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Mandi News: चच्योट में प्रकट हुए थे पंचवीर देवता, 18वीं सदी से महाशिवरात्रि के मेहमान
Thu, 19 Feb 2026 06:03 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी
संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी
Updated Thu, 19 Feb 2026 06:03 AM IST
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मंडी। नाचन क्षेत्र के चच्योट गांव के देव पंचवीर का इतिहास 18वीं सदी से जुड़ा है। मान्यता है कि देवता ने कुल्लू के दो भाइयों को स्वप्न में दर्शन देकर चच्योट में अपने पिंडी रूप में होने का संकेत दिया था, जिसके बाद खोदाई में वे प्रकट हुए। इस ऐतिहासिक घटना का वर्णन भाषा विभाग की पुस्तक देव गाथा में भी मिलता है।
देवता के कारदार दिला राम और पुरथु राम के अनुसार देव परिवार की एक बेटी का विवाह मंडी रियासत में हुआ था। तत्कालीन राजा ने देवता को मेहमान के रूप में मंडी आमंत्रित किया और राज बेहड़े में स्थान दिया। रियासत काल की यह परंपरा आज भी जारी है और महाशिवरात्रि महोत्सव में देव पंचवीर को मेहमान देवता का विशेष सम्मान प्राप्त है।
रियासतें समाप्त होने के बाद अब महोत्सव के दौरान देवता और उनके देवलुओं के ठहरने की व्यवस्था भूतनाथ मंदिर की सराय में की जाती है। चच्योट गांव में अब देवता का भव्य मंदिर और श्रद्धालुओं के लिए सराय बन चुकी है। क्षेत्रवासियों की देव पंचवीर के प्रति अटूट आस्था है और सदियों से उनके वंशज ही सेवा का दायित्व निभा रहे हैं। संवाद
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देवता के कारदार दिला राम और पुरथु राम के अनुसार देव परिवार की एक बेटी का विवाह मंडी रियासत में हुआ था। तत्कालीन राजा ने देवता को मेहमान के रूप में मंडी आमंत्रित किया और राज बेहड़े में स्थान दिया। रियासत काल की यह परंपरा आज भी जारी है और महाशिवरात्रि महोत्सव में देव पंचवीर को मेहमान देवता का विशेष सम्मान प्राप्त है।
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रियासतें समाप्त होने के बाद अब महोत्सव के दौरान देवता और उनके देवलुओं के ठहरने की व्यवस्था भूतनाथ मंदिर की सराय में की जाती है। चच्योट गांव में अब देवता का भव्य मंदिर और श्रद्धालुओं के लिए सराय बन चुकी है। क्षेत्रवासियों की देव पंचवीर के प्रति अटूट आस्था है और सदियों से उनके वंशज ही सेवा का दायित्व निभा रहे हैं। संवाद
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