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Mandi News: पुराने श्रम कानून बहाल करने की मांग पर गरजे श्रमिक संगठन
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पुराने श्रम कानून बहाल करने की मांग पर गरजे श्रमिक संगठन
सीटू, हिमाचल किसान सभा समेत अन्य संगठनों ने धरना देकर राष्ट्रपति को भेजा ज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
मंडी। केंद्र सरकार के 29 श्रम कानूनों को चार श्रम संहिताओं में बदलने के विरोध में सोमवार को सीटू, हिमाचल किसान सभा और अन्य संगठनों ने मंडी में धरना-प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने श्रम कानूनों को पुराने स्वरूप में बहाल करने समेत श्रमिकों और किसानों से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर जिला प्रशासन के माध्यम से राष्ट्रपति को ज्ञापन भेजा।
सीटू के जिला सचिव राजेश कुमार शर्मा ने कहा कि सभी श्रमिकों के लिए 42 हजार रुपये प्रतिमाह का वैधानिक न्यूनतम वेतन सुनिश्चित किया जाना चाहिए। उन्होंने मनरेगा को बहाल और मजबूत करते हुए साल में कम से कम 200 दिन रोजगार और 700 रुपये प्रतिदिन न्यूनतम मजदूरी की गारंटी देने की मांग की।
संगठनों ने विद्युत निजीकरण विधेयक 2025 और बीज विधेयक 2025 को वापस लेने के साथ राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम में प्रस्तावित संशोधनों को रद्द करने की मांग भी उठाई। इसके अलावा भूमि अधिग्रहण के नाम पर जबरन विस्थापन और कॉरपोरेट समर्थक भूमि पूलिंग रोकने की मांग उठाई गई। प्रदर्शनकारियों ने भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और पुनर्स्थापन अधिनियम 2013, वन अधिकार अधिनियम 2006 और पंचायत अधिनियम 1996 के तहत मिले अधिकारों को कायम रखने पर जोर दिया।
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ज्ञापन में स्मार्ट मीटर योजना वापस लेने, जबरन मीटर लगाने पर रोक, सभी योजना कर्मियों को ग्रेच्युटी और पेंशन की सुविधा देने सहित सभी फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य की कानूनी गारंटी और सरकारी खरीद सुनिश्चित करने के अलावा किसानों और दिहाड़ी-मजदूरों की आत्महत्याओं पर रोक लगाने के लिए ग्रामीण कर्ज माफी की व्यापक योजना लागू करने की मांग भी की गई।
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सीटू, हिमाचल किसान सभा समेत अन्य संगठनों ने धरना देकर राष्ट्रपति को भेजा ज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
मंडी। केंद्र सरकार के 29 श्रम कानूनों को चार श्रम संहिताओं में बदलने के विरोध में सोमवार को सीटू, हिमाचल किसान सभा और अन्य संगठनों ने मंडी में धरना-प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने श्रम कानूनों को पुराने स्वरूप में बहाल करने समेत श्रमिकों और किसानों से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर जिला प्रशासन के माध्यम से राष्ट्रपति को ज्ञापन भेजा।
सीटू के जिला सचिव राजेश कुमार शर्मा ने कहा कि सभी श्रमिकों के लिए 42 हजार रुपये प्रतिमाह का वैधानिक न्यूनतम वेतन सुनिश्चित किया जाना चाहिए। उन्होंने मनरेगा को बहाल और मजबूत करते हुए साल में कम से कम 200 दिन रोजगार और 700 रुपये प्रतिदिन न्यूनतम मजदूरी की गारंटी देने की मांग की।
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संगठनों ने विद्युत निजीकरण विधेयक 2025 और बीज विधेयक 2025 को वापस लेने के साथ राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम में प्रस्तावित संशोधनों को रद्द करने की मांग भी उठाई। इसके अलावा भूमि अधिग्रहण के नाम पर जबरन विस्थापन और कॉरपोरेट समर्थक भूमि पूलिंग रोकने की मांग उठाई गई। प्रदर्शनकारियों ने भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और पुनर्स्थापन अधिनियम 2013, वन अधिकार अधिनियम 2006 और पंचायत अधिनियम 1996 के तहत मिले अधिकारों को कायम रखने पर जोर दिया।
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ज्ञापन में स्मार्ट मीटर योजना वापस लेने, जबरन मीटर लगाने पर रोक, सभी योजना कर्मियों को ग्रेच्युटी और पेंशन की सुविधा देने सहित सभी फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य की कानूनी गारंटी और सरकारी खरीद सुनिश्चित करने के अलावा किसानों और दिहाड़ी-मजदूरों की आत्महत्याओं पर रोक लगाने के लिए ग्रामीण कर्ज माफी की व्यापक योजना लागू करने की मांग भी की गई।