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Rampur Bushahar News: चेक बाउंस के दोषी की अपील खारिज, एक साल की सजा बरकरार
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3.47 लाख रुपये का देना होगा मुआवजा
सेब पैकिंग सामग्री के भुगतान के लिए 3.23 लाख के चार चेक किए थे जारी
संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर बुशहर। चेक बाउंस के मामले में रामपुर स्थित अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश किन्नौर की अदालत ने दोषी दुर्गा सिंह की अपील खारिज कर दी है। अदालत ने न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी आनी की ओर से 21 अगस्त 2025 को सुनाई एक साल के कैद और 3,47,900 रुपये मुआवजे की सजा को बरकरार रखा है। अदालत ने दोषी को 12 अक्तूबर को निचली अदालत के समक्ष आत्मसमर्पण करने के आदेश दिए हैं।
पंकज कुमार ने शिकायत की थी कि दुर्गा सिंह ने अगस्त 2021 में पंकज कुमार से सेब पैकिंग सामग्री के 610 बंडल लिए थे। इनकी कीमत 3,23,300 रुपये थी। भुगतान के लिए दुर्गा सिंह ने 3,22,900 रुपये के चार चेक जारी किए। बैंक में प्रस्तुत करने पर अपर्याप्त निधि के कारण चेक बाउंस हो गए। इसके बाद पंकज कुमार ने दुर्गा सिंह को कानूनी नोटिस भेजा।
निचली अदालत ने दुर्गा सिंह को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई थी। इसके खिलाफ दायर अपील में दुर्गा सिंह ने दावा किया कि चेक उनके भाई को दिए थे और उनका दुरुपयोग किया गया। उन्होंने पंकज कुमार के साथ किसी भी तरह के लेनदेन से भी इन्कार किया। अदालत ने पाया कि दुर्गा सिंह ने चेक पर अपने हस्ताक्षर होने की बात स्वीकार की थी। चेक के कथित दुरुपयोग को लेकर उन्होंने कोई प्राथमिकी दर्ज नहीं करवाई।
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कानूनी नोटिस मिलने के बाद भी उन्होंने कोई कार्रवाई नहीं की। अदालत ने बचाव पक्ष के इस तर्क को अविश्वसनीय माना और कहा कि यह केवल समय हासिल करने का प्रयास था। अदालत ने कहा कि शिकायतकर्ता के पक्ष में वैधानिक अनुमान मौजूद है। इन परिस्थितियों में अदालत ने निचली अदालत के फैसले में हस्तक्षेप का कोई आधार नहीं पाया और अपील खारिज कर दी।
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सेब पैकिंग सामग्री के भुगतान के लिए 3.23 लाख के चार चेक किए थे जारी
संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर बुशहर। चेक बाउंस के मामले में रामपुर स्थित अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश किन्नौर की अदालत ने दोषी दुर्गा सिंह की अपील खारिज कर दी है। अदालत ने न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी आनी की ओर से 21 अगस्त 2025 को सुनाई एक साल के कैद और 3,47,900 रुपये मुआवजे की सजा को बरकरार रखा है। अदालत ने दोषी को 12 अक्तूबर को निचली अदालत के समक्ष आत्मसमर्पण करने के आदेश दिए हैं।
पंकज कुमार ने शिकायत की थी कि दुर्गा सिंह ने अगस्त 2021 में पंकज कुमार से सेब पैकिंग सामग्री के 610 बंडल लिए थे। इनकी कीमत 3,23,300 रुपये थी। भुगतान के लिए दुर्गा सिंह ने 3,22,900 रुपये के चार चेक जारी किए। बैंक में प्रस्तुत करने पर अपर्याप्त निधि के कारण चेक बाउंस हो गए। इसके बाद पंकज कुमार ने दुर्गा सिंह को कानूनी नोटिस भेजा।
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निचली अदालत ने दुर्गा सिंह को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई थी। इसके खिलाफ दायर अपील में दुर्गा सिंह ने दावा किया कि चेक उनके भाई को दिए थे और उनका दुरुपयोग किया गया। उन्होंने पंकज कुमार के साथ किसी भी तरह के लेनदेन से भी इन्कार किया। अदालत ने पाया कि दुर्गा सिंह ने चेक पर अपने हस्ताक्षर होने की बात स्वीकार की थी। चेक के कथित दुरुपयोग को लेकर उन्होंने कोई प्राथमिकी दर्ज नहीं करवाई।
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कानूनी नोटिस मिलने के बाद भी उन्होंने कोई कार्रवाई नहीं की। अदालत ने बचाव पक्ष के इस तर्क को अविश्वसनीय माना और कहा कि यह केवल समय हासिल करने का प्रयास था। अदालत ने कहा कि शिकायतकर्ता के पक्ष में वैधानिक अनुमान मौजूद है। इन परिस्थितियों में अदालत ने निचली अदालत के फैसले में हस्तक्षेप का कोई आधार नहीं पाया और अपील खारिज कर दी।