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Mandi News: सुंदरनगर में चार माह से मनोरोग ओपीडी पर ताला
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मरीजों को एक साल ही मिल सकी सुविधा
विशेषज्ञ के तबादले के बाद नई नियुक्ति नहीं
हर माह 500-600 मरीज लेते स्वास्थ्य लाभ
संवाद न्यूज एजेंसी
सुंदरनगर (मंडी)। सुंदरनगर सिविल अस्पताल में मानसिक रोगियों के लिए शुरू की गई ओपीडी पिछले चार माह से बंद पड़ी है। इससे सैकड़ों मरीजों को उपचार के लिए नेरचौक मेडिकल कॉलेज के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। वर्ष 2024 में पहली बार शुरू हुई यह सुविधा एक साल भी सुचारु रूप से नहीं चल पाई और दिसंबर 2025 से पूरी तरह ठप हो गई है।
ओपीडी बंद होने से सुंदरनगर, नाचन क्षेत्र और बिलासपुर के सीमावर्ती इलाकों के मरीजों को अब घर के पास मिलने वाला इलाज नहीं मिल पा रहा है। मजबूरन मरीजों को दूरस्थ चिकित्सा संस्थानों की ओर रुख करना पड़ रहा है, जिससे समय और आर्थिक बोझ दोनों बढ़ गए हैं।
जानकारी के मुताबिक जब यह ओपीडी संचालित थी तो हर माह करीब 500 से 600 मरीज यहां उपचार के लिए पहुंचते थे। खासकर नशे की लत से जूझ रहे युवाओं के लिए यह ओपीडी सस्ती और सुलभ चिकित्सा सुविधा का बड़ा केंद्र बनी हुई थी। दरअसल, वर्ष 2024 में मनोरोग विशेषज्ञ की नियुक्ति के बाद ही इस ओपीडी की शुरुआत हुई थी लेकिन दिसंबर 2025 में संबंधित विशेषज्ञ चिकित्सक की पदोन्नति सहायक प्रोफेसर के रूप में अन्य मेडिकल कॉलेज में हो गई। इसके बाद से अस्पताल में कोई नया विशेषज्ञ नियुक्त नहीं किया गया, जिसके चलते ओपीडी बंद पड़ी है।
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एसएमओ सिविल अस्पताल सुंदरनगर डॉ. चमन ठाकुर ने बताया कि विशेषज्ञ चिकित्सक की पदोन्नति के कारण ओपीडी फिलहाल बंद है। नए डॉक्टर की नियुक्ति के आदेश मिलते ही इसे फिर से शुरू कर दिया जाएगा।
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विशेषज्ञ के तबादले के बाद नई नियुक्ति नहीं
हर माह 500-600 मरीज लेते स्वास्थ्य लाभ
संवाद न्यूज एजेंसी
सुंदरनगर (मंडी)। सुंदरनगर सिविल अस्पताल में मानसिक रोगियों के लिए शुरू की गई ओपीडी पिछले चार माह से बंद पड़ी है। इससे सैकड़ों मरीजों को उपचार के लिए नेरचौक मेडिकल कॉलेज के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। वर्ष 2024 में पहली बार शुरू हुई यह सुविधा एक साल भी सुचारु रूप से नहीं चल पाई और दिसंबर 2025 से पूरी तरह ठप हो गई है।
ओपीडी बंद होने से सुंदरनगर, नाचन क्षेत्र और बिलासपुर के सीमावर्ती इलाकों के मरीजों को अब घर के पास मिलने वाला इलाज नहीं मिल पा रहा है। मजबूरन मरीजों को दूरस्थ चिकित्सा संस्थानों की ओर रुख करना पड़ रहा है, जिससे समय और आर्थिक बोझ दोनों बढ़ गए हैं।
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जानकारी के मुताबिक जब यह ओपीडी संचालित थी तो हर माह करीब 500 से 600 मरीज यहां उपचार के लिए पहुंचते थे। खासकर नशे की लत से जूझ रहे युवाओं के लिए यह ओपीडी सस्ती और सुलभ चिकित्सा सुविधा का बड़ा केंद्र बनी हुई थी। दरअसल, वर्ष 2024 में मनोरोग विशेषज्ञ की नियुक्ति के बाद ही इस ओपीडी की शुरुआत हुई थी लेकिन दिसंबर 2025 में संबंधित विशेषज्ञ चिकित्सक की पदोन्नति सहायक प्रोफेसर के रूप में अन्य मेडिकल कॉलेज में हो गई। इसके बाद से अस्पताल में कोई नया विशेषज्ञ नियुक्त नहीं किया गया, जिसके चलते ओपीडी बंद पड़ी है।
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एसएमओ सिविल अस्पताल सुंदरनगर डॉ. चमन ठाकुर ने बताया कि विशेषज्ञ चिकित्सक की पदोन्नति के कारण ओपीडी फिलहाल बंद है। नए डॉक्टर की नियुक्ति के आदेश मिलते ही इसे फिर से शुरू कर दिया जाएगा।