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मैलन में देव नृत्य ने मोहा मन
Updated Sun, 19 Nov 2017 07:21 PM IST
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नृत्य
- फोटो : अमर उजाला
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कुमारसैन (रामपुर बुशहर)। कोटगढ़ क्षेत्र के मैलन में प्राचीन बूढ़ी दिवाली मेला धूमधाम से मनाया गया। कोटगढ़ क्षेत्र के आराध्य देवता चतुर्मुख के मंदिर में शनिवार सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ रही। सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालुओं ने देवता चतुर्मुख से आशीर्वाद लिया।
ढोल-नगाड़े की थाप और नरसिंगे की धुन के साथ देवता चतुर्मुख की पालकी को मेला मैदान लाया गया। यहां पर देव नृत्य हुआ, जिसने सभी का मन मोह लिया। यह मेला देवता चतुर्मुख का प्रमुख मेला है। यह पर्व तीन वर्षों के बाद मनाया जाता है। दीवाली मेला में सैकड़ों की संख्या में लोग मौजूद रहे। बूढ़ी दिवाली के उपलक्ष्य पर बांड रस्साकशी का आयोजन किया गया। स्थानीय लोग एक रस्सा बनाकर खूब खेले। यह रस्सा आज भी देवताओं और दानवों में हुए समुद्र मंथन का प्रतीक है। यहां की इस संस्कृति को लोग आज भी संजोए हुए हैं। इसके चलते सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन भी हुआ। इसमें डिंपल ठाकुर ने एक से बढ़कर एक पहाड़ी गीतों से मनोरंजन किया। कमेटी के सदस्य शेर सिंह ठाकुर ने बताया कि तीन वर्ष के बाद यह आयोजन होता है। इसमें कोटगढ़ क्षेत्र के सैकड़ों लोग हिस्सा लेते हैं।
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ढोल-नगाड़े की थाप और नरसिंगे की धुन के साथ देवता चतुर्मुख की पालकी को मेला मैदान लाया गया। यहां पर देव नृत्य हुआ, जिसने सभी का मन मोह लिया। यह मेला देवता चतुर्मुख का प्रमुख मेला है। यह पर्व तीन वर्षों के बाद मनाया जाता है। दीवाली मेला में सैकड़ों की संख्या में लोग मौजूद रहे। बूढ़ी दिवाली के उपलक्ष्य पर बांड रस्साकशी का आयोजन किया गया। स्थानीय लोग एक रस्सा बनाकर खूब खेले। यह रस्सा आज भी देवताओं और दानवों में हुए समुद्र मंथन का प्रतीक है। यहां की इस संस्कृति को लोग आज भी संजोए हुए हैं। इसके चलते सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन भी हुआ। इसमें डिंपल ठाकुर ने एक से बढ़कर एक पहाड़ी गीतों से मनोरंजन किया। कमेटी के सदस्य शेर सिंह ठाकुर ने बताया कि तीन वर्ष के बाद यह आयोजन होता है। इसमें कोटगढ़ क्षेत्र के सैकड़ों लोग हिस्सा लेते हैं।
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