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बटसेरी में रहेगी उतरेनी मेले की धूम
Updated Fri, 12 Jan 2018 09:13 PM IST
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सांगला (किन्नौर)। कल्पा खंड के तहत सांगला के बटसेरी गांव में उतरेनी मेला शुक्रवार मध्य रात्रि से शुरू हो जाएगा। यह मेला क्षेत्र में पांच दिन तक धूमधाम से मनाया जाएगा। मेले के शुभारंभ पर लोग नए साल का भी स्वागत करेेंगे। इस दौरान दो नाबालिग युवकों को ईष्ट देवता के रूप में नियुक्त किया गया।
हर वर्ष की तरह इस बार भी 12 जनवरी की मध्यरात्रि को ग्रामीण लोग अपने ईष्ट देव नारायण बद्री और नारायण विष्णु के देवालय में होंगे। दोनों देवताओं के स्वर्ग प्रवास से पूर्व ग्रामीण मंदिर में एक माह तक की सुख शांति को लेकर श्रद्धा अनुसार भेंट चढ़ा कर वाद्य यंत्रों की धुन के साथ पूजा अर्चना करते हैं। देवता दो नाबालिग युवकों को चुन कर मेले की पूरी जिम्मेदारी उन्हें सौंप कर एक माह के लिए स्वर्ग प्रवास पर चले जाते हैं। मान्यता यह है की क्षेत्र के सभी देवी, देवता मकर संक्रांति से एक रोज पूर्व स्वर्ग प्रवास को निकलते हैं। नारायण बद्री और नारायण विष्णु के स्वर्ग प्रवास के बाद ग्रामीण देवताओं की ओर से चुने गए दो बालकों को ईष्ट देवता स्वरूप मानते हैं। इस दौरान देव स्वरूपी नाबालिग युवकों की देखभाल के लिए एक महिला और पुरुष की नियुक्ति की जाती है। इस पर्व के दौरान उक्त बालकों को मात्र 2 से 3 घंटे सोने का अवसर मिलता है। नए साल की मंगल कामना करने के साथ-साथ सभी लोग पूरे पांच दिन एक साथ भोजन करते हैं। बद्री नारायण मंदिर कमेटी के मोतमीन संजीव नेगी, माथास गोवर्धन शानटेश्टो, कायथ राकेश लोक्टस, पुजारी रणजीत नेगी ने बताया कि पर्व को लेकर सभी तैयारियां पूरी की जा चुकी हैं। ग्रामीण लोग दस रोज पूर्व से ही तैयारियों में जुटे हुए हैं।
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हर वर्ष की तरह इस बार भी 12 जनवरी की मध्यरात्रि को ग्रामीण लोग अपने ईष्ट देव नारायण बद्री और नारायण विष्णु के देवालय में होंगे। दोनों देवताओं के स्वर्ग प्रवास से पूर्व ग्रामीण मंदिर में एक माह तक की सुख शांति को लेकर श्रद्धा अनुसार भेंट चढ़ा कर वाद्य यंत्रों की धुन के साथ पूजा अर्चना करते हैं। देवता दो नाबालिग युवकों को चुन कर मेले की पूरी जिम्मेदारी उन्हें सौंप कर एक माह के लिए स्वर्ग प्रवास पर चले जाते हैं। मान्यता यह है की क्षेत्र के सभी देवी, देवता मकर संक्रांति से एक रोज पूर्व स्वर्ग प्रवास को निकलते हैं। नारायण बद्री और नारायण विष्णु के स्वर्ग प्रवास के बाद ग्रामीण देवताओं की ओर से चुने गए दो बालकों को ईष्ट देवता स्वरूप मानते हैं। इस दौरान देव स्वरूपी नाबालिग युवकों की देखभाल के लिए एक महिला और पुरुष की नियुक्ति की जाती है। इस पर्व के दौरान उक्त बालकों को मात्र 2 से 3 घंटे सोने का अवसर मिलता है। नए साल की मंगल कामना करने के साथ-साथ सभी लोग पूरे पांच दिन एक साथ भोजन करते हैं। बद्री नारायण मंदिर कमेटी के मोतमीन संजीव नेगी, माथास गोवर्धन शानटेश्टो, कायथ राकेश लोक्टस, पुजारी रणजीत नेगी ने बताया कि पर्व को लेकर सभी तैयारियां पूरी की जा चुकी हैं। ग्रामीण लोग दस रोज पूर्व से ही तैयारियों में जुटे हुए हैं।
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