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डिजिटल इंडिया के युग में विधवा प्रभा के घर बिजली न शौचालय
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अमर उजाला ब्यूरो
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रोहड़ू। चौपाल की बोहर पंचायत की दलित बस्ती में रहने वाली प्रभा देवी डिजिटल इंडिया के दौर में नारकीय जीवन जीने को मजबूर है। घर में न शौचालय है और न ही बिजली- पानी का कनेक्शन। पति की चार साल पहले मौत हो गई है। परिवार में तीन बेटियां हैं। इनके पालन पोषण का जिम्मा प्रभा पर है।
गांव में दिहाड़ी मजदूरी लगाकर हर रोज 50 रुपये कमाकर बेटियों को पढ़ाने के अलावा इनका भरण पोषण भी कर रही है। हैरानी इस बात की है कि प्रभा का चयन बीपीएल परिवारों की सूची में भी नहीं है। विधवा पेंशन को दूर की बात है। पंचायत की ओर से भी महिला के लिए कुछ नहीं किया जा रहा है। हर रोज परिवार की रात अंधेरे में गुजरती है। पानी भी दूर से ढोकर लाना पड़ता है। शौचालय तक घर में नहीं है।
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बड़ी बेटी दसवीं, दूसरी बेटी पांचवीं और सबसे छोटी बेटी आंगनबाड़ी जाती है। इनकी पढ़ाई के साथ-साथ पेट भरने की जिम्मेवारी विधवा प्रभा पर है। हालांकि, सरकार गरीबों के उत्थान के लिए बड़े दावे करती है लेकिन प्रभा सरकार की सुविधाओं से अब तक वंचित है। इतना सब होने के बाद भी प्रभा ने हिम्मत नहीं हारी है और परिवार को पाल रही है।
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ग्राम पंचायत बोहर की प्रधान सरला जोशी ने माना है कि उनकी पंचायत में कुछ प्रभावशाली और साधन संपन्न लोग बीपीएल में शामिल हैं। वे इन सुविधाओं को छोड़ने को तैयार नहीं हैं। उन्होंने कहा कि 2012 के बाद पंचायत में बीपीएल का चयन नहीं हो पाया है। इस वजह से प्रभा का चयन भी बीपीएल में नहीं हो पाया है। इस संबंध में पंचायत की ओर से कार्रवाई की जाएगी।