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Mandi News: रमेश शास्त्री पांडुलिपियों में सहेज रहे सुकेत की देवसंस्कृति

Wed, 14 Oct 2026 01:43 AM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Wed, 14 Oct 2026 01:43 AM IST
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Ramesh Shastri is preserving the divine culture of Suket in manuscripts.
100 से 200 साल पुरानी पांडुलिपियों के पुनर्लेखन और देवगाथाओं के संरक्षण में जुटे रमेश शास्त्री
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संवाद न्यूज एजेंसी
करसोग (मंडी)। सुकेत क्षेत्र की प्राचीन देवपरंपराओं और साहित्यिक विरासत को सहेजने में पज्याणु गांव के रमेश शास्त्री जुटे हैं। सरकारी सेवा से सेवानिवृत्ति के बाद वह 100 से 200 वर्ष पुरानी पांडुलिपियों के पुनर्लेखन, देवगाथाओं के संकलन और मंदिरों का इतिहास संरक्षित करने में लगे हैं। साथ ही प्राकृतिक बागवानी भी कर रहे हैं।
सुईं-कुफरीधार पंचायत के पज्याणु गांव में स्वर्गीय बिलुराम और कुन्ती देवी के घर जन्मे रमेश शास्त्री की शिक्षा ऐतिहासिक नगरी पांगणा में हुई। बचपन से पूजा-पाठ और संस्कृत में रुचि रखने वाले रमेश शास्त्री ने दसवीं के बाद शास्त्री की उपाधि हासिल की। सरकारी सेवा के दौरान भी उनकी सांस्कृतिक गतिविधियों में रुचि बनी रही।
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वह पुरानी पांडुलिपियों को हाथ से दोबारा लिखने, टंकित करने और प्रकाशित करने के प्रयास कर रहे हैं। इनमें संस्कृत साहित्य, ज्योतिष, आयुर्वेद और धार्मिक परंपराओं से जुड़ी महत्वपूर्ण सामग्री है। इसके अलावा पज्याणु, छण्डयारा, घाड़ी, काहणो और शरेच क्षेत्रों की देवगाथाओं व मंदिरों के इतिहास का संकलन भी कर रहे हैं। इसके लिए वह स्थानीय जानकारों और देवसमितियों से संपर्क कर रहे हैं।
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संगीतकार एवं इतिहासकार डॉ. हिमेंद्र बाली ने कहा कि ऐसे प्रयासों को संस्थानों, देवसमितियों और शोधकर्ताओं का सहयोग मिलना चाहिए, ताकि सांस्कृतिक विरासत अगली पीढ़ी तक पहुंच सके।
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