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Mandi News: लंबे अरसे बाद साइबेरिया से मंडी पहुंचे रूडी शेल्डक, ग्रेट कॉर्मोरेंट
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मंडी शहर के बीच से बहने वाली ब्यास में प्रवासी पक्षी। स्त्रोत विभाग
- फोटो : टूंडला के गांव ठार हीरासिंह में भाजपा जिलाध्यक्ष के स्वागत कार्यक्रम में मंचासीन पदाधिकारी संगठन
मंडी। साइबेरिया से लंबी दूरी तय कर मंडी के जलाशयों में पक्षी पहुंच गए हैं। इस बार लंबे अरसे के बाद रूडी शेल्डक और ग्रेट कॉर्मोरेंट पक्षी भी पहुंचे हैंं। पिछले साल के मुकाबले ज्यादा पक्षियों ने दस्तक दी है।
दुनिया के कई हिस्सों से प्रवासी पक्षियों ने मंडी जिला के जलाशयों का रुख करना शुरू कर दिया है। अधिकांश पक्षी साइबेरिया, चीन, तिब्बत और यूरोपीय देशों से यहां पहुंचे हैं। ब्यास नदी और कुछ अन्य जलाशयों में पक्षियों ने अठखेलियां शुरू कर दी हैं। मंडी शहर के निकट विक्टोरिया ब्रिज इन दिनों खास आकर्षण का केंद्र बना हुआ है, जहां इन पक्षियों को ब्यास की ठंडी धाराओं में सक्रिय देखा जा सकता है।
वन विभाग ने कुछ पक्षियों की पहचान रूडी शेल्डक, साइबेरियन स्टोनचैट, कॉमन सैंडपाइपर, टफ्टेड डक, सिट्रीन वैगटेल, लिटिल कॉर्मोरेंट, ग्रेलैग गूज, व्हिस्कर्ड टर्न, ग्रेट कॉर्मोरेंट, रेड-वॉटल्ड लैपविंग, कॉमन शेल्डक, वुड सैंडपाइपर, ओरिएंटल डार्टर, पोंड हेरॉन और ऐशी क्राउन स्पैरो लार्क के रूप में की है। इन पक्षियों को शिकारी तत्वों से बचाने के लिए वन विभाग ने जलाशयों के आसपास चौबीसों घंटे निगरानी रखने का निर्णय लिया है। विभाग ने स्थानीय निवासियों से भी अवैध शिकार रोकने में सहयोग का आग्रह किया है। कोई संदिग्ध गतिविधि नजर आने पर वन अधिकारी को सूचित करने का विभागीय अधिकारियों ने आग्रह किया है।
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हजारों किलोमीटर की दूरी तय कर पहुंचते हैं प्रवासी पक्षी
ये पक्षी हर साल साइबेरिया से चार से पांच हजार किलोमीटर से अधिक की दूरी तय कर पहुंचते हैं। खास बात यह कि इनका मार्ग हर बार एक जैसा ही रहता है। नवंबर के दूसरे सप्ताह में इन पक्षियों का पहुंचने का सिलसिला शुरू हो जाता है। फरवरी के अंत एवं मार्च के पहले सप्ताह तक ये प्रवासी पक्षी यहां के जलाशयों में रहते हैं।
...
अनुकूल वातावरण ही इन पक्षियों को यहां खींच लाता है। वन विभाग इन पक्षियों के संरक्षण को सुनिश्चित करने के लिए कार्यरत है। यहां का वातावरण उन्हें इतना अच्छा लगता है कि वह प्रजनन प्रक्रिया भी यहीं करते हैं। स्थानीय लोगों को पक्षियों का शिकार न करने के प्रति जागरूक किया जा रहा है। फील्ड स्टाफ को जलाशयों के आस पास पैनी नजर रखने के निर्देश जारी किए गए हैं।
-वासु डोगर, वन मंडलाधिकारी मंडी
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दुनिया के कई हिस्सों से प्रवासी पक्षियों ने मंडी जिला के जलाशयों का रुख करना शुरू कर दिया है। अधिकांश पक्षी साइबेरिया, चीन, तिब्बत और यूरोपीय देशों से यहां पहुंचे हैं। ब्यास नदी और कुछ अन्य जलाशयों में पक्षियों ने अठखेलियां शुरू कर दी हैं। मंडी शहर के निकट विक्टोरिया ब्रिज इन दिनों खास आकर्षण का केंद्र बना हुआ है, जहां इन पक्षियों को ब्यास की ठंडी धाराओं में सक्रिय देखा जा सकता है।
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वन विभाग ने कुछ पक्षियों की पहचान रूडी शेल्डक, साइबेरियन स्टोनचैट, कॉमन सैंडपाइपर, टफ्टेड डक, सिट्रीन वैगटेल, लिटिल कॉर्मोरेंट, ग्रेलैग गूज, व्हिस्कर्ड टर्न, ग्रेट कॉर्मोरेंट, रेड-वॉटल्ड लैपविंग, कॉमन शेल्डक, वुड सैंडपाइपर, ओरिएंटल डार्टर, पोंड हेरॉन और ऐशी क्राउन स्पैरो लार्क के रूप में की है। इन पक्षियों को शिकारी तत्वों से बचाने के लिए वन विभाग ने जलाशयों के आसपास चौबीसों घंटे निगरानी रखने का निर्णय लिया है। विभाग ने स्थानीय निवासियों से भी अवैध शिकार रोकने में सहयोग का आग्रह किया है। कोई संदिग्ध गतिविधि नजर आने पर वन अधिकारी को सूचित करने का विभागीय अधिकारियों ने आग्रह किया है।
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हजारों किलोमीटर की दूरी तय कर पहुंचते हैं प्रवासी पक्षी
ये पक्षी हर साल साइबेरिया से चार से पांच हजार किलोमीटर से अधिक की दूरी तय कर पहुंचते हैं। खास बात यह कि इनका मार्ग हर बार एक जैसा ही रहता है। नवंबर के दूसरे सप्ताह में इन पक्षियों का पहुंचने का सिलसिला शुरू हो जाता है। फरवरी के अंत एवं मार्च के पहले सप्ताह तक ये प्रवासी पक्षी यहां के जलाशयों में रहते हैं।
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अनुकूल वातावरण ही इन पक्षियों को यहां खींच लाता है। वन विभाग इन पक्षियों के संरक्षण को सुनिश्चित करने के लिए कार्यरत है। यहां का वातावरण उन्हें इतना अच्छा लगता है कि वह प्रजनन प्रक्रिया भी यहीं करते हैं। स्थानीय लोगों को पक्षियों का शिकार न करने के प्रति जागरूक किया जा रहा है। फील्ड स्टाफ को जलाशयों के आस पास पैनी नजर रखने के निर्देश जारी किए गए हैं।
-वासु डोगर, वन मंडलाधिकारी मंडी
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मंडी शहर के बीच से बहने वाली ब्यास में प्रवासी पक्षी। स्त्रोत विभाग- फोटो : टूंडला के गांव ठार हीरासिंह में भाजपा जिलाध्यक्ष के स्वागत कार्यक्रम में मंचासीन पदाधिकारी संगठन