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बैसाखी पर मंदिरों में सैकड़ों लोगों ने नवाया शीश
Updated Sat, 14 Apr 2018 07:25 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
रोहड़ू।
क्षेत्र रोहड़ू में बैसाखी पर्व धूमधाम से मनाया गया। लोगों ने घरों और मंदिरों को बुरांस के फूल की माला से सजाया। रोहड़ू के शिव शक्ति और अन्य मंदिरों में भी बैसाखी पर्व पर सैकड़ों लोगों ने शीश नवाया। मंदिरों में संक्रांति के दिन विशेष पूजा पाठ की गई। बुरांस के फूलों को घास की रस्सी में गुंथ कर माला बनाई गई। पर्व पर क्षेत्र के हर गांव में विशेष पकवान बनाए गए। पहले दिन जंगलों से बुरांस के फूल तोड़ कर लाए और उसकी माला बनाई गई।
बैसाखी की सुबह पौ फटने से पहले घरों व मंदिरों में पूजा-अर्चना के साथ माला लगाई गई। माला को एक महीने तक घरों में रखा जाता है। इसके बाद माला को उतार कर पवित्र स्थान पर रखा जाता है। हाटकोटी दुर्गा माता मंदिर को बुरांस के फूलों से सजाया गया। शराचली क्षेत्र के रोहटान गांव में भी देवता बनाड़ के मंदिर में बुरांस के फूलों की माला लगाई गई। दुर्गा माता मंदिर हाटकोटी के भंडारी भवानी दत्त शर्मा का कहना है कि बैसाखी के पर्व पर बुरांस के फूलों की माला लगाना का अपना महत्व है। हर साल इस पर्व पर लोग घरों में भी बुरांस के फूलों की माला लगाते हैं।
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रोहड़ू।
क्षेत्र रोहड़ू में बैसाखी पर्व धूमधाम से मनाया गया। लोगों ने घरों और मंदिरों को बुरांस के फूल की माला से सजाया। रोहड़ू के शिव शक्ति और अन्य मंदिरों में भी बैसाखी पर्व पर सैकड़ों लोगों ने शीश नवाया। मंदिरों में संक्रांति के दिन विशेष पूजा पाठ की गई। बुरांस के फूलों को घास की रस्सी में गुंथ कर माला बनाई गई। पर्व पर क्षेत्र के हर गांव में विशेष पकवान बनाए गए। पहले दिन जंगलों से बुरांस के फूल तोड़ कर लाए और उसकी माला बनाई गई।
बैसाखी की सुबह पौ फटने से पहले घरों व मंदिरों में पूजा-अर्चना के साथ माला लगाई गई। माला को एक महीने तक घरों में रखा जाता है। इसके बाद माला को उतार कर पवित्र स्थान पर रखा जाता है। हाटकोटी दुर्गा माता मंदिर को बुरांस के फूलों से सजाया गया। शराचली क्षेत्र के रोहटान गांव में भी देवता बनाड़ के मंदिर में बुरांस के फूलों की माला लगाई गई। दुर्गा माता मंदिर हाटकोटी के भंडारी भवानी दत्त शर्मा का कहना है कि बैसाखी के पर्व पर बुरांस के फूलों की माला लगाना का अपना महत्व है। हर साल इस पर्व पर लोग घरों में भी बुरांस के फूलों की माला लगाते हैं।
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