैम साइट पर क्रेट वायर मनमर्जी से लगा रही है। क्रेट वायर लगाना स्थायी निवारण नहीं है, क्योंकि यहां हर वर्ष बास्पा नदी का जलस्तर बढ़ने से बैराज साइट पर लगी क्रेट वायर बह जाती है और इससे ग्रामीणों की भूमि का कटान होता आ रहा है। इससे कामरू गांव के हजारों लोगों के सेब के बगीचे को हर वर्ष नुकसान पहुंचता है।
संघर्ष समिति कामरू के अध्यक्ष कृष्ण सिंह नेगी, सदस्य रोहित नेगी, शमशेर सिंह नेगी, विजेंद्र सिंह नेगी, ओमकार नेगी, कुलभूषण नेगी, प्रदीप कुमार नेगी, राणा नेगी, नीरज नेगी, योजिंद्र सिंह, विशाल नेगी, राज कुमार नेगी, धर्म प्रकाश नेगी और हेमंद सिंह नेगी सहित प्रभावित ग्रामीणों ने बताया कि यदि कंपनी प्रबंधन ने सात दिन के भीतर उचित निर्णय नहीं लिया तो जेएसडब्लू परियोजना के मुख्यद्वार पर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर बैठकर उग्र आंदोलन किया जाएगा।
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लोगों ने कहा कि जेएसडब्ल्यू कंपनी प्रबंधन से बैराज के दोनों ओर 1500 मीटर का प्रभावित क्षेत्र है। इस स्थान पर पक्की आरसीसी दीवार लगाकर स्थाई बंदोबस्त किया जाना चाहिए। डैम साइट से निजी ठेकेदारों को रेता व बजरी न निकालने की भी ग्रामीणों ने मांग की है। उन्होंने कहा कि ठेकेदार अपने मुनाफे के लिए अधिक खोदाई करते हैं, जिससे ग्रामीणों के खेतो में हर वर्ष भूमि कटान हो रहा है। ऐसे में ग्रामीणों की नकदी फसल सहित भूमि कटान से उन्हें क्षति पहुंच रही है। पूर्व की भांति जेपी कंपनी के समय वैली के चांसू से छितकुल करीब आधा दर्जन से अधिक ग्राम पंचायतों के लोगों को बजरी और रेता मुफ्त में आवंटित किया जाता था, जिससे सिल्ट कम मात्रा में निकलती थी। ऐसे में गहराई कम होने से स्थानीय लोगों का नुकसान कम होता रहा। संघर्ष समिति ने कहा कि ग्लोबल वार्मिंग के कारण इस वर्ष बरसात अधिक होगी, यदि इस दौरान कंपनी प्रबंधन ने स्थायी बंदोबस्त नहीं किया तो बैराज साइट के 1500 मीटर के दायरे में होने वाले नुकसान की जिम्मेवारी निजी कंपनी की होगी।
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क्रेट वायर के लिए ही प्रपोजल बना है
जेएसडब्ल्यू परियोजना के एचओपी कौशिक मौलिक ने बताया कि परियोजना के डिजाइन विंग की ओर से इस तरह का प्रपोजल बना है कि हम वहां पक्की आरसीसी दीवार नहीं, बल्कि क्रेट वायर ही लगाई जाएगी।
- संवाद