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Mandi News: राज्य भर्ती आयोग से शिक्षक भर्ती का विरोध
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मंडी। विश्वविद्यालय शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया को राज्य भर्ती आयोग के अधीन करने के प्रावधान पर सरदार पटेल विश्वविद्यालय शिक्षक कल्याण संघ बिफर गया है। संघ ने इसका कड़ा विरोध किया है। संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि शिक्षक भर्ती महज सरकारी नियुक्ति का मामला नहीं है, बल्कि यह विश्वविद्यालय की अकादमिक स्वायत्तता और शिक्षा की गुणवत्ता से सीधे जुड़ा विषय है।
संघ के अध्यक्ष डॉ. हितेश ठाकुर और महासचिव डॉ. सनील ठाकुर ने कहा कि विश्वविद्यालयों में शिक्षकों का चयन विषय विशेषज्ञता, शोध कार्य, शोध प्रकाशन, शिक्षण अनुभव और अकादमिक योगदान जैसे मानकों के आधार पर किया जाता है। ऐसे चयन में विषय विशेषज्ञों और विश्वविद्यालय के वैधानिक अकादमिक निकायों की भूमिका अहम होती है। भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही जरूरी है, लेकिन इसके नाम पर विश्वविद्यालयों की भर्ती शक्तियों को कमजोर करना उचित नहीं है। यदि किसी भर्ती में अनियमितता सामने आती है तो उसकी स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की जानी चाहिए। विश्वविद्यालयों को सामान्य सरकारी विभागों की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता। उनकी अकादमिक जरूरतें और कार्यप्रणाली अलग होती है। उच्च शिक्षा की गुणवत्ता के लिए विश्वविद्यालयों की संस्थागत और अकादमिक स्वायत्तता बनाए रखना जरूरी है।
सरकार से मांग की है कि विश्वविद्यालय शिक्षकों की भर्ती को बाहरी भर्ती आयोग के अधीन करने वाले प्रावधानों पर पुनर्विचार किया जाए। साथ ही भविष्य में ऐसे महत्वपूर्ण फैसले लेने से पहले शिक्षक संगठनों और विश्वविद्यालयों से व्यापक विचार-विमर्श करने की मांग की है। संघ ने राज्यपाल, मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री से मामले को उच्च शिक्षा की स्वायत्तता और गुणवत्ता से जुड़ा विषय मानकर विचार करने का आग्रह किया।
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संघ के अध्यक्ष डॉ. हितेश ठाकुर और महासचिव डॉ. सनील ठाकुर ने कहा कि विश्वविद्यालयों में शिक्षकों का चयन विषय विशेषज्ञता, शोध कार्य, शोध प्रकाशन, शिक्षण अनुभव और अकादमिक योगदान जैसे मानकों के आधार पर किया जाता है। ऐसे चयन में विषय विशेषज्ञों और विश्वविद्यालय के वैधानिक अकादमिक निकायों की भूमिका अहम होती है। भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही जरूरी है, लेकिन इसके नाम पर विश्वविद्यालयों की भर्ती शक्तियों को कमजोर करना उचित नहीं है। यदि किसी भर्ती में अनियमितता सामने आती है तो उसकी स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की जानी चाहिए। विश्वविद्यालयों को सामान्य सरकारी विभागों की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता। उनकी अकादमिक जरूरतें और कार्यप्रणाली अलग होती है। उच्च शिक्षा की गुणवत्ता के लिए विश्वविद्यालयों की संस्थागत और अकादमिक स्वायत्तता बनाए रखना जरूरी है।
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सरकार से मांग की है कि विश्वविद्यालय शिक्षकों की भर्ती को बाहरी भर्ती आयोग के अधीन करने वाले प्रावधानों पर पुनर्विचार किया जाए। साथ ही भविष्य में ऐसे महत्वपूर्ण फैसले लेने से पहले शिक्षक संगठनों और विश्वविद्यालयों से व्यापक विचार-विमर्श करने की मांग की है। संघ ने राज्यपाल, मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री से मामले को उच्च शिक्षा की स्वायत्तता और गुणवत्ता से जुड़ा विषय मानकर विचार करने का आग्रह किया।
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