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Mandi News: कैकेयी ने राजा दशरथ से मांगे दो वचन, राम को वनवास और भरत को राजतिलक
Mon, 21 Oct 2024 02:49 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी
संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी
Updated Mon, 21 Oct 2024 02:49 AM IST
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सरौन में रामलीला का मंचन करते कलाकार। -संवाद
टिहरा (मंडी)। धर्मपुर उपमंडल के सरौन गांव स्थित मॉडल स्कूल मैदान में चल रहे 14 दिवसीय रामलीला मंचन की पांचवीं संध्या पर दर्शकों ने भाव-विभोर होकर मंच पर प्रस्तुत दृश्यों का आनंद लिया। इस संध्या में राम के 14 वर्ष के वनवास और भारत के राजतिलक के दृश्य ने सभी को भावुक कर दिया।
रामलीला के पहले दृश्य में दासी मंथरा के भड़काने पर रानी कैकेयी राजा दशरथ से अपने दो लंबित वचनों को पूरा करने की मांग करती हैं। पहले वचन में वह कौशल्या पुत्र राम को 14 वर्ष का वनवास देने की मांग करती है और दूसरे में अपने पुत्र भरत को अयोध्या का राजा बनाने की मांग रखती हैं। इस पर दुखी दशरथ कहते हैं, ‘रघुकुल रीत सदा चली आई, प्राण जाए पर वचन न जाई’। इसके साथ राम का वनवास का दृश्य दर्शाया गया, जिसे देखकर दर्शक भावुक हो गए। राम ने अपने पिता की आज्ञा का पालन करते हुए वन जाने का निर्णय लिया।
इसके बाद राम के साथ पत्नी सीता ने अपने धर्म का पालन करते हुए उनके साथ वन जाने का निर्णय लिया। भाई लक्ष्मण भी भ्रातृ प्रेम के चलते राम के साथ वन जाने का मन बना लिया। पांचवीं रामलीला संध्या में राधा-कृष्ण की झांकी ने राम भक्तों को विशेष आनंद प्रदान किया। इस अवसर पर माता अवाहदेवी के प्रधान रमेश चंद गुलेरिया मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे, जबकि कनिष्ठ अभियंता विनोद विशेष अतिथि के रूप में शामिल हुए।
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रामलीला के पहले दृश्य में दासी मंथरा के भड़काने पर रानी कैकेयी राजा दशरथ से अपने दो लंबित वचनों को पूरा करने की मांग करती हैं। पहले वचन में वह कौशल्या पुत्र राम को 14 वर्ष का वनवास देने की मांग करती है और दूसरे में अपने पुत्र भरत को अयोध्या का राजा बनाने की मांग रखती हैं। इस पर दुखी दशरथ कहते हैं, ‘रघुकुल रीत सदा चली आई, प्राण जाए पर वचन न जाई’। इसके साथ राम का वनवास का दृश्य दर्शाया गया, जिसे देखकर दर्शक भावुक हो गए। राम ने अपने पिता की आज्ञा का पालन करते हुए वन जाने का निर्णय लिया।
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इसके बाद राम के साथ पत्नी सीता ने अपने धर्म का पालन करते हुए उनके साथ वन जाने का निर्णय लिया। भाई लक्ष्मण भी भ्रातृ प्रेम के चलते राम के साथ वन जाने का मन बना लिया। पांचवीं रामलीला संध्या में राधा-कृष्ण की झांकी ने राम भक्तों को विशेष आनंद प्रदान किया। इस अवसर पर माता अवाहदेवी के प्रधान रमेश चंद गुलेरिया मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे, जबकि कनिष्ठ अभियंता विनोद विशेष अतिथि के रूप में शामिल हुए।
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