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Rampur Bushahar News: 1.054 किलोग्राम चरस बरामदगी मामले में आरोपी की जमानत याचिका खारिज
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एक जनवरी को झाकड़ी पुलिस ने पकड़ा था आरोपी
संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर बुशहर। रामपुर स्थित विशेष न्यायाधीश-दो किन्नौर की अदालत ने 1.054 किलोग्राम चरस बरामदगी के मामले में आरोपी की जमानत याचिका खारिज कर दी है। राज्य की ओर से दायर जवाब में बताया गया कि एक जनवरी, 2026 को पुलिस दल झाकड़ी क्षेत्र में गश्त कर रहा था। इसी दौरान उन्होंने सागर सिंह को एक पारदर्शी पॉलिथीन के साथ देखा। तलाशी लेने पर उसके पास से 1.054 किलोग्राम चरस बरामद हुई, जो व्यावसायिक मात्रा है। पुलिस थाना झाकड़ी में आरोपी सागर सिंह निवासी रामपुर खिलाफ एनडीपीएस अधिनियम के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी। राज्य ने जमानत याचिका का विरोध करते हुए कहा कि सागर सिंह के खिलाफ पहले भी एनडीपीएस अधिनियम का एक मामला लंबित है। अभियोजन पक्ष ने तर्क दिया कि इतनी बड़ी मात्रा में चरस की बरामदगी से पता चलता है कि आरोपी एक तस्कर है। यदि उसे जमानत पर रिहा किया जाता है, तो वह गवाहों को धमका सकता है या इसी तरह का अपराध दोबारा कर सकता है। अदालत ने इन दलीलों से सहमति जताई।
अदालत ने मामले के रिकॉर्ड और दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद पाया कि यह जमानत देने का उचित मामला नहीं है। अदालत ने कहा कि प्रथम दृष्टया आरोपी की ड्रग व्यापार में संलिप्तता प्रतीत होती है। आरोपी के खिलाफ गंभीर आरोप हैं। जनहित को ध्यान में रखते हुए इस स्तर पर जमानत नहीं दी जा सकती।
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संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर बुशहर। रामपुर स्थित विशेष न्यायाधीश-दो किन्नौर की अदालत ने 1.054 किलोग्राम चरस बरामदगी के मामले में आरोपी की जमानत याचिका खारिज कर दी है। राज्य की ओर से दायर जवाब में बताया गया कि एक जनवरी, 2026 को पुलिस दल झाकड़ी क्षेत्र में गश्त कर रहा था। इसी दौरान उन्होंने सागर सिंह को एक पारदर्शी पॉलिथीन के साथ देखा। तलाशी लेने पर उसके पास से 1.054 किलोग्राम चरस बरामद हुई, जो व्यावसायिक मात्रा है। पुलिस थाना झाकड़ी में आरोपी सागर सिंह निवासी रामपुर खिलाफ एनडीपीएस अधिनियम के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी। राज्य ने जमानत याचिका का विरोध करते हुए कहा कि सागर सिंह के खिलाफ पहले भी एनडीपीएस अधिनियम का एक मामला लंबित है। अभियोजन पक्ष ने तर्क दिया कि इतनी बड़ी मात्रा में चरस की बरामदगी से पता चलता है कि आरोपी एक तस्कर है। यदि उसे जमानत पर रिहा किया जाता है, तो वह गवाहों को धमका सकता है या इसी तरह का अपराध दोबारा कर सकता है। अदालत ने इन दलीलों से सहमति जताई।
अदालत ने मामले के रिकॉर्ड और दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद पाया कि यह जमानत देने का उचित मामला नहीं है। अदालत ने कहा कि प्रथम दृष्टया आरोपी की ड्रग व्यापार में संलिप्तता प्रतीत होती है। आरोपी के खिलाफ गंभीर आरोप हैं। जनहित को ध्यान में रखते हुए इस स्तर पर जमानत नहीं दी जा सकती।
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