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Mandi News: सरकारी अस्पताल में लैब की मशीनरी हांफी, निजी से भी नहीं मिल रही राहत

Sun, 14 Jul 2024 08:34 AM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी
संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी Updated Sun, 14 Jul 2024 08:34 AM IST
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Lab machinery in government hospital fails, not getting relief even from private hospital
नागरिक अस्पताल जोगिंद्रनगर की सरकारी प्रयोगशाला में मरीजों के टैस्ट के परीक्षण करते तकनीशियन  
जोगिंद्रनगर (मंडी)। नागरिक अस्पताल जोगिंद्रनगर में पीलिया, स्क्रब टाइफस और वायरल फीवर के उपचाराधीन मरीजों को अब सरकारी प्रयोगशाला में टेस्ट करवाने के लिए भी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। एक साथ मरीजों की टेस्टों की संख्या तीन गुणा बढ़ने से सरकारी प्रयोगशाला की मशीनरी जवाब दे गई है। वहीं निजी प्रयोगशाला में भी टेस्ट को लेकर मरीजों को राहत नहीं मिल पा रही है।
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अकेले सरकारी लैब में ही करीब सौ मरीजों के प्रतिदिन दो हजार से अधिक टेस्ट हो रहे हैं। इससे प्रयोगशाला की मशीनरी और उपकरण जवाब दे गए हैं। मरीजों के सीबीसी यानी कंप्लीट ब्लड काउंट टेस्ट नहीं हो पा रहे हैं। रोजाना सौ के करीब मरीजों के टेस्ट जब सरकारी प्रयोगशाला में पहुंच रहे हैं तो दस साल पुरानी बायो कैमिस्ट्री की मशीन में इसके परीक्षण भी समय पर पूरे नहीं हो पा रहे हैं।
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ईएम 200 मॉडल की इस मशीनरी में एक घंटे में महज दो पैरामीटर ही टेस्ट के परीक्षण के पूरे हो पा रहे हैं, जबकि टेस्टों की औसत दर इससे कई गुणा अधिक पहुंच चुकी है। प्रयोगशाला के तकनीशियन से ही प्राप्त जानकारी के अनुसार एक घंटे में महज 20 टेस्ट की ही रिपोर्ट मरीजों को थमाई जा सकती है। जबकि प्रयोगशाला में टेस्ट के लिए पहुंचे रहे अन्य मरीजों को टेस्ट की रिपोर्ट हासिल करने के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है।
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नागरिक अस्पताल जोगिंद्रनगर में सरकारी प्रयोगशाला में टेस्ट सुविधा से महरूम मरीजों के लिए प्रदेश स्वास्थ्य विभाग के द्वारा अधिकृत निजी क्रस्ना लैब में भी मरीजों की भीड़ बढ़ जाने से तीमारदारों के पसीने छूट रहे हैं। ऐसे में मरीज निजी लैब में महंगे दामों पर यह टेस्ट करवाने को मजबूर हैं।

रोजाना दो हजार से अधिक टेस्ट होने से हांफी मशीन
प्रयोगशाला के प्रभारी वीरेंद्र कुमार के अनुसार बैकअप मशीनरी उपलब्ध न होने के चलते सीबीसी, यूरिन और सीबी नॉट के टेस्ट की रिपोर्ट भी मरीजों को तय समय पर उपलब्ध नहीं हो पा रही है। रोजाना दो हजार से अधिक टेस्ट बायो कैमिस्ट्री प्रयोगशाला में हो रहे हैं, जबकि इसकी क्षमता इससे कम है।
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