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Mandi News: दुख दर्द बांटने आ रहे अपने, ...हरे हो रहे जख्म
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धर्मपुर (मंडी)। ग्राम पंचायत लौंगणी के स्याठी गांव में आपदा प्रभावितों की यह सोच कर नींद उड़ी हुई है कि अब आगे क्या होगा। कैसे गुजारा होगा। पूरा गांव बह गया है। खाई बन गई है जहां अब गांव को बसाया नहीं जा सकता। नैणा माता मंदिर की सराय में ठहरे प्रभावितों के जख्म उस वक्त हरे हो रहे हैं जब अपने दुख दर्द बांटने आ रहे हैं। आंसुओं का सैलाब फिर बहने लगता है।
प्रभावित रजनीश, संतोष कुमार, विशाल, हल्कु राम और धनी राम ने बताया कि प्रभावित अब दिहाड़ी भी नहीं लगा पा रहे हैं। गुजारे को लेकर बार-बार सोच में पड़ रहे हैं। शनिवार को आसमान में बादल देख प्रभावितों ने कहा, हे भगवान बहने को कुछ नहीं बचा है। आंसू ही बह रहे हैं। बादल देखते ही प्रभावितों को मंजर याद आ जाता है। हर कोई भगवान से यही दुआ करने लगा कि अब तो बस कर दे भगवान। तन पर पहने कपड़ों के सिवाय उनके पास कुछ भी नहीं बचा। जिंदगीभर की कमाई बह गई। गहने, नकदी और संजोए सपने भी चकनाचूर हो गए हैं।
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सरकार से उम्मीद
प्रभावितों का कहना है कि आसमान से बरसी आफत आने वाली पीढ़ी को भी याद रहेगी। उन्हें यह कहानी सुनने को मिलेगी कि कभी वे स्याठी गांव में रहते थे। हालात ऐसे हो गए हैं कि कब सुबह होती है कब शाम, पता ही नहीं चलता। रात को सोच सोचकर नींद नहीं आती है। अब सहारा केवल सरकार का है। उम्मीद है कि कहीं सुरक्षित जगह मिलेगी, तो वे आशियाना बना पाएंगे।
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मदद को उठ हाथ, खाते में हुए तीन लाख
प्रभावित परिवारों की मदद के लिए हाथ उठने लगे है। शिमला से लौंंगणी राहत शिविर में शनिवार को आईएएस अधिकारी प्रदेश में राज्य सूचना आयुक्त डॉ. एसएस गुलेरिया पहुंचे। उन्होंने प्रभावित परिवारों की मदद के लिए अपनी ओर से एक लाख रुपये का चेक दिया। इसके साथ प्रभावितों को बोतल बंद पानी भी मुहैया करवाया। लौंगणी पंचायत के पूर्व प्रधान देशराज पालसरा ने बताया कि अभी तक तीन लाख रुपये कमेटी के पास सहायता राशि पहुंची है।
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प्रभावित रजनीश, संतोष कुमार, विशाल, हल्कु राम और धनी राम ने बताया कि प्रभावित अब दिहाड़ी भी नहीं लगा पा रहे हैं। गुजारे को लेकर बार-बार सोच में पड़ रहे हैं। शनिवार को आसमान में बादल देख प्रभावितों ने कहा, हे भगवान बहने को कुछ नहीं बचा है। आंसू ही बह रहे हैं। बादल देखते ही प्रभावितों को मंजर याद आ जाता है। हर कोई भगवान से यही दुआ करने लगा कि अब तो बस कर दे भगवान। तन पर पहने कपड़ों के सिवाय उनके पास कुछ भी नहीं बचा। जिंदगीभर की कमाई बह गई। गहने, नकदी और संजोए सपने भी चकनाचूर हो गए हैं।
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सरकार से उम्मीद
प्रभावितों का कहना है कि आसमान से बरसी आफत आने वाली पीढ़ी को भी याद रहेगी। उन्हें यह कहानी सुनने को मिलेगी कि कभी वे स्याठी गांव में रहते थे। हालात ऐसे हो गए हैं कि कब सुबह होती है कब शाम, पता ही नहीं चलता। रात को सोच सोचकर नींद नहीं आती है। अब सहारा केवल सरकार का है। उम्मीद है कि कहीं सुरक्षित जगह मिलेगी, तो वे आशियाना बना पाएंगे।
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मदद को उठ हाथ, खाते में हुए तीन लाख
प्रभावित परिवारों की मदद के लिए हाथ उठने लगे है। शिमला से लौंंगणी राहत शिविर में शनिवार को आईएएस अधिकारी प्रदेश में राज्य सूचना आयुक्त डॉ. एसएस गुलेरिया पहुंचे। उन्होंने प्रभावित परिवारों की मदद के लिए अपनी ओर से एक लाख रुपये का चेक दिया। इसके साथ प्रभावितों को बोतल बंद पानी भी मुहैया करवाया। लौंगणी पंचायत के पूर्व प्रधान देशराज पालसरा ने बताया कि अभी तक तीन लाख रुपये कमेटी के पास सहायता राशि पहुंची है।