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केंद्र के खिलाफ प्रदर्शन, नारेबाजी
Updated Mon, 02 Apr 2018 10:10 PM IST
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प्रदर्शन
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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अमर उजाला ब्यूरो
रामपुर बुशहर।
सुप्रीम कोर्ट के एससी एसटी एक्ट 1989 को कमजोर करने वाले फैसले के खिलाफ केंद्र सरकार की ओर से रिव्यू पिटीशन दायर न करने के विरोध में दलित शोषण मुक्ति सभा ने सोमवार को रामपुर में एसडीएम कार्यालय के बाहर दो घंटे प्रदर्शन किया। केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। इसके बाद दलित शोषण मुक्ति सभा ने तहसीलदार के माध्यम से केंद्र सरकार को ज्ञापन भेजा।
सभा ने केंद्र सरकार से मांग की है कि इस फैसले के खिलाफ रिव्यू पिटीशन दायर करे और एससी और एसटी एक्ट को सख्ती से लागू करे। दलितों को निजी क्षेत्रों में भी आरक्षण लागू करे, दलित छात्रों की छात्रवृत्ति तुरंत दी जाए। अगर ऐसा नहीं किया गया तो दलित शोषण मुक्ति सभा आंदोलन तेज करेगी। सभा के जिला शिमला के सचिव देवकी नंद और कुलदीप ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की ओर से जो फैसला दिया गया है, वो एससी और एसटी समुदाय का विरोधी है। उन्होंने आरोप लगाया है कि सुप्रीम कोर्ट में जब इस एक्ट पर सुनवाई हो रही थी तब बीजेपी की महाराष्ट्र सरकार भी केस की पार्टी थी और केंद्र की सरकार की तरफ से ऑडिटर जनरल को भी केस की पैरवी करने के लिए बुलाया गया था। इस दौरान इस केस की पैरवी न तो बीजेपी की महाराष्ट्र सरकार ने की और न ही केंद्र ने। एडिशन जनरल ने जानबूझकर ठीक ढंग से एससी और एसटी एक्ट की पैरवी नहीं की। कहा कि केंद्र सरकार के कार्यकाल में दलितों पर हमले हो रहे हैं। इस दौरान प्रेम, तुला राम, सुभाष, पूर्ण ठाकुर, रिंकू राम, बलविंद्र, सोनिया, प्रदीप, सुनील, वीनू, राजेंद, मोहिंद्र, ललिता, मंजू, सोनिया, अमित, भूप सिंह के अलावा के अन्य उपस्थित रहे।
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रामपुर बुशहर।
सुप्रीम कोर्ट के एससी एसटी एक्ट 1989 को कमजोर करने वाले फैसले के खिलाफ केंद्र सरकार की ओर से रिव्यू पिटीशन दायर न करने के विरोध में दलित शोषण मुक्ति सभा ने सोमवार को रामपुर में एसडीएम कार्यालय के बाहर दो घंटे प्रदर्शन किया। केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। इसके बाद दलित शोषण मुक्ति सभा ने तहसीलदार के माध्यम से केंद्र सरकार को ज्ञापन भेजा।
सभा ने केंद्र सरकार से मांग की है कि इस फैसले के खिलाफ रिव्यू पिटीशन दायर करे और एससी और एसटी एक्ट को सख्ती से लागू करे। दलितों को निजी क्षेत्रों में भी आरक्षण लागू करे, दलित छात्रों की छात्रवृत्ति तुरंत दी जाए। अगर ऐसा नहीं किया गया तो दलित शोषण मुक्ति सभा आंदोलन तेज करेगी। सभा के जिला शिमला के सचिव देवकी नंद और कुलदीप ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की ओर से जो फैसला दिया गया है, वो एससी और एसटी समुदाय का विरोधी है। उन्होंने आरोप लगाया है कि सुप्रीम कोर्ट में जब इस एक्ट पर सुनवाई हो रही थी तब बीजेपी की महाराष्ट्र सरकार भी केस की पार्टी थी और केंद्र की सरकार की तरफ से ऑडिटर जनरल को भी केस की पैरवी करने के लिए बुलाया गया था। इस दौरान इस केस की पैरवी न तो बीजेपी की महाराष्ट्र सरकार ने की और न ही केंद्र ने। एडिशन जनरल ने जानबूझकर ठीक ढंग से एससी और एसटी एक्ट की पैरवी नहीं की। कहा कि केंद्र सरकार के कार्यकाल में दलितों पर हमले हो रहे हैं। इस दौरान प्रेम, तुला राम, सुभाष, पूर्ण ठाकुर, रिंकू राम, बलविंद्र, सोनिया, प्रदीप, सुनील, वीनू, राजेंद, मोहिंद्र, ललिता, मंजू, सोनिया, अमित, भूप सिंह के अलावा के अन्य उपस्थित रहे।
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