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Mandi News: आंगनबाड़ी केंद्रों में एफआरएस लागू करने पर भड़की यूनियन
Fri, 22 Aug 2025 06:59 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी
संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी
Updated Fri, 22 Aug 2025 06:59 AM IST
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उपायुक्त मंडी को केंद्रीय मंत्री के नाम को ज्ञापन सौंपते आंगनबाड़ी वर्कर-हेल्पर यूनियन के सदस्य
मंडी। एफआरएस लागू करने के विरोध में सीटू से संबद्ध आंगनबाड़ी वर्कर-हेल्पर यूनियन ने सोमवार को राष्ट्रीय कार्यकारिणी के आह्वान पर मंडी जिला में काला दिवस मनाया। इस दौरान सभी प्रोजेक्ट कमेटियों ने रैली निकालकर सरकार के फैसले के खिलाफ नारेबाजी की और उपायुक्त मंडी व उपमंडल अधिकारियों के माध्यम से केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी को ज्ञापन प्रेषित किया।
यूनियन ने आरोप लगाया कि 11 अगस्त 2025 को मंत्रालय की संसदीय सलाहकार समिति की बैठक में 1 अगस्त से आंगनबाड़ी केंद्रों में सभी सेवाओं के लिए फेस रिकग्निशन सिस्टम (एफआरएस) को अनिवार्य बनाए रखने का फैसला लिया गया, जबकि 6 अगस्त को केंद्रीय मंत्री से मुलाकात के दौरान समाधान का आश्वासन मिला था। इसे कर्मचारियों ने वादाखिलाफी करार देते हुए कड़ा विरोध दर्ज किया।
यूनियन ने कहा कि पोषण ट्रैकर ऐप की तकनीकी खामियां और नेटवर्क की समस्या आम हैं। सरकार द्वारा घोषित 2000 रुपये वार्षिक डाटा चार्ज का लाभ कर्मचारियों तक नहीं पहुंच पा रहा। ओटीपी आधारित सत्यापन से बैंक खातों के दुरुपयोग और धोखाधड़ी की आशंका बनी रहती है। तकनीकी गड़बड़ी के कारण लाभार्थी नाराज होकर कर्मचारियों के साथ दुर्व्यवहार तक कर रहे हैं।
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मुख्य मांगों में एफआरएस की अनिवार्यता को तुरंत समाप्त करना, आंगनबाड़ी कर्मचारियों को सुरक्षा सुविधा उपलब्ध कराना, सभी केंद्रों में कंप्यूटर/लैपटॉप/टैब उपलब्ध कराना और तब तक 5जी युक्त गुणवत्तापूर्ण फोन मुहैया करवाना शामिल है। साथ ही सभी केंद्रों में निशुल्क वाई-फाई सुविधा, ई-कल्याण ऐप को बंद करने और पोषण ट्रैकर ऐप से जुड़े मुद्दों पर त्रिपक्षीय बैठक आयोजित करने की मांग की गई।
इस अवसर पर यूनियन की जिला प्रधान विमला शर्मा, सचिव सुदर्शन, पम्मी, सरल बंसल, गोदावरी, सपना ठाकुर, सरला, सुनिता सहित अन्य मौजूद रहे।
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यूनियन ने आरोप लगाया कि 11 अगस्त 2025 को मंत्रालय की संसदीय सलाहकार समिति की बैठक में 1 अगस्त से आंगनबाड़ी केंद्रों में सभी सेवाओं के लिए फेस रिकग्निशन सिस्टम (एफआरएस) को अनिवार्य बनाए रखने का फैसला लिया गया, जबकि 6 अगस्त को केंद्रीय मंत्री से मुलाकात के दौरान समाधान का आश्वासन मिला था। इसे कर्मचारियों ने वादाखिलाफी करार देते हुए कड़ा विरोध दर्ज किया।
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यूनियन ने कहा कि पोषण ट्रैकर ऐप की तकनीकी खामियां और नेटवर्क की समस्या आम हैं। सरकार द्वारा घोषित 2000 रुपये वार्षिक डाटा चार्ज का लाभ कर्मचारियों तक नहीं पहुंच पा रहा। ओटीपी आधारित सत्यापन से बैंक खातों के दुरुपयोग और धोखाधड़ी की आशंका बनी रहती है। तकनीकी गड़बड़ी के कारण लाभार्थी नाराज होकर कर्मचारियों के साथ दुर्व्यवहार तक कर रहे हैं।
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मुख्य मांगों में एफआरएस की अनिवार्यता को तुरंत समाप्त करना, आंगनबाड़ी कर्मचारियों को सुरक्षा सुविधा उपलब्ध कराना, सभी केंद्रों में कंप्यूटर/लैपटॉप/टैब उपलब्ध कराना और तब तक 5जी युक्त गुणवत्तापूर्ण फोन मुहैया करवाना शामिल है। साथ ही सभी केंद्रों में निशुल्क वाई-फाई सुविधा, ई-कल्याण ऐप को बंद करने और पोषण ट्रैकर ऐप से जुड़े मुद्दों पर त्रिपक्षीय बैठक आयोजित करने की मांग की गई।
इस अवसर पर यूनियन की जिला प्रधान विमला शर्मा, सचिव सुदर्शन, पम्मी, सरल बंसल, गोदावरी, सपना ठाकुर, सरला, सुनिता सहित अन्य मौजूद रहे।