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Mandi News: द्रंग विधानसभा क्षेत्र में सनेहड़ पंचायत निरस्त करने से ग्रामीणों में आक्रोश
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सनेहड़ पंचायत के ग्रामीण डीसी मंडी को ज्ञापन सौंपकर दोबारा पंचायत अधिसूचना जारी करने की मांग कर
संवाद न्यूज एजेंसी
मंडी। द्रंग विधानसभा क्षेत्र में नवगठित ग्राम पंचायत सनेहड़ के गठन के महज चार दिन बाद डिनोटिफाई किए जाने से ग्रामीणों में गहरी नाराजगी व्याप्त है। पंचायत के निरस्त होने से आहत सैकड़ों ग्रामीणों ने बुधवार को उपायुक्त मंडी अपूर्व देवगन को ज्ञापन सौंपकर पंचायत को पुनः बहाल करने की मांग की।
प्रदेश सरकार ने 10 मार्च को ग्राम पंचायत कुन्नू और डलाह के दो वार्डों को अलग कर सनेहड़ पंचायत के गठन की अधिसूचना जारी की थी। हालांकि, कुछ लोगों की आपत्ति के बाद सरकार ने 14 मार्च को इसे डिनोटिफाई कर दिया, जिससे स्थानीय लोगों में असंतोष पैदा हो गया। ग्रामीणों का कहना है कि सनेहड़ पंचायत 1651 लोगों की मांग पर बनाई गई थी और इसके गठन के लिए वर्ष 2019 से लगातार प्रयास किए जा रहे थे।
ग्राम पंचायत डलाह के पूर्व प्रधान हेमंत कुमार ने कहा कि वर्षों के संघर्ष के बाद पंचायत का गठन हुआ था, लेकिन कुछ लोगों की आपत्तियों के चलते इसे समाप्त करना सैकड़ों लोगों की भावनाओं के साथ अन्याय है।
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वहीं, ग्राम पंचायत कुन्नू के पूर्व उप प्रधान अविनाश कटोच ने सरकार के फैसले को जनभावनाओं के खिलाफ बताया।
उन्होंने कहा कि ग्रामीणों में इस निर्णय को लेकर भारी रोष है। सरकार के पास अभी भी सुधार का अवसर है। यदि जल्द ही पंचायत के पुनर्गठन की अधिसूचना जारी नहीं की गई तो हम न्यायालय का दरवाजा खटखटाने को मजबूर होंगे।
ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि सनेहड़ पंचायत का गठन क्षेत्र के लोगों की सुविधा और प्रशासनिक सुगमता से जुड़ा हुआ है। ऐसे में सरकार को जनहित को प्राथमिकता देते हुए अपने फैसले पर पुनर्विचार करना चाहिए।
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मंडी। द्रंग विधानसभा क्षेत्र में नवगठित ग्राम पंचायत सनेहड़ के गठन के महज चार दिन बाद डिनोटिफाई किए जाने से ग्रामीणों में गहरी नाराजगी व्याप्त है। पंचायत के निरस्त होने से आहत सैकड़ों ग्रामीणों ने बुधवार को उपायुक्त मंडी अपूर्व देवगन को ज्ञापन सौंपकर पंचायत को पुनः बहाल करने की मांग की।
प्रदेश सरकार ने 10 मार्च को ग्राम पंचायत कुन्नू और डलाह के दो वार्डों को अलग कर सनेहड़ पंचायत के गठन की अधिसूचना जारी की थी। हालांकि, कुछ लोगों की आपत्ति के बाद सरकार ने 14 मार्च को इसे डिनोटिफाई कर दिया, जिससे स्थानीय लोगों में असंतोष पैदा हो गया। ग्रामीणों का कहना है कि सनेहड़ पंचायत 1651 लोगों की मांग पर बनाई गई थी और इसके गठन के लिए वर्ष 2019 से लगातार प्रयास किए जा रहे थे।
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ग्राम पंचायत डलाह के पूर्व प्रधान हेमंत कुमार ने कहा कि वर्षों के संघर्ष के बाद पंचायत का गठन हुआ था, लेकिन कुछ लोगों की आपत्तियों के चलते इसे समाप्त करना सैकड़ों लोगों की भावनाओं के साथ अन्याय है।
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वहीं, ग्राम पंचायत कुन्नू के पूर्व उप प्रधान अविनाश कटोच ने सरकार के फैसले को जनभावनाओं के खिलाफ बताया।
उन्होंने कहा कि ग्रामीणों में इस निर्णय को लेकर भारी रोष है। सरकार के पास अभी भी सुधार का अवसर है। यदि जल्द ही पंचायत के पुनर्गठन की अधिसूचना जारी नहीं की गई तो हम न्यायालय का दरवाजा खटखटाने को मजबूर होंगे।
ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि सनेहड़ पंचायत का गठन क्षेत्र के लोगों की सुविधा और प्रशासनिक सुगमता से जुड़ा हुआ है। ऐसे में सरकार को जनहित को प्राथमिकता देते हुए अपने फैसले पर पुनर्विचार करना चाहिए।