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कीटनाशकों के सुरक्षित इस्तेमाल से करें बासमती की खेती : डॉ. रितेश
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पालमपुर (कांगड़ा)। धान की खेती में कीटनाशकों के सुरक्षित और संतुलित इस्तेमाल के साथ निर्यात योग्य गुणवत्तापूर्ण बासमती उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए धान व गेहूं अनुसंधान केंद्र मलां में क्षमता निर्माण कार्यक्रम आयोजित किया गया। चौधरी सरवण कुमार हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर ने बासमती निर्यात विकास फाउंडेशन और कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण, नई दिल्ली के सहयोग से यह कार्यक्रम करवाया।
कार्यक्रम में हिमाचल के विभिन्न क्षेत्रों से 150 से अधिक धान उत्पादक किसानों ने भाग लिया। कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण के निदेशक डॉ. रितेश शर्मा मुख्य अतिथि रहे। उन्होंने कहा कि निर्यात बाजार की जरूरतों के अनुसार कृषि उत्पाद की गुणवत्ता बनाए रखना जरूरी है। किसानों को ऐसी कृषि पद्धतियां अपनानी चाहिए, जिससे सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण उपज तैयार हो सके।
विश्वविद्यालय के निदेशक प्रसार शिक्षा डॉ. जनार्दन सिंह ने किसानों को कीटनाशकों के जिम्मेदार और संतुलित इस्तेमाल की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक तरीकों को अपनाकर किसान सुरक्षित कृषि उपज तैयार करने के साथ उत्पादन की गुणवत्ता भी बेहतर कर सकते हैं। अधिष्ठाता कृषि महाविद्यालय डॉ. एडी बिंद्रा ने भी उन्नत कृषि तकनीकों को अपनाने पर जोर दिया। धान व गेहूं अनुसंधान केंद्र मलां के प्रभारी वैज्ञानिक डॉ. डीपी पांडे ने केंद्र की अनुसंधान और प्रसार गतिविधियों की जानकारी दी। इफको कांगड़ा के क्षेत्र अधिकारी श्रेय सूद ने आयोजन में सहयोग किया।
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कार्यक्रम में हिमाचल के विभिन्न क्षेत्रों से 150 से अधिक धान उत्पादक किसानों ने भाग लिया। कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण के निदेशक डॉ. रितेश शर्मा मुख्य अतिथि रहे। उन्होंने कहा कि निर्यात बाजार की जरूरतों के अनुसार कृषि उत्पाद की गुणवत्ता बनाए रखना जरूरी है। किसानों को ऐसी कृषि पद्धतियां अपनानी चाहिए, जिससे सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण उपज तैयार हो सके।
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विश्वविद्यालय के निदेशक प्रसार शिक्षा डॉ. जनार्दन सिंह ने किसानों को कीटनाशकों के जिम्मेदार और संतुलित इस्तेमाल की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक तरीकों को अपनाकर किसान सुरक्षित कृषि उपज तैयार करने के साथ उत्पादन की गुणवत्ता भी बेहतर कर सकते हैं। अधिष्ठाता कृषि महाविद्यालय डॉ. एडी बिंद्रा ने भी उन्नत कृषि तकनीकों को अपनाने पर जोर दिया। धान व गेहूं अनुसंधान केंद्र मलां के प्रभारी वैज्ञानिक डॉ. डीपी पांडे ने केंद्र की अनुसंधान और प्रसार गतिविधियों की जानकारी दी। इफको कांगड़ा के क्षेत्र अधिकारी श्रेय सूद ने आयोजन में सहयोग किया।
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