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जिले में 12:32:16 खाद के बचे हैं मात्र 73 बैग, 2027 तक आपूर्ति मुश्किल
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सालाना 5000 टन मांग के मुकाबले इफ्को भी असमर्थ
किसानों में भ्रम का माहौल और नकली खाद बिकने की आशंका
विकल्प के तौर पर डीएपी और 16:16:16 खाद उपलब्ध
संवाद न्यूज एजेंसी
मंडी। जिले में एनपीके 12:32:16 खाद का स्टॉक नाममात्र रह गया है, जिससे किसानों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। हिमफेड के डैहर स्टोर में इस खाद के केवल 73 बैग शेष बचे हैं। इस खाद में पोटाश की मात्रा अधिक होने के कारण प्रदेश में इसकी सबसे ज्यादा मांग रहती है।
जिले में एनपीके 12:32:16 खाद की सालाना मांग करीब 4,500 से 5,000 टन है। वर्तमान में हिमफेड की ओर से इफ्को को करीब 700 टन खाद की मांग भेजी गई है, लेकिन पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध न होने के कारण इफ्को भी इसकी आपूर्ति करने में असमर्थ है। हालात यह हैं कि आगामी 31 मार्च 2027 तक इस खाद की खेप आना संभव नहीं बताया जा रहा है। किसानों की सुविधा के लिए इफ्को की ओर से विकल्प के तौर पर डीएपी (डाई-अमोनियम फॉस्फेट) और एनपीके 16:16:16 खाद की आपूर्ति की जा रही है। वर्तमान में मंडी जिले के विभिन्न स्टोरों में करीब 250 टन डीएपी खाद उपलब्ध है। हालांकि, बाजार में 12:32:16 खाद की भारी किल्लत के बीच आशंका जताई जा रही है कि कुछ लोग पुरानी बोरियां बदलकर या नकली खाद बेचकर किसानों को भ्रमित कर सकते हैं।
बता दें कि एनपीके 12:32:16 खाद में 12 प्रतिशत नाइट्रोजन, 32 प्रतिशत फॉस्फोरस और 16 प्रतिशत पोटाश होता है। इसमें मौजूद फॉस्फोरस जड़ों के विकास तथा फूलों और फलों के निर्माण में मदद करता है, जबकि पोटाश पौधों की रोग प्रतिरोधक क्षमता और गुणवत्ता बढ़ाने में सहायक होता है।
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एनपीके 16:16:16 खाद में नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और पोटाश तीनों की मात्रा 16-16 प्रतिशत होती है। इसे शुरुआती विकास और वानस्पतिक वृद्धि के लिए उपयोगी विकल्प माना जाता है। वहीं, डीएपी में 18 प्रतिशत नाइट्रोजन और 46 प्रतिशत फॉस्फोरस होता है। इसका प्रयोग विशेष रूप से फसलों की बुवाई के समय जड़ों के मजबूत विकास और शुरुआती पोषण के लिए किया जाता है।
बॉक्स
31 मार्च 2027 तक 12:32:16 खाद उपलब्ध होना मुश्किल
31 मार्च 2027 तक 12:32:16 खाद उपलब्ध होना मुश्किल है। किसान पूरी तरह जागरूक रहें। यदि कोई व्यापारी इस खाद के नाम पर अन्य या संदिग्ध खाद बेच रहा है तो इसकी तुरंत सूचना कृषि विभाग को दें। -रोहित गलोटिया, इफ्को फील्ड ऑफिसर, मंडी
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किसानों में भ्रम का माहौल और नकली खाद बिकने की आशंका
विकल्प के तौर पर डीएपी और 16:16:16 खाद उपलब्ध
संवाद न्यूज एजेंसी
मंडी। जिले में एनपीके 12:32:16 खाद का स्टॉक नाममात्र रह गया है, जिससे किसानों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। हिमफेड के डैहर स्टोर में इस खाद के केवल 73 बैग शेष बचे हैं। इस खाद में पोटाश की मात्रा अधिक होने के कारण प्रदेश में इसकी सबसे ज्यादा मांग रहती है।
जिले में एनपीके 12:32:16 खाद की सालाना मांग करीब 4,500 से 5,000 टन है। वर्तमान में हिमफेड की ओर से इफ्को को करीब 700 टन खाद की मांग भेजी गई है, लेकिन पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध न होने के कारण इफ्को भी इसकी आपूर्ति करने में असमर्थ है। हालात यह हैं कि आगामी 31 मार्च 2027 तक इस खाद की खेप आना संभव नहीं बताया जा रहा है। किसानों की सुविधा के लिए इफ्को की ओर से विकल्प के तौर पर डीएपी (डाई-अमोनियम फॉस्फेट) और एनपीके 16:16:16 खाद की आपूर्ति की जा रही है। वर्तमान में मंडी जिले के विभिन्न स्टोरों में करीब 250 टन डीएपी खाद उपलब्ध है। हालांकि, बाजार में 12:32:16 खाद की भारी किल्लत के बीच आशंका जताई जा रही है कि कुछ लोग पुरानी बोरियां बदलकर या नकली खाद बेचकर किसानों को भ्रमित कर सकते हैं।
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बता दें कि एनपीके 12:32:16 खाद में 12 प्रतिशत नाइट्रोजन, 32 प्रतिशत फॉस्फोरस और 16 प्रतिशत पोटाश होता है। इसमें मौजूद फॉस्फोरस जड़ों के विकास तथा फूलों और फलों के निर्माण में मदद करता है, जबकि पोटाश पौधों की रोग प्रतिरोधक क्षमता और गुणवत्ता बढ़ाने में सहायक होता है।
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एनपीके 16:16:16 खाद में नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और पोटाश तीनों की मात्रा 16-16 प्रतिशत होती है। इसे शुरुआती विकास और वानस्पतिक वृद्धि के लिए उपयोगी विकल्प माना जाता है। वहीं, डीएपी में 18 प्रतिशत नाइट्रोजन और 46 प्रतिशत फॉस्फोरस होता है। इसका प्रयोग विशेष रूप से फसलों की बुवाई के समय जड़ों के मजबूत विकास और शुरुआती पोषण के लिए किया जाता है।
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31 मार्च 2027 तक 12:32:16 खाद उपलब्ध होना मुश्किल
31 मार्च 2027 तक 12:32:16 खाद उपलब्ध होना मुश्किल है। किसान पूरी तरह जागरूक रहें। यदि कोई व्यापारी इस खाद के नाम पर अन्य या संदिग्ध खाद बेच रहा है तो इसकी तुरंत सूचना कृषि विभाग को दें। -रोहित गलोटिया, इफ्को फील्ड ऑफिसर, मंडी