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रांगरंग वैली में खुन्नू लोसर पर्व शुरू
Updated Sat, 08 Dec 2018 09:55 PM IST
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हांगरंग वैली में खुन्नू लोसर पर्व का धूमधाम से आगाज
तीन दिन तक वैली में चलता है नए साल मनाने का दौर
अमर उजाला ब्यूरो
रिकांगपिओ (किन्नौर)। किन्नौर जिले की हांगरंग वैली में शनिवार को खुन्नू लोसर पर्व का विधिवत आगाज किया गया। यह लोसर पर्व भगवान बुद्ध के अनुयायियों की ओर से नए साल के शुरू होने के उपलक्ष्य में मनाया जाता है।
खुन्नू लोसर पर्व हांगरंग वैली के गांव सुमरा, शलखर, नाको, चांगो, लियो, हांगो, चुलिंग, पूह, नमज्ञा, टाशीगंग में तीन दिन तक नए साल के आगमन के तौर पर बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। पहली रात को हांगरंग वैली के लोग इसे थाप कहते हैं। सारा दिन घर और आंगन को साफसुथरा कर सजा दिया जाता है। घर के चारों तरफ लंबे-लंबे कपड़ों में मंत्रों की ओर से गठित दारछोद भी लगाया जाता है। पहली रात्रि को पकवान बनाकर अपने घर पर छोसतेन में दीप जलाकर पाठ-पूजा करते हैं। यंगकर गांव के बुटिक मालिंग के अनुसार पहले तो आटे का दीया बनाया जाता था, मगर अब आधुनिकता के दौर में आकर बाजार से मिट्टी के दिए खरीदकर ही जलाए जाते हैं। घर के सभी कमरों में दिए जलाए जाते हैं।
पर्व के दूसरे दिन सुबह उठते ही मुंह मीठा किया जाता है। रसगुल्ले और मीठे दूध का सेवन सबसे शुभ माना जाता है। इसके बाद बुजुर्ग और बच्चे सजधज कर एक दूसरे रिश्तेदारों के घर जाकर नए साल की शुभकामनाएं और बधाई देने के साथ-साथ हाथों में फूल मालाएं लेकर एक-दूसरे को पहनाते हैं। पुरूष, महिलाएं और बच्चे पारंपरिक वेश भूषा में सजधज कर छाक यानि मेले के स्थान पर एकत्रित होते हैं और यहां नाच गाने का खूब दौर चलता है। वहीं छोटे बच्चे सबके घर जाकर सतू मांगते हैं और इसे बेचकर शाम को इस राशि से दावत करते हैं। अविवाहित लड़के-लड़कियां ढोल-नगाड़ों के साथ नाचते गाते सबके घर द्वार पर जाते हैं और इन लोगों का हर्ष से सत्कार किया जाता है। पर्व के आखिर में सारे ग्रामीण ठोआंग पर जाकर खाना पीना और नाच गाना करते हैं। तीन दिन तक नए साल का आगमन खुन्नू लोसर से सारे गांव का माहौल खुशी से झूम उठता है।
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तीन दिन तक वैली में चलता है नए साल मनाने का दौर
अमर उजाला ब्यूरो
रिकांगपिओ (किन्नौर)। किन्नौर जिले की हांगरंग वैली में शनिवार को खुन्नू लोसर पर्व का विधिवत आगाज किया गया। यह लोसर पर्व भगवान बुद्ध के अनुयायियों की ओर से नए साल के शुरू होने के उपलक्ष्य में मनाया जाता है।
खुन्नू लोसर पर्व हांगरंग वैली के गांव सुमरा, शलखर, नाको, चांगो, लियो, हांगो, चुलिंग, पूह, नमज्ञा, टाशीगंग में तीन दिन तक नए साल के आगमन के तौर पर बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। पहली रात को हांगरंग वैली के लोग इसे थाप कहते हैं। सारा दिन घर और आंगन को साफसुथरा कर सजा दिया जाता है। घर के चारों तरफ लंबे-लंबे कपड़ों में मंत्रों की ओर से गठित दारछोद भी लगाया जाता है। पहली रात्रि को पकवान बनाकर अपने घर पर छोसतेन में दीप जलाकर पाठ-पूजा करते हैं। यंगकर गांव के बुटिक मालिंग के अनुसार पहले तो आटे का दीया बनाया जाता था, मगर अब आधुनिकता के दौर में आकर बाजार से मिट्टी के दिए खरीदकर ही जलाए जाते हैं। घर के सभी कमरों में दिए जलाए जाते हैं।
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पर्व के दूसरे दिन सुबह उठते ही मुंह मीठा किया जाता है। रसगुल्ले और मीठे दूध का सेवन सबसे शुभ माना जाता है। इसके बाद बुजुर्ग और बच्चे सजधज कर एक दूसरे रिश्तेदारों के घर जाकर नए साल की शुभकामनाएं और बधाई देने के साथ-साथ हाथों में फूल मालाएं लेकर एक-दूसरे को पहनाते हैं। पुरूष, महिलाएं और बच्चे पारंपरिक वेश भूषा में सजधज कर छाक यानि मेले के स्थान पर एकत्रित होते हैं और यहां नाच गाने का खूब दौर चलता है। वहीं छोटे बच्चे सबके घर जाकर सतू मांगते हैं और इसे बेचकर शाम को इस राशि से दावत करते हैं। अविवाहित लड़के-लड़कियां ढोल-नगाड़ों के साथ नाचते गाते सबके घर द्वार पर जाते हैं और इन लोगों का हर्ष से सत्कार किया जाता है। पर्व के आखिर में सारे ग्रामीण ठोआंग पर जाकर खाना पीना और नाच गाना करते हैं। तीन दिन तक नए साल का आगमन खुन्नू लोसर से सारे गांव का माहौल खुशी से झूम उठता है।
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