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Mandi News: छह किलोमीटर की करुण यात्रा, सड़क नहीं तो पालकी ही सहारा
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सराज विधानसभा क्षेत्र की ग्राम पंचायत बाड़ा के चीतल-बुखारी गांव सड़क सुविधा न होने पर कुर्सी पर
चीतल-बुखारी में आज भी मरीजों और बुजुर्गों को पालकी पर उठाकर पहुंचाना पड़ता है सड़क तक
संवाद न्यूज एजेंसी
थुनाग (मंडी)। सराज विधानसभा क्षेत्र की ग्राम पंचायत बाड़ा के चीतल-बुखारी गांव में सड़क सुविधा के अभाव का दर्द शुक्रवार को एक बार फिर सामने आया। गांव की निवासी हीरामणी की टांग में समस्या होने के कारण वह चलने में असमर्थ थीं। ऐसे में ग्रामीणों ने उन्हें पालकी में बैठाकर करीब छह किलोमीटर पैदल चलकर बाड़ा तक पहुंचाया। इसके बाद वाहन के माध्यम से उन्हें नेरचौक अस्पताल ले जाया गया।
चीतल-बुखारी के ग्रामीणों के लिए यह पहली ऐसी घटना नहीं है। गांव तक सड़क नहीं होने के कारण बीमार, बुजुर्ग और जरूरतमंद लोगों को आज भी पालकी या कुर्सी पर उठाकर सड़क तक पहुंचाना पड़ता है। सामान्य दिनों में भी ग्रामीणों को पांच से छह किलोमीटर का पैदल सफर तय करना पड़ता है। बारिश के दौरान रास्ता और भी जोखिमभरा हो जाता है। वार्ड पंच उमा देवी, फतेह सिंह, उमेश कुमार, युधिष्ठिर, बलवंत और पंकज समेत अन्य ग्रामीणों ने बताया कि गांव को सड़क से जोड़ने की मांग लंबे समय से उठाई जा रही है लेकिन अब तक समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पाया है। ग्रामीणों ने प्रशासन से जल्द चीतल-बुखारी गांव को सड़क सुविधा से जोड़ने की मांग की है। ग्राम पंचायत बाड़ा की प्रधान मनाक्षी ने बताया कि चीतल-बुखारी को सड़क से जोड़ने के लिए पंचायत की ओर से दो स्थानों से प्रयास किए गए लेकिन जमीन विवाद के कारण काम आगे नहीं बढ़ सका। अब दूसरे मार्ग से सड़क निकालकर गांव को जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। उधर, एसडीएम थुनाग संजीत शर्मा ने बताया कि सड़क के संबंध में संबंधित विभाग से रिपोर्ट ली जाएगी।
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संवाद न्यूज एजेंसी
थुनाग (मंडी)। सराज विधानसभा क्षेत्र की ग्राम पंचायत बाड़ा के चीतल-बुखारी गांव में सड़क सुविधा के अभाव का दर्द शुक्रवार को एक बार फिर सामने आया। गांव की निवासी हीरामणी की टांग में समस्या होने के कारण वह चलने में असमर्थ थीं। ऐसे में ग्रामीणों ने उन्हें पालकी में बैठाकर करीब छह किलोमीटर पैदल चलकर बाड़ा तक पहुंचाया। इसके बाद वाहन के माध्यम से उन्हें नेरचौक अस्पताल ले जाया गया।
चीतल-बुखारी के ग्रामीणों के लिए यह पहली ऐसी घटना नहीं है। गांव तक सड़क नहीं होने के कारण बीमार, बुजुर्ग और जरूरतमंद लोगों को आज भी पालकी या कुर्सी पर उठाकर सड़क तक पहुंचाना पड़ता है। सामान्य दिनों में भी ग्रामीणों को पांच से छह किलोमीटर का पैदल सफर तय करना पड़ता है। बारिश के दौरान रास्ता और भी जोखिमभरा हो जाता है। वार्ड पंच उमा देवी, फतेह सिंह, उमेश कुमार, युधिष्ठिर, बलवंत और पंकज समेत अन्य ग्रामीणों ने बताया कि गांव को सड़क से जोड़ने की मांग लंबे समय से उठाई जा रही है लेकिन अब तक समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पाया है। ग्रामीणों ने प्रशासन से जल्द चीतल-बुखारी गांव को सड़क सुविधा से जोड़ने की मांग की है। ग्राम पंचायत बाड़ा की प्रधान मनाक्षी ने बताया कि चीतल-बुखारी को सड़क से जोड़ने के लिए पंचायत की ओर से दो स्थानों से प्रयास किए गए लेकिन जमीन विवाद के कारण काम आगे नहीं बढ़ सका। अब दूसरे मार्ग से सड़क निकालकर गांव को जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। उधर, एसडीएम थुनाग संजीत शर्मा ने बताया कि सड़क के संबंध में संबंधित विभाग से रिपोर्ट ली जाएगी।
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