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Rampur Bushahar News: चेक बाउंस के मामले में सेब कारोबारी को छह माह का कारावास
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अदालत ने 4.67 लाख रुपये का जुर्माना देने का भी निर्देश दिया
संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर बुशहर। अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट रामपुर बुशहर की अदालत ने चेक बाउंस के मामले में सेब कारोबारी को छह माह के साधारण कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही 4.67 लाख रुपये का जुर्माना देने का निर्देश दिया है। मामले का शिकायतकर्ता पूरन खोंड एक सेब का बागवान है। वह विभिन्न फल मंडियों में कमीशन के आधार पर बिक्री के लिए अपने सेब की खेप भेजता था। आरोपी सुशील नारकंडा में फ्रूट कंपनी से सेब की बिक्री और खरीद का व्यवसाय चला रहा था। शिकायतकर्ता ने कमीशन बेसिस पर 224 सेब के डिब्बे भेजे। आरोपी ने सेब के डिब्बों के कंसाइनमेंट बेच दिए। आरोपी ने 8,675 नकद पेमेंट किया और बाकी बिक्री की रकम के लिए चेक दिया, जो बाउंस हो गया। शिकायतकर्ता ने आरोपी से बताई गई रकम की मांग की, लेकिन उसने टाल दिया। इसके बाद, आरोपी को कानूनी डिमांड नोटिस भेजा। आरोपी को नोटिस मिला था, लेकिन उसने कोई पेमेंट नहीं किया। इसलिए, यह शिकायत फाइल की गई है। अदालत ने फैसला दिया है कि आरोपी शिकायतकर्ता को चेक की रकम का पेमेंट करने के लिए जिम्मेदार है। वह शिकायतकर्ता को पेमेंट करने में नाकाम रहा है। असल में, आरोपी यह साबित करने में नाकाम रहा है कि शिकायतकर्ता के प्रति आरोपी की कोई कानूनी जिम्मेदारी नहीं है। दोषी को एनआई एक्ट के सेक्शन-138 के तहत किए छह महीने के साधारण कारावास की सजा सजा दी जाती है। इसके अलावा, दोषी को 4.67 लाख रुपये का जुर्माना हर्जाना देने का आदेश दिया जाता है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर बुशहर। अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट रामपुर बुशहर की अदालत ने चेक बाउंस के मामले में सेब कारोबारी को छह माह के साधारण कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही 4.67 लाख रुपये का जुर्माना देने का निर्देश दिया है। मामले का शिकायतकर्ता पूरन खोंड एक सेब का बागवान है। वह विभिन्न फल मंडियों में कमीशन के आधार पर बिक्री के लिए अपने सेब की खेप भेजता था। आरोपी सुशील नारकंडा में फ्रूट कंपनी से सेब की बिक्री और खरीद का व्यवसाय चला रहा था। शिकायतकर्ता ने कमीशन बेसिस पर 224 सेब के डिब्बे भेजे। आरोपी ने सेब के डिब्बों के कंसाइनमेंट बेच दिए। आरोपी ने 8,675 नकद पेमेंट किया और बाकी बिक्री की रकम के लिए चेक दिया, जो बाउंस हो गया। शिकायतकर्ता ने आरोपी से बताई गई रकम की मांग की, लेकिन उसने टाल दिया। इसके बाद, आरोपी को कानूनी डिमांड नोटिस भेजा। आरोपी को नोटिस मिला था, लेकिन उसने कोई पेमेंट नहीं किया। इसलिए, यह शिकायत फाइल की गई है। अदालत ने फैसला दिया है कि आरोपी शिकायतकर्ता को चेक की रकम का पेमेंट करने के लिए जिम्मेदार है। वह शिकायतकर्ता को पेमेंट करने में नाकाम रहा है। असल में, आरोपी यह साबित करने में नाकाम रहा है कि शिकायतकर्ता के प्रति आरोपी की कोई कानूनी जिम्मेदारी नहीं है। दोषी को एनआई एक्ट के सेक्शन-138 के तहत किए छह महीने के साधारण कारावास की सजा सजा दी जाती है। इसके अलावा, दोषी को 4.67 लाख रुपये का जुर्माना हर्जाना देने का आदेश दिया जाता है।