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रामपुर के पशु औषधालयों में दवाओं का टोटा, पशुपालक परेशान
Updated Sat, 15 Sep 2018 09:48 PM IST
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पशु औषधालयों में तीन महीने
से नहीं पहुंची दवाइयों की खेप
बाजार से मंहगे दामों पर दवा खरीद रहे हैं पशुपालक
उपमंडल की 80 फीसदी आबादी पशुपालन पर निर्भर
अमर उजाला ब्यूरो
डंसा (रामपुर बुशहर)। रामपुर उपमंडल के तहत आने वाली चार वेटरनरी संस्थानों और छह पशु औषद्यालयों में दवाओं का स्टॉक न के बराबर है। ऐसे में तीन माह से दवाओं की खेप नहीं पहुंचने के कारण पशुपालकों को बाजार से मंहगे दामों पर दवाएं खरीदनी पड़ रही हैं।
रामपुर उपमंडल के ग्रामीण क्षेत्रों के 80 फीसदी लोगों की आर्थिकी पशुपालन पर निर्भर है। प्रदेश सरकार पशुधन को बढ़ावा देने के बड़े-बड़े दावे भी कर रही है, वहीं बीते तीन माह से उपमंडल की चार वेटरनरी और छह औषधालयों में दवाओं का स्टॉक ही नहीं आया है। ऐसे में पशुओं के बीमार होने पर पशु पालकों को मजबूरन बाजार से मंहगे दामों पर पशुओं की दवाएं खरीदनी पड़ रही हैं।
पशुपालक कमल चाई, गोविंद कायथ, विजय कुमार, सुनील, जगत सिंह, लायक राम, भोवन लाल, घनश्याम, गोवर्द्धन दास, दौलत राम और सोहन लाल सहित अन्य ग्रामीणों के अनुसार पशु औषधालयों में बीते तीन माह से पशुओं की दवाइयां नहीं मिल पा रही। पशुओं को गंभीर बीमारी के उपचार और टीकाकरण की व्यवस्था पूरी तरह से ठप पड़ी है। उन्होंने प्रदेश सरकार और पशु पालन विभाग से समय रहते औषधालयों में दवाओं की आपूर्ति देने की मांग की है। उन्होंने चेताया कि यदि जल्द समस्या का समाधान नहीं होता है तो वे विभाग के कार्यालय का घेराव करेंगे।
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वेटरनरी पॉलीक्लिनिक के प्रभारी डॉ. सुनील ने कहा कि तीन माह से पशु औषधालयों में दवाओं की खेप नहीं पहुंची है। उच्च अधिकारियों को समय-समय पर इसके बारे में सूचित किया जा रहा है। खेप पहुंचते ही पशु औषधालयों में दवाएं मुहैया करवाई जाएंगी।
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से नहीं पहुंची दवाइयों की खेप
बाजार से मंहगे दामों पर दवा खरीद रहे हैं पशुपालक
उपमंडल की 80 फीसदी आबादी पशुपालन पर निर्भर
अमर उजाला ब्यूरो
डंसा (रामपुर बुशहर)। रामपुर उपमंडल के तहत आने वाली चार वेटरनरी संस्थानों और छह पशु औषद्यालयों में दवाओं का स्टॉक न के बराबर है। ऐसे में तीन माह से दवाओं की खेप नहीं पहुंचने के कारण पशुपालकों को बाजार से मंहगे दामों पर दवाएं खरीदनी पड़ रही हैं।
रामपुर उपमंडल के ग्रामीण क्षेत्रों के 80 फीसदी लोगों की आर्थिकी पशुपालन पर निर्भर है। प्रदेश सरकार पशुधन को बढ़ावा देने के बड़े-बड़े दावे भी कर रही है, वहीं बीते तीन माह से उपमंडल की चार वेटरनरी और छह औषधालयों में दवाओं का स्टॉक ही नहीं आया है। ऐसे में पशुओं के बीमार होने पर पशु पालकों को मजबूरन बाजार से मंहगे दामों पर पशुओं की दवाएं खरीदनी पड़ रही हैं।
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पशुपालक कमल चाई, गोविंद कायथ, विजय कुमार, सुनील, जगत सिंह, लायक राम, भोवन लाल, घनश्याम, गोवर्द्धन दास, दौलत राम और सोहन लाल सहित अन्य ग्रामीणों के अनुसार पशु औषधालयों में बीते तीन माह से पशुओं की दवाइयां नहीं मिल पा रही। पशुओं को गंभीर बीमारी के उपचार और टीकाकरण की व्यवस्था पूरी तरह से ठप पड़ी है। उन्होंने प्रदेश सरकार और पशु पालन विभाग से समय रहते औषधालयों में दवाओं की आपूर्ति देने की मांग की है। उन्होंने चेताया कि यदि जल्द समस्या का समाधान नहीं होता है तो वे विभाग के कार्यालय का घेराव करेंगे।
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वेटरनरी पॉलीक्लिनिक के प्रभारी डॉ. सुनील ने कहा कि तीन माह से पशु औषधालयों में दवाओं की खेप नहीं पहुंची है। उच्च अधिकारियों को समय-समय पर इसके बारे में सूचित किया जा रहा है। खेप पहुंचते ही पशु औषधालयों में दवाएं मुहैया करवाई जाएंगी।