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पंचायत मोटिवेटरों के लिए बनाएं स्थायी नीति
Updated Wed, 14 Mar 2018 09:22 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
रामपुर बुशहर।
हिमाचल प्रदेश में मध्य हिमालय जलागम विकास परियोजना से निष्कासित की गई अनुप्रेषितों (मोटिवेटर) ने प्रदेश सरकार से उन्हें फिर नई परियोजना में लगाने और उनके लिए स्थायी नीति बनाने की मांग की है। इसी मांग को लेकर बीते दिनों रामपुर खंड की मोटिवेटरों ने मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर और वन मंत्री गोविंद ठाकुर से मुलाकात की।
मोटिवेटर संघ रामपुर की प्रधान रीमा देवी और सचिव नीमी देवी ने सरकार और वन मंत्री को ज्ञापन सौंपा। कहा कि जलागम विकास मंडल रामपुर में पांच विकास खंडों के तहत रामपुर, आनी, कुमारसैन, चिड़गांव और रोहड़ू की 72 पंचायतों में ये मोटिवेटर बीते 11 वर्षों से सेवाएं दे रही थीं। परियोजना के निर्देशानुसार हर पंचायतों में परियोजना की ओर से वर्ष 2006 से वर्ष 2017 तक एक-एक अनुप्रेषितों की नियुक्ति की गई थी। ये मोटिवेटर परियोजना क्रियान्वयन के समय ग्राम पंचायतों में किए गए विकास कार्यों जैसे आजीविकावर्धन गतिविधि के तहत समान रुचि समूह गठित करने, संस्थागत सुदृढ़ीकरण गतिविधियों के तहत पैदल रास्ते, पैदल पुलिया निर्माण, सिंचाई कूहल निर्माण, जल संग्रहण टैंक आदि विकास कार्यों के लिए उपभोक्ता समूह बनाने और पंचायत में हो रहे विकास कार्यों की त्रैमासिक प्रगति विवरण संबंधित इकाई को देने में विगत वर्षों में पूरी तरह से सहयोग किया है। आज ये मोटिवेटर परियोजना में संगठन बनाने और पंचायत से संबंधित हर गतिविधि को करने में सक्षम है। अक्तूबर 2016 में सभी मोटिवेटरों को मुख्य परियोजना निदेशक की ओर से सेवाओं को जारी रखने को केडब्ल्यूएफ परियोजना के लिए सहमति और असहमति पत्र की स्वीकृति मांगी गई थी। 31 मार्च 2017 को परियोजना का कार्यकाल समाप्त होने के बाद अब इन मोटिवेटरों को परियोजना और पंचायतों की ओर से निष्कासन पत्र दे दिया गया है। ऐसे में इन मोटिवेटरों के समक्ष आर्थिक संकट पैदा हो गया है। इन मोटिवेटरों ने प्रदेश सरकार और वन मंत्री से मांग की है कि पंचायतों में कार्यरत सभी मोटिवेटरों को वन विभाग के अधीन लाकर उनके लिए स्थायी नीति बनाई जाए, ताकि उनको इस आधुनिक दौर में आर्थिक संकट से न गुजरना पड़े। वन मंत्री गोविंद ठाकुर ने मोटिवेटरों को आश्वासन दिया है कि उन्हें वन विभाग के तहत समायोजित किया जाएगा। इस दौरान मीरा देवी, प्रभा देवी, नीतू कुमारी, काकी, बसंती सहित अन्य मोटिवेटर मौजूद रही।
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रामपुर बुशहर।
हिमाचल प्रदेश में मध्य हिमालय जलागम विकास परियोजना से निष्कासित की गई अनुप्रेषितों (मोटिवेटर) ने प्रदेश सरकार से उन्हें फिर नई परियोजना में लगाने और उनके लिए स्थायी नीति बनाने की मांग की है। इसी मांग को लेकर बीते दिनों रामपुर खंड की मोटिवेटरों ने मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर और वन मंत्री गोविंद ठाकुर से मुलाकात की।
मोटिवेटर संघ रामपुर की प्रधान रीमा देवी और सचिव नीमी देवी ने सरकार और वन मंत्री को ज्ञापन सौंपा। कहा कि जलागम विकास मंडल रामपुर में पांच विकास खंडों के तहत रामपुर, आनी, कुमारसैन, चिड़गांव और रोहड़ू की 72 पंचायतों में ये मोटिवेटर बीते 11 वर्षों से सेवाएं दे रही थीं। परियोजना के निर्देशानुसार हर पंचायतों में परियोजना की ओर से वर्ष 2006 से वर्ष 2017 तक एक-एक अनुप्रेषितों की नियुक्ति की गई थी। ये मोटिवेटर परियोजना क्रियान्वयन के समय ग्राम पंचायतों में किए गए विकास कार्यों जैसे आजीविकावर्धन गतिविधि के तहत समान रुचि समूह गठित करने, संस्थागत सुदृढ़ीकरण गतिविधियों के तहत पैदल रास्ते, पैदल पुलिया निर्माण, सिंचाई कूहल निर्माण, जल संग्रहण टैंक आदि विकास कार्यों के लिए उपभोक्ता समूह बनाने और पंचायत में हो रहे विकास कार्यों की त्रैमासिक प्रगति विवरण संबंधित इकाई को देने में विगत वर्षों में पूरी तरह से सहयोग किया है। आज ये मोटिवेटर परियोजना में संगठन बनाने और पंचायत से संबंधित हर गतिविधि को करने में सक्षम है। अक्तूबर 2016 में सभी मोटिवेटरों को मुख्य परियोजना निदेशक की ओर से सेवाओं को जारी रखने को केडब्ल्यूएफ परियोजना के लिए सहमति और असहमति पत्र की स्वीकृति मांगी गई थी। 31 मार्च 2017 को परियोजना का कार्यकाल समाप्त होने के बाद अब इन मोटिवेटरों को परियोजना और पंचायतों की ओर से निष्कासन पत्र दे दिया गया है। ऐसे में इन मोटिवेटरों के समक्ष आर्थिक संकट पैदा हो गया है। इन मोटिवेटरों ने प्रदेश सरकार और वन मंत्री से मांग की है कि पंचायतों में कार्यरत सभी मोटिवेटरों को वन विभाग के अधीन लाकर उनके लिए स्थायी नीति बनाई जाए, ताकि उनको इस आधुनिक दौर में आर्थिक संकट से न गुजरना पड़े। वन मंत्री गोविंद ठाकुर ने मोटिवेटरों को आश्वासन दिया है कि उन्हें वन विभाग के तहत समायोजित किया जाएगा। इस दौरान मीरा देवी, प्रभा देवी, नीतू कुमारी, काकी, बसंती सहित अन्य मोटिवेटर मौजूद रही।
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