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वर्किंग डे पर कार्यक्रम करवाकर कॉलेज प्रशासन सवालों के घेरे में
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सुभाष सेन
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रामपुर बुशहर। रामपुर पीजी कॉलेज सभागार को लेकर एक बार फिर से विवाद शुरू हो गया है। एक समय में इस सभागार में छात्र संगठनों और गैर शैक्षणिक कार्यक्रमों के आयोजन को लेकर पाबंदी, वहीं अब सभागार में कार्यक्रमों की बहाली होने के बाद एक बार फिर कॉलेज सभागार सुर्खियों में आ गया है।
मंगलवार को सभागार में हुए कार्यक्रम ने कॉलेज प्रशासन की मुश्किलें बढ़ा दीं हैं। एनएसयूआई और एसएफआई छात्र संगठनों ने प्रधानाचार्य कार्यालय का घेराव कर कॉलेज प्रशासन के खिलाफ जमकर हल्ला बोला। ऐसे में जिन छात्रों के प्रेक्टिकल चल रहे थे, उन्हें भी काफी दिक्कतें झेलनी पड़ीं।
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तीन वर्ष पूर्व हुए विवाद के कारण कॉलेज सभागार में वार्षिक समारोह, छात्र संगठनों और शैक्षणिक कार्यक्रमों को ही करवाने के आदेश कोर्ट द्वारा दिए गए थे। इसके बाद कॉलेज प्रशासन और छात्र संगठनों की संयुक्त बैठक में गैर शैक्षणिक, पंजीकरण प्राप्त एसोसिएशन और संस्थाओं के कार्यक्रम के आयोजन पर सहमति बनी थी। वहीं निजी स्कूलों और संस्थाओं के कार्यक्रमों के लिए नॉन वर्किंग डे पर कार्यक्रम करवाने की अनुमति देने पर सहमति बनी।
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छात्र संगठनों के लिए सभागार में कार्यक्रम करवाने की निशुल्क व्यवस्था थी, जबकि उन्हें पांच हजार रुपये सिक्योरिटी देनी पड़ती थी। वहीं छात्र एसोसिएशन के लिए 15 हजार रुपये शुल्क और पांच हजार रुपये सिक्योरिटी और निजी स्कूलों सहित अन्य संस्थाओं के लिए 25 हजार शुल्क और पांच हजार सिक्योरिटी जमा करवाने पर कॉलेज प्रशासन और छात्र संगठनों ने निर्णय लिया था।
मंगलवार को वर्किंग डे होने के बावजूद भी सभागार में निजी संस्था कार्यक्रम चल रहा था। कार्यक्रम करवाने वाली संस्था पंजीकृत है या नहीं और सभागार शुल्क न लेने को लेकर छात्र संगठनों ने कॉलेज प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। कार्यक्रम के आयोजन को लेकर कॉलेज प्रशासन की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में है। अब ऐसे में क्यास लगाए जा रहे हैं कि कॉलेज सभागार में कार्यक्रम करवाने की अनुमति देने का मामला कहीं डीसी शिमला के अधीन न हो।