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Mandi News: स्कूलों में लाइब्रेरियन नहीं, लाइब्रेरी में लटके ताले
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जोगिंद्रनगर (मंडी)। सहायक पुस्तकालय अध्यक्षों के पद खाली होने से मंडी जिला सहित प्रदेश के कई सरकारी स्कूल जहां पर पुस्तकालयों की सुविधा शिक्षा विभाग की ओर से उपलब्ध करवाई थी, वहां पर अब ताले लटक गए हैं। इस कारण हजारों परीक्षार्थियों की दिक्कतें बढ़ गई हैं। यूजीसी स्केल का वित्तीय लाभ मिलने के बाद सरकारी स्कूलों में अधिकृत पुस्तकालयों में इसके संचालन को लेकर व्यवस्था चरमरा गई है।वैकल्पिक व्यवस्था न होने से जोगिंद्रनगर की आदर्श कन्या पाठशाला, राजकीय बाल पाठशाला और चौंतड़ा के सरकारी स्कूल के पुस्तकालयों में विद्यार्थी पढ़ाई से वंचित हो गए हैं। इसी प्रकार प्रदेश के विभिन्न जिलों में भी सहायक पुस्तकालय अध्यक्ष का पद खाली हो जाने से सरकारी स्तर पर उपलब्ध सुविधाएं और पुस्तकों का बड़ा भंडारण अब विद्यार्थियों के इस्तेमाल में लाना स्कूल प्रबंधनों के लिए चुनौती बन चुका है। हालांकि कुछ पुस्तकालयों में स्कूल प्रबंधन की ओर से अध्यापकों को प्रतिनियुक्ति कर संचालन की जिम्मेवारी सौंपी है, लेकिन अनुभव का अभाव भी संचालन को लेकर बाधा बन रहा है।
जोगिंद्रनगर के तीन बड़े सरकारी स्कूलों के पुस्तकालयों की बात करें तो यहां पर करीब बीस हजार पुस्तकों का भंडारण स्कूल प्रबंधनों की ओर से किया गया है। डिजिटल लाइब्रेरी की सुविधा भी पुस्तकालयों में मौजूद है, लेकिन संचालन को लेकर पेश आ रही दिक्कतों से परीक्षार्थियों को ही नहीं, बल्कि स्कूल प्रबंधकों के माथे पर भी चिंता की लकीरें खिंच गई हैं।
जोगिंद्रनगर आदर्श कन्या पाठशाला के प्रधानाचार्य डाॅ. सुनील ठाकुर ने बताया कि 1960 के दशक में बने पुस्तकालयों में सहायक पुस्तकालय अध्यक्ष का पद खाली हो जाने से सरकारी पुस्तकालयों में ताले लटक चुके हैं। बताया कि उनकी पाठशाला में मौजूद करीब सात हजार पुस्तकों का भंडारण, कंप्यूटर सुविधा भी उपलब्ध है, लेकिन पद खाली हो जाने से ये सुविधाएं अब बच्चों को नहीं मिल रही हैं।
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उधर, शिक्षा उपनिदेशक अमर नाथ राणा ने बताया कि मंडी जिले के जिन सरकारी पुस्तकालयों के संचालन को लेकर सहायक पुस्तकालय अध्यक्ष की समस्या पेश आई है, वहां वैकल्पिक तौर पर पदों को भरने को लेकर प्रदेश शिक्षा विभाग से पत्राचार किया गया है। बहरहाल संबंधित स्कूलों के प्राध्यापकों को पुस्तकालय संचालन की जिम्मेवारी सौंपने का आह्वान स्कूल प्रबंधकों से किया है, ताकि परीक्षार्थियों को सरकारी पुस्तकालय में अध्ययन करने का लाभ मिल पाए।
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जोगिंद्रनगर के तीन बड़े सरकारी स्कूलों के पुस्तकालयों की बात करें तो यहां पर करीब बीस हजार पुस्तकों का भंडारण स्कूल प्रबंधनों की ओर से किया गया है। डिजिटल लाइब्रेरी की सुविधा भी पुस्तकालयों में मौजूद है, लेकिन संचालन को लेकर पेश आ रही दिक्कतों से परीक्षार्थियों को ही नहीं, बल्कि स्कूल प्रबंधकों के माथे पर भी चिंता की लकीरें खिंच गई हैं।
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जोगिंद्रनगर आदर्श कन्या पाठशाला के प्रधानाचार्य डाॅ. सुनील ठाकुर ने बताया कि 1960 के दशक में बने पुस्तकालयों में सहायक पुस्तकालय अध्यक्ष का पद खाली हो जाने से सरकारी पुस्तकालयों में ताले लटक चुके हैं। बताया कि उनकी पाठशाला में मौजूद करीब सात हजार पुस्तकों का भंडारण, कंप्यूटर सुविधा भी उपलब्ध है, लेकिन पद खाली हो जाने से ये सुविधाएं अब बच्चों को नहीं मिल रही हैं।
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उधर, शिक्षा उपनिदेशक अमर नाथ राणा ने बताया कि मंडी जिले के जिन सरकारी पुस्तकालयों के संचालन को लेकर सहायक पुस्तकालय अध्यक्ष की समस्या पेश आई है, वहां वैकल्पिक तौर पर पदों को भरने को लेकर प्रदेश शिक्षा विभाग से पत्राचार किया गया है। बहरहाल संबंधित स्कूलों के प्राध्यापकों को पुस्तकालय संचालन की जिम्मेवारी सौंपने का आह्वान स्कूल प्रबंधकों से किया है, ताकि परीक्षार्थियों को सरकारी पुस्तकालय में अध्ययन करने का लाभ मिल पाए।