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Mandi News: जैव विविधता, पर्यावरण के उभरते मुद्दों पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन
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देश, दुनिया के 150 वैज्ञानी, प्रवक्ता और शोधार्थी ऑनलाइन ले रहे भाग
संवाद न्यूज एजेंसी
मंडी। वल्लभ महाविद्यालय मंडी में बुधवार को सतत विकास के लिए जैव विविधता और पर्यावरण के उभरते मुद्दों पर दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन बुधवार को शुरू हुआ। इसमें देश और दुनियाभर से 160 से अधिक वैज्ञानिक, प्रोफेसर और शोधार्थी ऑनलाइन माध्यम से भाग ले रहे हैं। जिन्होंने अपने-अपने शोध पत्र ऑनलाइन और ऑफलाइन प्रस्तुत किए।
सम्मेलन का शुभारंभ उच्च शिक्षा के अतिरिक्त निदेशक सेवानिवृत्त प्रो. कृष्ण कुमार वैद्य ने किया। उन्होंने जलवायु परिवर्तन, ग्लोबल वार्मिंग और उपभोक्तावादी संस्कृति पर व्याख्यान दिया। उन्होंने मानव और प्रकृति के संबंधों में सुधार और संतुलन पर बल दिया। इस अवसर पर मंडी कॉलेज की प्राचार्य प्रो. सुरीना शर्मा ने सम्मेलन में भाग ले रहे प्रतिभागियों का स्वागत किया। उन्होंने मंडी कॉलेज के इतिहास, हिमाचल के पर्यावरण और जैव-विविधता पर प्रकाश डाला। इस अवसर पर राष्ट्रीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन की स्मारिका का लोकार्पण भी किया गया। वहीं, कौनकू विश्वविद्यालय साउथ कोरिया के एसोसिएट प्रो. डॉ. शशिकांत भाटिया ने शाश्वत विकास के लिए माइक्रोबज विषय पर आनलाइन शोध पत्र प्रस्तुत किया। पंजाब विवि के प्रो. एमसी सिद्धू ने जैव-विविधता व उसकी संरक्षण रणनीति पर शोध प्रस्तुत किया। हिमाचल विश्वविद्यालय के प्रो डॉ. विनोद मट्टू ने बायोडायवर्सिटी, इन्वार्यनमेंट सस्टेनेबल डेवलपमेंट पर शोध प्रस्तुत किया। मीडिया समन्वयक डॉ. चमन प्रेमी ने बताया कि सम्मेलन के प्रथम दिन 6 तकनीकी सत्र आयोजित किए है। जिसमें डॉ गीतिका, सहायक प्रो अदिति, डॉ. अनिता, सहित अनेक विद्वान विज्ञानिकों, प्रो. शोधार्थियों ने शोध पत्र प्रस्तुत किए।
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संवाद न्यूज एजेंसी
मंडी। वल्लभ महाविद्यालय मंडी में बुधवार को सतत विकास के लिए जैव विविधता और पर्यावरण के उभरते मुद्दों पर दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन बुधवार को शुरू हुआ। इसमें देश और दुनियाभर से 160 से अधिक वैज्ञानिक, प्रोफेसर और शोधार्थी ऑनलाइन माध्यम से भाग ले रहे हैं। जिन्होंने अपने-अपने शोध पत्र ऑनलाइन और ऑफलाइन प्रस्तुत किए।
सम्मेलन का शुभारंभ उच्च शिक्षा के अतिरिक्त निदेशक सेवानिवृत्त प्रो. कृष्ण कुमार वैद्य ने किया। उन्होंने जलवायु परिवर्तन, ग्लोबल वार्मिंग और उपभोक्तावादी संस्कृति पर व्याख्यान दिया। उन्होंने मानव और प्रकृति के संबंधों में सुधार और संतुलन पर बल दिया। इस अवसर पर मंडी कॉलेज की प्राचार्य प्रो. सुरीना शर्मा ने सम्मेलन में भाग ले रहे प्रतिभागियों का स्वागत किया। उन्होंने मंडी कॉलेज के इतिहास, हिमाचल के पर्यावरण और जैव-विविधता पर प्रकाश डाला। इस अवसर पर राष्ट्रीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन की स्मारिका का लोकार्पण भी किया गया। वहीं, कौनकू विश्वविद्यालय साउथ कोरिया के एसोसिएट प्रो. डॉ. शशिकांत भाटिया ने शाश्वत विकास के लिए माइक्रोबज विषय पर आनलाइन शोध पत्र प्रस्तुत किया। पंजाब विवि के प्रो. एमसी सिद्धू ने जैव-विविधता व उसकी संरक्षण रणनीति पर शोध प्रस्तुत किया। हिमाचल विश्वविद्यालय के प्रो डॉ. विनोद मट्टू ने बायोडायवर्सिटी, इन्वार्यनमेंट सस्टेनेबल डेवलपमेंट पर शोध प्रस्तुत किया। मीडिया समन्वयक डॉ. चमन प्रेमी ने बताया कि सम्मेलन के प्रथम दिन 6 तकनीकी सत्र आयोजित किए है। जिसमें डॉ गीतिका, सहायक प्रो अदिति, डॉ. अनिता, सहित अनेक विद्वान विज्ञानिकों, प्रो. शोधार्थियों ने शोध पत्र प्रस्तुत किए।
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