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Rampur Bushahar News: रकछम की पहाड़ियों में रोमांच का उत्सव, विदेशी पर्वतारोहियों संग स्थानीय बच्चे भी सीख रहे चढ़ाई के गुर

Mon, 12 Oct 2026 11:26 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Mon, 12 Oct 2026 11:26 PM IST
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A celebration of adventure in the hills of Rakchham
किन्नौर जिले के रकछम में रॉक क्लाइबिंग करते प्रतिभागी। स्रोत : क्लब
फेस्टिवल में पर्यटन, रोजगार, संस्कृति और वन्यजीव संरक्षण को बढ़ावा देने पर जोर
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संवाद न्यूज एजेंसी
सांगला (किन्नौर)। जिले की सांगला घाटी के रकछम में पांच दिवसीय रकछम क्लाइम्बिंग फेस्टिवल का रोमांच शुरू हो गया है। विदेशी पर्वतारोहियों के साथ स्थानीय बच्चे भी चढ़ाई के गुर सीख रहे हैं। देश के विभिन्न हिस्सों से आए क्लाइम्बिंग उत्साही प्रतिभागियों के साथ ऑस्ट्रिया, स्विट्जरलैंड, जर्मनी, आइसलैंड, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, स्कॉटलैंड और इंग्लैंड के करीब 15 से 20 अनुभवी पर्वतारोही हिस्सा ले रहे हैं। फेस्टिवल में साहसिक पर्यटन के साथ पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय संस्कृति को बढ़ावा देने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। रकछम माउंटेनियरिंग क्लब के अध्यक्ष नरेंद्र सिंह नेगी और उपाध्यक्ष नंदकिशोर उर्फ जोनी ने बताया कि आयोजन का उद्देश्य किन्नौर में पर्यटन को बढ़ावा देना, स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा करना और लोगों को वन्यजीव संरक्षण के प्रति जागरूक करना है। उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष की तुलना में इस बार अधिक प्रतिभागियों की भागीदारी क्षेत्र में साहसिक पर्यटन के प्रति बढ़ते आकर्षण को दर्शाती है। फेस्टिवल की खास बात यह है कि रकछम के स्थानीय स्कूल के बच्चों को पर्वतारोहण का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसमें स्कूल के शिक्षक गौरव अहम भूमिका निभा रहे हैं। इस पहल से बच्चों में आत्मविश्वास, अनुशासन और साहसिक गतिविधियों के प्रति रुचि बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। वन विभाग के सहयोग से पक्षी अवलोकन भ्रमण (बर्ड वॉक) आयोजित किया जा रहा है। इसके माध्यम से प्रतिभागियों को किन्नौर की पक्षी विविधता और हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र की जानकारी दी जाएगी। फेस्टिवल में स्थानीय उत्पादों के स्टॉल, क्लाइम्बिंग कार्यशालाएं, पर्यावरण संरक्षण पर चर्चा, पर्वतारोहण से जुड़ी फिल्मों का प्रदर्शन और सांस्कृतिक कार्यक्रम भी शामिल हैं। आयोजकों के अनुसार इस महोत्सव का उद्देश्य किन्नौर की प्राकृतिक सुंदरता और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने के साथ स्थानीय समुदाय के लिए विकास के नए अवसर पैदा करना है। साथ ही जिम्मेदार पर्यटन के माध्यम से हिमालयी पर्यावरण और वन्यजीवों के संरक्षण का संदेश भी दिया जा रहा है।

किन्नौर जिले के रकछम में रॉक क्लाइबिंग करते प्रतिभागी। स्रोत : क्लब

किन्नौर जिले के रकछम में रॉक क्लाइबिंग करते प्रतिभागी। स्रोत : क्लब

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