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Mandi News: आगामी 10 दिन गेहूं और सब्जियों की बिजाई के लिए सबसे उपयुक्त
Sat, 05 Oct 2024 08:03 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी
संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी
Updated Sat, 05 Oct 2024 08:03 AM IST
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सुंदरनगर (मंडी)। अक्तूबर का पहला पखवाड़ा यानी आज से अगले 10 दिन किसानों के लिए कृषि बिजाई का सबसे बेहतर समय है। इस संबंध में कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर के वैज्ञानिकों ने एक विस्तृत एडवाइजरी जारी की है, जिसका पालन करके किसान समय पर कृषि कार्य करके लाभ उठा सकते हैं।
एडवाइजरी के अनुसार ऊंच पर्वतीय क्षेत्रों में सिंचित एवं असिंचित क्षेत्रों में गेहूं की अगेती किस्में जैसे एचएस-542, एचपीडब्ल्यू-360, और वीएल-829 की बिजाई 100 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर बीज की दर से की जा सकती है। बिजाई से पहले बीज को बाविस्टिन 2.5 ग्राम, वीटावैक्स 2.5 ग्राम या रेक्सिल 1.0 ग्राम प्रति किलोग्राम बीज की दर से उपचारित करना आवश्यक है।
तिलहनी फसलें : निचले पर्वतीय क्षेत्रों में राया की अनुमोदित किस्में आरसीसी-4 और करण राई की शुद्ध तथा मिश्रित खेती की जा सकती है। इसकी बिजाई 30 सेंटीमीटर की दूरी पर पंक्तियों में की जानी चाहिए, जिसमें बीज दर 6 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर होनी चाहिए।
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मटर की अगेती किस्में : निचले पर्वतीय क्षेत्रों में मटर की अगेती किस्में जैसे पालम त्रिलोकी, अरकल और वीएल-7 की बिजाई की जानी चाहिए। इसके साथ गोबर की खाद, इफको 12-32-16, म्यूरेट ऑफ पोटाश और यूरिया खाद का उपयोग कर खेतों की उपजाऊ क्षमता बढ़ाई जा सकती है।
सब्जियों की बिजाई : कृषि विशेषज्ञों ने मध्यवर्ती पहाड़ी क्षेत्रों में फूलगोभी, बंदगोभी, गांठ गोभी, चाईनीज बंदगोभी और ब्रोकली की पौध की रोपाई करने की सलाह दी गई है। इसके साथ ही पालक, मेथी, धनिया, मूली, गाजर और शलजम की बिजाई भी इस पखवाड़े में करनी चाहिए।
अक्तूबर का प्रथम पखवाड़ा कृषि बिजाई के लिए बेहतर समय है। इसे लेकर चौधरी सरवन कुमार हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर के वैज्ञानिकों ने एडवाइजरी जारी की है। किसान अधिक जानकारी के लिए कृषि विज्ञान केंद्र से संपर्क कर सकते हैं।
डॉ. पंकज सूद, वैज्ञानिक एवं प्रभारी कृषि विज्ञान केंद्र सुंदरनगर
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एडवाइजरी के अनुसार ऊंच पर्वतीय क्षेत्रों में सिंचित एवं असिंचित क्षेत्रों में गेहूं की अगेती किस्में जैसे एचएस-542, एचपीडब्ल्यू-360, और वीएल-829 की बिजाई 100 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर बीज की दर से की जा सकती है। बिजाई से पहले बीज को बाविस्टिन 2.5 ग्राम, वीटावैक्स 2.5 ग्राम या रेक्सिल 1.0 ग्राम प्रति किलोग्राम बीज की दर से उपचारित करना आवश्यक है।
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तिलहनी फसलें : निचले पर्वतीय क्षेत्रों में राया की अनुमोदित किस्में आरसीसी-4 और करण राई की शुद्ध तथा मिश्रित खेती की जा सकती है। इसकी बिजाई 30 सेंटीमीटर की दूरी पर पंक्तियों में की जानी चाहिए, जिसमें बीज दर 6 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर होनी चाहिए।
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मटर की अगेती किस्में : निचले पर्वतीय क्षेत्रों में मटर की अगेती किस्में जैसे पालम त्रिलोकी, अरकल और वीएल-7 की बिजाई की जानी चाहिए। इसके साथ गोबर की खाद, इफको 12-32-16, म्यूरेट ऑफ पोटाश और यूरिया खाद का उपयोग कर खेतों की उपजाऊ क्षमता बढ़ाई जा सकती है।
सब्जियों की बिजाई : कृषि विशेषज्ञों ने मध्यवर्ती पहाड़ी क्षेत्रों में फूलगोभी, बंदगोभी, गांठ गोभी, चाईनीज बंदगोभी और ब्रोकली की पौध की रोपाई करने की सलाह दी गई है। इसके साथ ही पालक, मेथी, धनिया, मूली, गाजर और शलजम की बिजाई भी इस पखवाड़े में करनी चाहिए।
अक्तूबर का प्रथम पखवाड़ा कृषि बिजाई के लिए बेहतर समय है। इसे लेकर चौधरी सरवन कुमार हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर के वैज्ञानिकों ने एडवाइजरी जारी की है। किसान अधिक जानकारी के लिए कृषि विज्ञान केंद्र से संपर्क कर सकते हैं।
डॉ. पंकज सूद, वैज्ञानिक एवं प्रभारी कृषि विज्ञान केंद्र सुंदरनगर