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मुंह में बामड़ डालकर गुर ने अच्छी फसल होने का सुनाया फलादेश
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मुंह में बामड़ डालकर गूर ने अच्छी
फसल होने का सुनाया फलादेश
एक महीने बाद के स्वर्ग प्रवास से वापस देवालय लौटे देवी-देवता
वापस लौटने पर देवी-देवताओं का ढोल-नगाड़ों से जोरदार स्वागत
मंदिरों के कपाट खुलने से धार्मिक अनुष्ठानों पर लगी पाबंदी हटी
अमर उजाला ब्यूरो
रामपुर बुशहर/डंसा। फाल्गुन संक्रांति के पर्व पर रामपुर उपमंडल के विभिन्न देवी-देवता एक माह के स्वर्ग प्रवास के उपरांत बुधवार को अपने देवालय लौट आए हैं। मंदिरों में हजारों की तादाद में श्रद्धालुओं ने अपने ईष्ट का स्वागत किया। बुधवार को विभिन्न मंदिरों में देवी-देवताओं के स्वर्ग प्रवास से वापस लौटने पर ढोल-नगाड़ों के साथ जोरदार स्वागत किया गया। कार्यक्रम के दौरान देवता के गूर ने मुंह में आर-पार बामड़ डालकर इस वर्ष अच्छी फसल होने के संकेत दिए हैं। वहीं अब मंदिरों के कपाट खुल जाने से धार्मिक अनुष्ठानों में लगी पाबंदी पूरी तरह से हटा दी गई है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार नोगवैली स्थित परशुराम मंदिर परिसर में देवता साहिब दमुख के स्वर्ग से वापस लौटने पर क्षेत्र के लोगों ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। देवता के गूर कमल राज ने पीतल की छड़ मुंह में आर-पार डालकर देव परंपरा का निर्वहन किया और मंदिर के चारों ओर वाद्य यंत्रों की धुनों पर परिक्रमा की। उन्होंने मंदिर परिसर में मौजूद सैकड़ों लोगों के समक्ष इस वर्ष अच्छे-बुरे फलादेशों की व्याख्या की। देवता साहिब ने गूर के माध्यम से मध्यम और ऊंचाई वाले इलाकों में सालभर के लिए अच्छी फसल होने के संकेत दिए हैं। वहीं प्राकृतिक आपदा जैसी किसी भी घटना के होने से मना किया। इसके अलावा भड़ावली पंचायत के लक्ष्मी नारायण मंदिर कुमसू, रचोली पंचायत के देव जाख देवता और गसो देवता सहित कई अन्य देवी-देवताओं के मंदिर परिसर में भी हजारों श्रद्धालु स्वर्ग प्रवास से लौटे देवता के दर्शन को एकत्रित हुए। श्रद्धालुओं ने मंदिर पहुंचने पर पारंपरिक वाद्य यंत्रों के साथ देवी-देवताओं को हर्षोल्लास के साथ स्वागत किया। बुधवार से क्षेत्र के मंदिरों में पूजा अर्चना का दौर भी शुरू हो गया है। एक माह के स्वर्ग प्रवास से लौटे देवताओं के गूरों ने मनगांवन के अवसर पर वर्ष भर का (वर्षोआ) फलादेश पेश किया।
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फसल होने का सुनाया फलादेश
एक महीने बाद के स्वर्ग प्रवास से वापस देवालय लौटे देवी-देवता
वापस लौटने पर देवी-देवताओं का ढोल-नगाड़ों से जोरदार स्वागत
मंदिरों के कपाट खुलने से धार्मिक अनुष्ठानों पर लगी पाबंदी हटी
अमर उजाला ब्यूरो
रामपुर बुशहर/डंसा। फाल्गुन संक्रांति के पर्व पर रामपुर उपमंडल के विभिन्न देवी-देवता एक माह के स्वर्ग प्रवास के उपरांत बुधवार को अपने देवालय लौट आए हैं। मंदिरों में हजारों की तादाद में श्रद्धालुओं ने अपने ईष्ट का स्वागत किया। बुधवार को विभिन्न मंदिरों में देवी-देवताओं के स्वर्ग प्रवास से वापस लौटने पर ढोल-नगाड़ों के साथ जोरदार स्वागत किया गया। कार्यक्रम के दौरान देवता के गूर ने मुंह में आर-पार बामड़ डालकर इस वर्ष अच्छी फसल होने के संकेत दिए हैं। वहीं अब मंदिरों के कपाट खुल जाने से धार्मिक अनुष्ठानों में लगी पाबंदी पूरी तरह से हटा दी गई है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार नोगवैली स्थित परशुराम मंदिर परिसर में देवता साहिब दमुख के स्वर्ग से वापस लौटने पर क्षेत्र के लोगों ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। देवता के गूर कमल राज ने पीतल की छड़ मुंह में आर-पार डालकर देव परंपरा का निर्वहन किया और मंदिर के चारों ओर वाद्य यंत्रों की धुनों पर परिक्रमा की। उन्होंने मंदिर परिसर में मौजूद सैकड़ों लोगों के समक्ष इस वर्ष अच्छे-बुरे फलादेशों की व्याख्या की। देवता साहिब ने गूर के माध्यम से मध्यम और ऊंचाई वाले इलाकों में सालभर के लिए अच्छी फसल होने के संकेत दिए हैं। वहीं प्राकृतिक आपदा जैसी किसी भी घटना के होने से मना किया। इसके अलावा भड़ावली पंचायत के लक्ष्मी नारायण मंदिर कुमसू, रचोली पंचायत के देव जाख देवता और गसो देवता सहित कई अन्य देवी-देवताओं के मंदिर परिसर में भी हजारों श्रद्धालु स्वर्ग प्रवास से लौटे देवता के दर्शन को एकत्रित हुए। श्रद्धालुओं ने मंदिर पहुंचने पर पारंपरिक वाद्य यंत्रों के साथ देवी-देवताओं को हर्षोल्लास के साथ स्वागत किया। बुधवार से क्षेत्र के मंदिरों में पूजा अर्चना का दौर भी शुरू हो गया है। एक माह के स्वर्ग प्रवास से लौटे देवताओं के गूरों ने मनगांवन के अवसर पर वर्ष भर का (वर्षोआ) फलादेश पेश किया।
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