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सेब के बगीचों में चमगादड का हमला रातों रात खाली हो रहे सेब से लदे बगीचे
Updated Tue, 18 Sep 2018 09:12 PM IST
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सेब के बगीचों पर चमगादड़ों का हमला
रात को बर्बाद कर रहे फसल, बागवान परेशान
अमर उजाला ब्यूरो
रोहडू। सेब के बगीचों में चमगादड़ों के हमले ने बागवानों की नींद हराम कर दी है। फलों से लदे सेब के पौधे रातों रात खाली हो रहे हैं। बागवानों ने चमगादड़ों को मारने के लिए सरकार से पहल करने की मांग की है।
रोहडू, जुब्बल, टिक्कर सहित पूरे क्षेत्र के ऊंचाई वाले बगीचों में हजारों की संख्या में चमगादड़ पहुंच चुके हैं। क्षे़त्र के बाहर से माईग्रेट होकर पहुंचे चमगादड़ों ने रोहडू बाजार के साथ पब्बर नदी के तट पर स्थित पेडों में ठिकाना बनाया हुआ है। पेडों के बीच दिन के समय हजारों की संख्या में चमगादड़ लटके रहते हैं। शाम ढलने के बाद बगीचों की ओर उनकी गतिविधियां शुरू हो रही है। सात हजार फुट से ऊपर की उंचाई पर अब से तुड़ान का कार्य चल रहा है। सेब तुड़ान से पहले बगीचों में चमगादड़ों ने भारी नुकसान पंहुचाना शुरू कर दिया है।
बागवान सुरेंद्र चौहान, प्रदीप सिंह, महेंद्र राणा ने बताया कि रात करीब दस बजे के बाद सेब के पौधों में चमगादड़ पहुंच रहे हैं। हर रात में बगीचों में हजारों रुपये की फसल का नुकसान कर रहे है। बगीचों में लोग रात के लिए लाइटें लगा कर मजदूरों के साथ जाग कर चौकीदारी कर रहे हैं। लेकिन संख्या अधिक होने के कारण बागवान अपनी फसल को बचाने में सफल नहीं हो रहे है। उन्होंने सरकार से मांग की है कि फसल को बचाने के लिए योजना बनाई जाए। उन्होंने कहा दिन के समय एक ठिकाना एक स्थान होने के कारण कोई रसायन छिड़ककर इनको मारने की व्यवस्था की जाए। छौरान किसान संघ इकाई के अध्यक्ष बविंद्र सूर्याण ने कहा लोगों के बगीचे तबाह हो गए हैं, सरकार मामले को गंभीरता से ले।
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गौर हो कि इससे पहले वर्ष 2004 और 05 में चमगादडों से सेब सहित अन्य फलों को भारी नुकसान पहुंचाया था। उस समय मामला विधानसभा तक उठाया गया। सरकार ने वन विभाग को भी इस पर काम करने के निर्देश दिए थे। हालांकि बाद में सालों तक माइग्रेट होने वाले चमगादड़ों की संख्या में कमी रही। इस बार दोबारा बागवानों के लिए परेशानी खड़ी हो चुकी है।
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रात को बर्बाद कर रहे फसल, बागवान परेशान
अमर उजाला ब्यूरो
रोहडू। सेब के बगीचों में चमगादड़ों के हमले ने बागवानों की नींद हराम कर दी है। फलों से लदे सेब के पौधे रातों रात खाली हो रहे हैं। बागवानों ने चमगादड़ों को मारने के लिए सरकार से पहल करने की मांग की है।
रोहडू, जुब्बल, टिक्कर सहित पूरे क्षेत्र के ऊंचाई वाले बगीचों में हजारों की संख्या में चमगादड़ पहुंच चुके हैं। क्षे़त्र के बाहर से माईग्रेट होकर पहुंचे चमगादड़ों ने रोहडू बाजार के साथ पब्बर नदी के तट पर स्थित पेडों में ठिकाना बनाया हुआ है। पेडों के बीच दिन के समय हजारों की संख्या में चमगादड़ लटके रहते हैं। शाम ढलने के बाद बगीचों की ओर उनकी गतिविधियां शुरू हो रही है। सात हजार फुट से ऊपर की उंचाई पर अब से तुड़ान का कार्य चल रहा है। सेब तुड़ान से पहले बगीचों में चमगादड़ों ने भारी नुकसान पंहुचाना शुरू कर दिया है।
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बागवान सुरेंद्र चौहान, प्रदीप सिंह, महेंद्र राणा ने बताया कि रात करीब दस बजे के बाद सेब के पौधों में चमगादड़ पहुंच रहे हैं। हर रात में बगीचों में हजारों रुपये की फसल का नुकसान कर रहे है। बगीचों में लोग रात के लिए लाइटें लगा कर मजदूरों के साथ जाग कर चौकीदारी कर रहे हैं। लेकिन संख्या अधिक होने के कारण बागवान अपनी फसल को बचाने में सफल नहीं हो रहे है। उन्होंने सरकार से मांग की है कि फसल को बचाने के लिए योजना बनाई जाए। उन्होंने कहा दिन के समय एक ठिकाना एक स्थान होने के कारण कोई रसायन छिड़ककर इनको मारने की व्यवस्था की जाए। छौरान किसान संघ इकाई के अध्यक्ष बविंद्र सूर्याण ने कहा लोगों के बगीचे तबाह हो गए हैं, सरकार मामले को गंभीरता से ले।
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गौर हो कि इससे पहले वर्ष 2004 और 05 में चमगादडों से सेब सहित अन्य फलों को भारी नुकसान पहुंचाया था। उस समय मामला विधानसभा तक उठाया गया। सरकार ने वन विभाग को भी इस पर काम करने के निर्देश दिए थे। हालांकि बाद में सालों तक माइग्रेट होने वाले चमगादड़ों की संख्या में कमी रही। इस बार दोबारा बागवानों के लिए परेशानी खड़ी हो चुकी है।