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Mandi News: बेहतर लेंस के लिए जेब से खर्च कर रहे मरीज
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मोतियाबिंद ऑपरेशन के लिए एक हजार है सरकारी बजट
ऑपरेशन और लेंस का खर्च इसी राशि में शामिल
मरीजों ने की सरकारी बजट को बढ़ाने की मांग
संवाद न्यूज एजेंसी
मंडी। सरकारी अस्पतालों में मोतियाबिंद का ऑपरेशन करवाने वाले मरीजों को बेहतर लेंस के लिए अतिरिक्त खर्च स्वयं वहन करना पड़ रहा है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से एक मरीज के मोतियाबिंद ऑपरेशन के लिए महज एक हजार रुपये का बजट निर्धारित किया गया है। इसी राशि में ऑपरेशन और लेंस का खर्च शामिल है। विभाग इसी बजट के तहत लेंस उपलब्ध करवाता है। ऐसे में मरीजों को बेहतर लेंस लगवाने के लिए अपनी जेब से पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं।
जिले में स्वास्थ्य विभाग की ओर से हर साल करीब 200 नेत्र जांच शिविर लगाए जाते हैं। इनमें ग्रामीण क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोग आंखों की जांच और उपचार के लिए पहुंचते हैं। लंबे समय से लागू एक हजार रुपये का बजट मौजूदा महंगाई के दौर में नाकाफी साबित हो रहा है।
निजी अस्पतालों में मोतियाबिंद के ऑपरेशन पर करीब 20 से 50 हजार रुपये तक खर्च हो जाता है। आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों के लिए सरकारी अस्पताल और नेत्र शिविर ही बड़ी उम्मीद हैं। सरकारी स्तर पर सीमित बजट के कारण मरीजों को यदि बेहतर लेंस चाहिए तो उन्हें अतिरिक्त राशि खुद वहन करनी पड़ती है।
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कुछ मामलों में स्वयंसेवी संस्थाएं मरीजों की मदद के लिए आगे आती हैं। एनजीओ के सहयोग से करीब दो हजार रुपये की अतिरिक्त राशि उपलब्ध हो पाती है। इससे मरीजों को बेहतर लेंस उपलब्ध करवाने में मदद मिलती है। मंडी शहर निवासी धर्मी देवी, भोमा देवी, पार्वती और भगत राम ने सरकार और स्वास्थ्य विभाग से मोतियाबिंद ऑपरेशन के लिए मिलने वाली राशि बढ़ाने की मांग की है।
सरकारी प्रावधान के तहत प्रति मरीज मोतियाबिंद ऑपरेशन के लिए एक हजार रुपये की राशि निर्धारित की गई है। यदि किसी एनजीओ की ओर से सहयोग किया जाता है तो करीब दो हजार रुपये अतिरिक्त उपलब्ध करवाए जा सकते हैं। -डॉ. अशोक चौहान, सीएमओ मंडी।
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ऑपरेशन और लेंस का खर्च इसी राशि में शामिल
मरीजों ने की सरकारी बजट को बढ़ाने की मांग
संवाद न्यूज एजेंसी
मंडी। सरकारी अस्पतालों में मोतियाबिंद का ऑपरेशन करवाने वाले मरीजों को बेहतर लेंस के लिए अतिरिक्त खर्च स्वयं वहन करना पड़ रहा है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से एक मरीज के मोतियाबिंद ऑपरेशन के लिए महज एक हजार रुपये का बजट निर्धारित किया गया है। इसी राशि में ऑपरेशन और लेंस का खर्च शामिल है। विभाग इसी बजट के तहत लेंस उपलब्ध करवाता है। ऐसे में मरीजों को बेहतर लेंस लगवाने के लिए अपनी जेब से पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं।
जिले में स्वास्थ्य विभाग की ओर से हर साल करीब 200 नेत्र जांच शिविर लगाए जाते हैं। इनमें ग्रामीण क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोग आंखों की जांच और उपचार के लिए पहुंचते हैं। लंबे समय से लागू एक हजार रुपये का बजट मौजूदा महंगाई के दौर में नाकाफी साबित हो रहा है।
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निजी अस्पतालों में मोतियाबिंद के ऑपरेशन पर करीब 20 से 50 हजार रुपये तक खर्च हो जाता है। आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों के लिए सरकारी अस्पताल और नेत्र शिविर ही बड़ी उम्मीद हैं। सरकारी स्तर पर सीमित बजट के कारण मरीजों को यदि बेहतर लेंस चाहिए तो उन्हें अतिरिक्त राशि खुद वहन करनी पड़ती है।
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कुछ मामलों में स्वयंसेवी संस्थाएं मरीजों की मदद के लिए आगे आती हैं। एनजीओ के सहयोग से करीब दो हजार रुपये की अतिरिक्त राशि उपलब्ध हो पाती है। इससे मरीजों को बेहतर लेंस उपलब्ध करवाने में मदद मिलती है। मंडी शहर निवासी धर्मी देवी, भोमा देवी, पार्वती और भगत राम ने सरकार और स्वास्थ्य विभाग से मोतियाबिंद ऑपरेशन के लिए मिलने वाली राशि बढ़ाने की मांग की है।
सरकारी प्रावधान के तहत प्रति मरीज मोतियाबिंद ऑपरेशन के लिए एक हजार रुपये की राशि निर्धारित की गई है। यदि किसी एनजीओ की ओर से सहयोग किया जाता है तो करीब दो हजार रुपये अतिरिक्त उपलब्ध करवाए जा सकते हैं। -डॉ. अशोक चौहान, सीएमओ मंडी।