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Mandi News: सराज की सड़कें तंग, आपात स्थिति में बीच सफर फंस जाते हैं दमकल वाहन
Mon, 21 Oct 2024 06:47 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी
संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी
Updated Mon, 21 Oct 2024 06:47 AM IST
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जंजैहली बाजार के साथ लगता बायला गांव। इस गांव में सिर्फ छोटे वाहन ही जा सकते हैं। पुल इतना छोटा
थुनाग (मंडी)। सराज घाटी की संकरी सड़कें आग लगने की स्थिति में दमकल विभाग की त्वरित कार्रवाई में बड़ी बाधा बनती हैं। संकरी सड़कों पर बड़े फायर टेंडर को लेकर मौके पर पहुंचना दमकल विभाग के लिए चुनौतीपूर्ण हो जाता है। सराज घाटी के थुनाग में फायर सब स्टेशन है, लेकिन यहां बड़े वाहन उपलब्ध हैं। छोटे वाहन न होने के कारण आग लगने पर दमकल कर्मियों को कड़ा संघर्ष करना पड़ता है।
घाटी में हर साल आग की विभिन्न घटनाओं से करोड़ों रुपये की संपत्ति स्वाह हो जाती है। यहां की कठिन भौगोलिक परिस्थिति और सड़कों की दयनीय स्थिति के कारण आग की घटना होने पर अग्निशमन वाहन समय पर नहीं पहुंच पाते। ऐसी स्थिति में सबसे पहले लोगों को ही आग पर काबू पाने के लिए संघर्ष करना पड़ता है। क्षेत्र के संगलवाड़ा, तुंगाधार और बुराहड़ा गांव की हालिया आग की घटनाएं इस बात की गवाह है कि जहां फायर ब्रिगेड के पहुंचने से पहले ही सब खाक हो जाता है।
सराज क्षेत्र में आग की घटनाओं पर काबू पाने के लिए थुनाग में फायर सब स्टेशन है। इसके तहत सड़कों से सटे जंजैहली, थुनाग, बगस्याड़, छतरी और बागाचनोगी बाजार के अलावा क्षेत्र लगभग 40 पंचायतें आती हैं। सब स्टेशन में करीब 20 कर्मचारी तैनात है। आग बुझाने के लिए दो फायर टेंडर हैं। इसमें एक फायर टेंडर की क्षमता 4500, जबकि दूसरे 3000 लीटर पानी की क्षमता हैं। सबसे चुनौतीपूर्ण स्थिति यह हैं कि यह दोनों वाहनों बड़े हैं, जो संपर्क मांर्गों पर नहीं जा पाते हैं।
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घाटी के गांव संपर्क सड़कों से दूर
सेवानिवृत्त पंचायत निरीक्षक मनी राम कहते हैं कि पहाड़ी क्षेत्र होने के कारण अधिकतर गांव सड़क से दूर हैं। गांवों में काष्ठकुणी शैली के मकान हैं। कई गांवों में पशुओं का चारा रखने के लिए बनाए छानके भी रिहायशी क्षेत्र में हैं, जिनमें जरा-सी चिंगारी उठने पर भयानक आग लग जाती है। अगर कहीं आग लग जाती है तो बड़े दमकल वाहन सड़क पर अटके रहे जाते हैं। समय पर बचाव अभियान न चलने से सबकुछ राख हो जाता है।
अधिकतर गांव मुख्य सड़कों से दूर हैं। वहां फायर टेंडर नहीं पहुंच पाते हैं। छोटी गाड़ी पर 2500 लीटर क्षमता का फायर टेंडर आसानी से संपर्क मार्गों पर जा सकता है और आसानी से आग पर काबू पाया जा सकता है, लेकिन ऐसा फायर टेंडर हमारे पास नहीं है। छोटे फायर टेंडर की आवश्यकता को लेकर उच्चाधिकारियों को सूचित कर दिया है।
- मायाधर, लीडिंग फायरमैन, फायर सब स्टेशन थुनाग
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घाटी में हर साल आग की विभिन्न घटनाओं से करोड़ों रुपये की संपत्ति स्वाह हो जाती है। यहां की कठिन भौगोलिक परिस्थिति और सड़कों की दयनीय स्थिति के कारण आग की घटना होने पर अग्निशमन वाहन समय पर नहीं पहुंच पाते। ऐसी स्थिति में सबसे पहले लोगों को ही आग पर काबू पाने के लिए संघर्ष करना पड़ता है। क्षेत्र के संगलवाड़ा, तुंगाधार और बुराहड़ा गांव की हालिया आग की घटनाएं इस बात की गवाह है कि जहां फायर ब्रिगेड के पहुंचने से पहले ही सब खाक हो जाता है।
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सराज क्षेत्र में आग की घटनाओं पर काबू पाने के लिए थुनाग में फायर सब स्टेशन है। इसके तहत सड़कों से सटे जंजैहली, थुनाग, बगस्याड़, छतरी और बागाचनोगी बाजार के अलावा क्षेत्र लगभग 40 पंचायतें आती हैं। सब स्टेशन में करीब 20 कर्मचारी तैनात है। आग बुझाने के लिए दो फायर टेंडर हैं। इसमें एक फायर टेंडर की क्षमता 4500, जबकि दूसरे 3000 लीटर पानी की क्षमता हैं। सबसे चुनौतीपूर्ण स्थिति यह हैं कि यह दोनों वाहनों बड़े हैं, जो संपर्क मांर्गों पर नहीं जा पाते हैं।
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घाटी के गांव संपर्क सड़कों से दूर
सेवानिवृत्त पंचायत निरीक्षक मनी राम कहते हैं कि पहाड़ी क्षेत्र होने के कारण अधिकतर गांव सड़क से दूर हैं। गांवों में काष्ठकुणी शैली के मकान हैं। कई गांवों में पशुओं का चारा रखने के लिए बनाए छानके भी रिहायशी क्षेत्र में हैं, जिनमें जरा-सी चिंगारी उठने पर भयानक आग लग जाती है। अगर कहीं आग लग जाती है तो बड़े दमकल वाहन सड़क पर अटके रहे जाते हैं। समय पर बचाव अभियान न चलने से सबकुछ राख हो जाता है।
अधिकतर गांव मुख्य सड़कों से दूर हैं। वहां फायर टेंडर नहीं पहुंच पाते हैं। छोटी गाड़ी पर 2500 लीटर क्षमता का फायर टेंडर आसानी से संपर्क मार्गों पर जा सकता है और आसानी से आग पर काबू पाया जा सकता है, लेकिन ऐसा फायर टेंडर हमारे पास नहीं है। छोटे फायर टेंडर की आवश्यकता को लेकर उच्चाधिकारियों को सूचित कर दिया है।
- मायाधर, लीडिंग फायरमैन, फायर सब स्टेशन थुनाग