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Rampur Bushahar News: चेक बाउंस के आरोपी की अपील खारिज, छह माह कारावास की सजा बरकरार
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अदालत ने आरोपी पर 2.35 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया
संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर बुशहर। रामपुर स्थित सत्र न्यायाधीश किन्नौर की अदालत ने चेक बाउंस के एक मामले में आरोपी की अपील खारिज कर दी है। छह महीने के साधारण कारावास और 2.35 लाख रुपये का मुआवजा शिकायतकर्ता को देने का आदेश बरकरार रखा गया है। दोषी को 30 दिनों के भीतर निचली अदालत के समक्ष आत्मसमर्पण करने का आदेश दिया है। आरोपी संजीव वर्मा ने अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, रामपुर बुशहर की ओर से 4 जुलाई 2015 को दिए गए फैसले के खिलाफ यह अपील दाखिल की थी। निचली अदालत ने आरोपी को दोषी ठहराया था। उच्च न्यायालय ने 28 जुलाई 2026 को इस अपील पर तेजी से सुनवाई करने का आदेश दिया था। शिकायतकर्ता सुरेंद्र मोहन फ्रूट एजेंसी के मालिक है। संजीव वर्मा भी सेब के कारोबार से जुड़ा है। संजीव ने सुरेंद्र मोहन को 70 हजार रुपये और 64,500 रुपये के दो चेक दिए थे। ये चेक अपर्याप्त धन के कारण अनादरित हो गए थे। शिकायतकर्ता ने मांग नोटिस भेजा, लेकिन आरोपी संजीव वर्मा ने भुगतान नहीं किया। इसके बाद शिकायत दर्ज की गई। आरोपी का मुख्य बचाव यह था कि चेक सुरक्षा के तौर पर दिए गए थे। सत्र न्यायाधीश ने निचली अदालत के दोषसिद्धि के फैसले में कोई अवैधता नहीं पाई। उन्होंने कहा कि निचली अदालत का फैसला हस्तक्षेप के योग्य नहीं है। अपील में कोई दम नहीं था, इसलिए इसे खारिज कर दिया गया।
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संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर बुशहर। रामपुर स्थित सत्र न्यायाधीश किन्नौर की अदालत ने चेक बाउंस के एक मामले में आरोपी की अपील खारिज कर दी है। छह महीने के साधारण कारावास और 2.35 लाख रुपये का मुआवजा शिकायतकर्ता को देने का आदेश बरकरार रखा गया है। दोषी को 30 दिनों के भीतर निचली अदालत के समक्ष आत्मसमर्पण करने का आदेश दिया है। आरोपी संजीव वर्मा ने अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, रामपुर बुशहर की ओर से 4 जुलाई 2015 को दिए गए फैसले के खिलाफ यह अपील दाखिल की थी। निचली अदालत ने आरोपी को दोषी ठहराया था। उच्च न्यायालय ने 28 जुलाई 2026 को इस अपील पर तेजी से सुनवाई करने का आदेश दिया था। शिकायतकर्ता सुरेंद्र मोहन फ्रूट एजेंसी के मालिक है। संजीव वर्मा भी सेब के कारोबार से जुड़ा है। संजीव ने सुरेंद्र मोहन को 70 हजार रुपये और 64,500 रुपये के दो चेक दिए थे। ये चेक अपर्याप्त धन के कारण अनादरित हो गए थे। शिकायतकर्ता ने मांग नोटिस भेजा, लेकिन आरोपी संजीव वर्मा ने भुगतान नहीं किया। इसके बाद शिकायत दर्ज की गई। आरोपी का मुख्य बचाव यह था कि चेक सुरक्षा के तौर पर दिए गए थे। सत्र न्यायाधीश ने निचली अदालत के दोषसिद्धि के फैसले में कोई अवैधता नहीं पाई। उन्होंने कहा कि निचली अदालत का फैसला हस्तक्षेप के योग्य नहीं है। अपील में कोई दम नहीं था, इसलिए इसे खारिज कर दिया गया।