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बर्फ के गोले मारकर करेंगे देवता का अभिनंदन
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अमर उजाला ब्यूरो
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रोहडू। छौहारा विकास खंड के सबसे दुर्गम गांव जांगलिख में अनूठा फाग मेला मनाया जाता है। बसंत ऋतु के आगमन पर मनाया जाने वाला मेला 16 फरवरी से शुरू हो रहा है। मेले में बर्फ के गोले मारकर देवता का अभिनंदन करने की अनोखी परंपरा है। हर साल इसी परंपरा को देखने के लिए दूर-दूर से लोग जांगलिख गांव पहुंचते हैं।
देवता साहिब जाख के आह्वान पर आयोजित होने वाला फाग मेला तीन दिन तक चलता है। मेले में मेहमानों की खातिरदारी पारंपरिक एवं अनूठे व्यंजनों से की जाती है। ओगल के आटे से बने सिड्डू, शहद तथा अखरोट के तेल से तली रोटियां मेहमानों को मुख्य रुप से परोसी जाती है। मेले में रात भर खान-पान का दौर चलता रहता है। तीन दिनों तक चलने वाले इस मेले में मुख्य आकर्षण का केंद्र देवता साहिब जाख के मंदिर पर बर्फ के गोले दागने का रहता है। विशेष रुप से बैतियानी गांव के लोग पारंपरिक वेशभूषा में मंदिर पर बर्फ के गोले मारकर उनका अभिनंदन करते हैं। देवता जाख जांगलिख के ही आवाहन पर क्षेत्र के गांव गोक्सवाड़ी, तांगणू, पेखा और दिऊदी में भी फाग मेला उसी दिन आयोजित किया जाता है।
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देवता साहिब जाख जागंलखि के पुजारी विशंभर सिंह ने बताया कि फाग मेला कई सदियों से उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। देवता जाख स्वर्ग प्रवास से लौटने के बाद स्वयं मेले का दिन निर्धारित करते हैं। देवता साहिब जाख जांगलिख के मोतमीन रोशन लाल ने बताया कि फाग मेला सदियों से उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। मेले का आयोजन तीन दिन तक किया जाएगा। मेले की सारी रस्में बाकी अनुष्ठानों से अलग हैं। इसे देखने के लिए दूर-दूर से लोग पहुंचते हैं। मेले की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।
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