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क्षेत्र में शुरू हुआ पारंपरिक जागरा महोत्सव का दौर
Updated Tue, 11 Sep 2018 09:52 PM IST
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सुख-समृद्धि के लिए मशालें लेकर रात भर नृत्य करेंगे लोग
रोहड़ू के कई गांवों में पारंपरिक जागरा महोत्सव का आगाज
कुल देवता के आशीर्वाद के लिए भी की जाएगी पूजा-अर्चना
अमर उजाला ब्यूरो
रोहडू। क्षेत्र में पारंपरिक जागरा महोत्सव का दौर शुरू हो गया है। महोत्सव के आरंभ होते ही कई गांवों में देवताओं की विशेष पूजा अर्चना का दौर आरंभ हो गया है। ग्रामीण मशाल लिए देवता के अभिनंदन में पारंपरिक वाद्य यंत्रों की थाप पर नृत्य करेंगे। 11 सितंबर से 14 सितंबर तक जागरा उत्सव मनाया जाएगा।
जागरा महोत्सव हर वर्ष भाद्र महीने में मनाया जाता है। रोहडू, चिड़गांव, नावर, जुब्बल क्षेत्र के अधिकांश गांव में जागरा महोत्सव मनाया जाता है। हर गांव में कुल देवता की ग्रामीण विशेष रूप से पूजा-अर्चना करते हैं। जागरा महोत्सव विशेष रूप से रात को होता है। क्षेत्र के कुछ गांव में मंगलवार रात जागरा मनाया गया। अधिकांश गांव में बुधवार की रात को जागरा महोत्सव होगा। जबकि जुब्बल के रोहटान गांव में 14 सितंबर को जागरा महोत्सव होगा।
ग्रामीण इस दौरान कुल देवता का आशीर्वाद प्राप्त करने और सुख समृद्धि के लिए पारंपरिक वाद्य यंत्रों के साथ मशाल लेकर नृत्य करते हैं। देवताओं के गुरों का नृत्य महोत्सव का मुख्य आकर्षण रहता है। महासु देवता के कारदार ज्ञान सिंह ने बताया कि जागरा उत्सव सदियों से मनाया जा रहा है। यह परंपरा आज भी बरकरार है। हर गांव में लोग अपने कुल देवता के अभिनंदन में जागरा महोत्सव मनाते हैं। उन्होंने बताया कि बुधवार रात को कई गांवों में महोत्सव मनाया जाएगा।
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रोहड़ू के कई गांवों में पारंपरिक जागरा महोत्सव का आगाज
कुल देवता के आशीर्वाद के लिए भी की जाएगी पूजा-अर्चना
अमर उजाला ब्यूरो
रोहडू। क्षेत्र में पारंपरिक जागरा महोत्सव का दौर शुरू हो गया है। महोत्सव के आरंभ होते ही कई गांवों में देवताओं की विशेष पूजा अर्चना का दौर आरंभ हो गया है। ग्रामीण मशाल लिए देवता के अभिनंदन में पारंपरिक वाद्य यंत्रों की थाप पर नृत्य करेंगे। 11 सितंबर से 14 सितंबर तक जागरा उत्सव मनाया जाएगा।
जागरा महोत्सव हर वर्ष भाद्र महीने में मनाया जाता है। रोहडू, चिड़गांव, नावर, जुब्बल क्षेत्र के अधिकांश गांव में जागरा महोत्सव मनाया जाता है। हर गांव में कुल देवता की ग्रामीण विशेष रूप से पूजा-अर्चना करते हैं। जागरा महोत्सव विशेष रूप से रात को होता है। क्षेत्र के कुछ गांव में मंगलवार रात जागरा मनाया गया। अधिकांश गांव में बुधवार की रात को जागरा महोत्सव होगा। जबकि जुब्बल के रोहटान गांव में 14 सितंबर को जागरा महोत्सव होगा।
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ग्रामीण इस दौरान कुल देवता का आशीर्वाद प्राप्त करने और सुख समृद्धि के लिए पारंपरिक वाद्य यंत्रों के साथ मशाल लेकर नृत्य करते हैं। देवताओं के गुरों का नृत्य महोत्सव का मुख्य आकर्षण रहता है। महासु देवता के कारदार ज्ञान सिंह ने बताया कि जागरा उत्सव सदियों से मनाया जा रहा है। यह परंपरा आज भी बरकरार है। हर गांव में लोग अपने कुल देवता के अभिनंदन में जागरा महोत्सव मनाते हैं। उन्होंने बताया कि बुधवार रात को कई गांवों में महोत्सव मनाया जाएगा।
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