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Mandi News: करसोग में स्क्रब टाइफस से दो की माैत

Mon, 04 Aug 2025 11:14 PM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी
संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी Updated Mon, 04 Aug 2025 11:14 PM IST
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Two died of scrub typhus in Karsog
करसोग क्षेत्र में स्क्रब टाइफस को लेकर दवाइयां बांटती टीम। स्त्रोत : विभाग
करसोग (मंडी)। उपमंडल करसोग के जुखल और बाओटा गांव में स्क्रब टाइफस से पीड़ित दो लोगों की आईजीएमसी शिमला में मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन सतर्क हो गया है। सोमवार को स्वास्थ्य विभाग की टीम ने प्रभावित गांवों का दौरा कर लोगों को दवाइयां वितरित कीं। इसके साथ ही स्क्रब टाइफस के लक्षण, बचाव और उपचार के बारे में जागरूक किया गया।
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फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन मौतों के बाद इलाके में डर का माहौल बना हुआ है। टीम बुखार से पीड़ित लोगों पर निगरानी रख रही है। खंड चिकित्सा अधिकारी करसोग डॉ. गोपाल चौहान ने कहा कि पीएचसी महोग के स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं और आशा वर्कर्स के साथ संयुक्त अभियान चलाया गया। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार करसोग क्षेत्र से स्क्रब टाइफस के दो ही मामले सामने आए हैं, अन्य भागों में कोई नया मामला रिपोर्ट नहीं हुआ है।
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ऐसे फैलती है बीमारी
बरसात के मौसम में तेज बुखार होना और जोड़ों में दर्द होना स्क्रब टाइफस की बीमारी भी हो सकती है। इसको फैलाने वाले मुख्य जीव पिस्सू हैं, जो हरी घास में रहने वाले जंगली चूहों, बिल्लियों, कुत्तों और गिलहरियों जैसे जानवरों में पाए जाते हैं। जब कोई संक्रमित पिस्सू मनुष्य को काटता है तो यह मनुष्य के शरीर में प्रवेश कर जाता है, जिससे स्क्रब टाइफस होता है।
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यह हैं लक्षण
स्क्रब टाइफस तेज बुखार, सिरदर्द, शरीर में दर्द और कभी-कभी शरीर पर दाने जैसे लक्षणों के साथ प्रकट होता है। बुखार पिस्सू के काटने के 6 से 21 दिनों के भीतर शुरू हो सकता है। इसके अलावा पिस्सू के काटने की जगह पर काली पपड़ी का निशान भी हो सकता है। स्क्रब टाइफस का पता रक्त परीक्षण से ही चलता है। इसके उपचार के लिए एंटीबायोटिक्स का उपयोग किया जाता है।

झाड़ियों और घास वाले क्षेत्रों से दूर रहें
स्क्रब टाइफस से बचाव के लिए घर के आसपास झाड़ियों और घास वाले क्षेत्रों से दूर रहें और शरीर को ढकने वाले कपड़े पहने। स्क्रब टाइफस का इलाज है, लेकिन यदि मरीज देर से अस्पताल जाए तो फिर इलाज मुश्किल हो जाता है।


दोनों मरीजों को नागरिक अस्पताल करसोग से आईजीएमसी शिमला रेफर किया गया था, जहां रविवार को उनकी मौत हो गई। मामले के बाद एहतियातन जागरूकता गतिविधियां शुरू की गई हैं और निगरानी लगातार जारी है।
-डॉ. दीपाली शर्मा, सीएमओ, मंडी
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