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खूंदों के आगमन के साथ रनोल में आरंभ हुआ शांद महायज्ञ
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रनोल शांद में देवलुओं संघ जाते पुजारली के देवता महादेव
- फोटो : RAMPUR-HP
रोहड़ू। भारी बर्फबारी के बीच रनोल में शांद महायज्ञ का आगाज हो गया। लोगों की आस्था मौसम पर भारी पड़ी और बर्फ के बीच लोगों ने नंगे पांव देवताओं का स्वागत किया। कई श्रद्धालु नंगे पांव देवताओं के साथ नाचते रहे। 29 साल के बाद यहां शांद महायज्ञ होने जा रहा है। भारी बर्फबारी के बीच भी सभी खूंद (देवता और देवलु) रनोल पहुंचे। हथियारों से लैस देवलुओं का पारंपरिक नृत्य संघेड़ा रस्म का मुख्य आकर्षण रही। सभी देवलुओं के लिए स्थानीय मंदिर कमेटी की ओर से खानपान और ठहरने की व्यवस्था की गई है। मंगलवार को भी दिन भर रनोल में बर्फबारी का क्रम चलता रहा, लेकिन बर्फबारी लोगों की आस्था के आगे नहीं टिक सकी।
पहले दिन खूंद (देवता और देवलु) के आगमन के साथ संघेड़ा रस्म निभाई गई। मंगलवार दोपहर तक सभी मेहमान देवता रनोल पहुंचे। मेजबान देवता खंटू मंदिर कमेटी की ओर से सभी देवताओं का अभिनंदन किया गया। शांद महायज्ञ में सभी देवलु हथियारों से लैस होकर पहुंचे हैं। बर्फबारी के बीच भी देवलु पारंपरिक वाद्य यंत्रों की धुनों पर नाचते रहे। शांद महायज्ञ में आठ जनवरी को दोपहर बाद शिखा पूजन की मुख्य रस्म पारंपरिक विधि से निभाई जाएगी। शिखा पूजन की मुख्य रस्म के बाद सभी देवलु मंदिर की परिक्रमा करेंगे।
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शांद महायज्ञ में पहुंचे हैं क्षेत्र के यह देवता
महायज्ञ में जाबल से नारायण देवता, पुजारली से महादेव देवता, रोहल से पवासी देवता, थली से गुडारू देवता, देवीधार से खंटू देवता, टोड़सा से परशुराम, नंडला से परशुराम, धगोली से भी परशुराम देवता शामिल हुए हैं।
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देवीधार तक जा रही बसें, सात किमी पैदल चल रहे श्रद्धालु
प्रशासन की ओर से शांद महायज्ञ में जाने के लिए बडियारा से चार बसें लगाई गई हैं, लेकिन बर्फबारी के कारण बसें रनोल से सात किलोमीटर पीछे देवीधार तक ही जा रही है। यहां से लोगों को पैदल सफर करना पड़ रहा है। कई लोग छोटे वाहनों के सहारे रनोल पहुंचे हैं। ट्रैफिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए मौके पर पुलिस के जवान भी तैनात किए गए हैं।
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मंदिर कमेटी मोतमीन जयईंद्र सिंह कुपवाण ने बताया कि बर्फबारी होने के बाद भी शांद महायज्ञ में देवलुओं का जोश कम नहीं हुआ है। मंगलवार को सभी मेहमान देवताओं का रनोल में आगमन हो गया है। रनोल में मंदिर कमेटी की ओर से भंडारा भी लगाया जा रहा है। देवलुओं के ठहरने और खानपान की व्यवस्था मंदिर कमेटी की ओर से की गई है।
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पहले दिन खूंद (देवता और देवलु) के आगमन के साथ संघेड़ा रस्म निभाई गई। मंगलवार दोपहर तक सभी मेहमान देवता रनोल पहुंचे। मेजबान देवता खंटू मंदिर कमेटी की ओर से सभी देवताओं का अभिनंदन किया गया। शांद महायज्ञ में सभी देवलु हथियारों से लैस होकर पहुंचे हैं। बर्फबारी के बीच भी देवलु पारंपरिक वाद्य यंत्रों की धुनों पर नाचते रहे। शांद महायज्ञ में आठ जनवरी को दोपहर बाद शिखा पूजन की मुख्य रस्म पारंपरिक विधि से निभाई जाएगी। शिखा पूजन की मुख्य रस्म के बाद सभी देवलु मंदिर की परिक्रमा करेंगे।
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शांद महायज्ञ में पहुंचे हैं क्षेत्र के यह देवता
महायज्ञ में जाबल से नारायण देवता, पुजारली से महादेव देवता, रोहल से पवासी देवता, थली से गुडारू देवता, देवीधार से खंटू देवता, टोड़सा से परशुराम, नंडला से परशुराम, धगोली से भी परशुराम देवता शामिल हुए हैं।
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देवीधार तक जा रही बसें, सात किमी पैदल चल रहे श्रद्धालु
प्रशासन की ओर से शांद महायज्ञ में जाने के लिए बडियारा से चार बसें लगाई गई हैं, लेकिन बर्फबारी के कारण बसें रनोल से सात किलोमीटर पीछे देवीधार तक ही जा रही है। यहां से लोगों को पैदल सफर करना पड़ रहा है। कई लोग छोटे वाहनों के सहारे रनोल पहुंचे हैं। ट्रैफिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए मौके पर पुलिस के जवान भी तैनात किए गए हैं।
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मंदिर कमेटी मोतमीन जयईंद्र सिंह कुपवाण ने बताया कि बर्फबारी होने के बाद भी शांद महायज्ञ में देवलुओं का जोश कम नहीं हुआ है। मंगलवार को सभी मेहमान देवताओं का रनोल में आगमन हो गया है। रनोल में मंदिर कमेटी की ओर से भंडारा भी लगाया जा रहा है। देवलुओं के ठहरने और खानपान की व्यवस्था मंदिर कमेटी की ओर से की गई है।