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नदी-नालों और खड्डों में अवैध तरीके से मलबा लगाया जा रहा ठिकाने
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मंडी बाई पास पार्किंग के समीप लोगों द्वारा फैंका गया मलबा संवाद
- फोटो : Mandi
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मंडी। छोटी काशी के नदी-नालों और खड्डों के किनारे गृह निर्माण से निकलने वाला मलबा भी फेंका जा रहा है। नगर निगम क्षेत्र में पर्याप्त डंपिंग साइट न होने के कारण गृह निर्माण मालिक धड़ल्ले से मलबा फेंक रहे हैं, इन पर लगाम कसने वाला कोई नहीं। हालांकि एनजीटी के इसे लेकर सख्त निर्देश हैं। फिर भी सरकार से लेकर प्रशासन तक सब बेपरवाह बने हुए हैं। एक ओर नदी नालों और खड्डों किनारे अंधाधुंध निर्माण, वहीं निर्माण कार्य से निकलने वाले मलबे को भी नदी-नालों में फेंकना आपदा को न्योता देने से कम नही। मानसून सीजन में तेज पानी के बहाव में अवैध डंपिंग तबाही का सबब बन सकती है।
1996 में मची थी तबाही, दो की गई थी जान
क्षेत्रीय अस्पताल के पास नाले में डंपिंग होने से 1996 में भारी तबाही हुई थी। नाले का मुंह मलबे से बंद होने पर पानी ने लोगों के घरों में तबाही मचाई थी। हादसे में दो लोगों की जान भी चली गई थी। उसी स्थान पर 2015-16 में भी नाला बंद होने से अस्पताल के गायनी वार्ड सहित सड़कों पर मलबा फैल गया था। अब यह स्पॉट काफी हद तक ठीक है।
विक्टोरिया पुल और बंगला मोहल्ला के हाल
शहर के विक्टोरिया पुल के समीप हो रहे गृह निर्माण से निकलने वाला मलबा सरेआम ब्यास नदी में फेंका जा रहा है। शहर में गरीब, बेबस लोगों पर नियम थोपने वाली नगर निगम का इस ओर कोई ध्यान नहीं है। बंगला मोहल्ला के पास बनी पार्किंग के साथ सुकेती खड्ड में भी लोगों द्वारा मलबा फेंका जा रहा है। कई प्राकृतिक स्रोत भी बंद हो रहे हैं।
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बाईपास और मंगवाई के हाल
शहर के बाईपास रोड पुल घराट से मंडी व मंगवाई मार्ग के साथ सुकेती खड्ड पर भी लोग अवैध डंपिंग को अंजाम दे रहे हैं। वाहनों के माध्यम से डंपिंग करवाई जा रही है। जिससे खड्ड कंकरीट में बदल रही है। दोअंब से विद्युत बोर्ड मंडी तक सकोहड़ी खड्ड किनारे भी अवैध डंपिंग जोरों से हो रही है। खैरगढ़ी चौक के नीचे खड्ड में मलबा फंसने से गत वर्ष निर्माणाधीन चौक की शटरिंग पानी में बह गई थी। और पानी लोगों के घरों में घुस गया था। दो वर्ष पूर्व महामृत्युंजय मंदिर पास भी यहीं स्थिति पैदा हुई थी। पुल घराट से मंगवाई, बिंद्राबणी से लेकर सौली खड्ड, जवाहर नगर अस्पताल रोड़, पुरानी मंडी सहित अन्य स्थानों पर नियमित रूप से डंपिंग हो रही है।
अवैध डंपिंग वाले स्थान प्रशासन की निगाह में हैं। पुल घराट के पास चेतावनी बोर्ड भी लगाए हैं। यदि कोई व्यक्ति या वाहन चालक डंपिंग करता हुआ पाया जाता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई करते हुए चालान काटा जाएगा। निगम एरिया में डंपिंग साइट की तलाश की जा रही है।
-राजीव, एडीएम एवं नगर निगम आयुक्त मंडी
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1996 में मची थी तबाही, दो की गई थी जान
क्षेत्रीय अस्पताल के पास नाले में डंपिंग होने से 1996 में भारी तबाही हुई थी। नाले का मुंह मलबे से बंद होने पर पानी ने लोगों के घरों में तबाही मचाई थी। हादसे में दो लोगों की जान भी चली गई थी। उसी स्थान पर 2015-16 में भी नाला बंद होने से अस्पताल के गायनी वार्ड सहित सड़कों पर मलबा फैल गया था। अब यह स्पॉट काफी हद तक ठीक है।
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विक्टोरिया पुल और बंगला मोहल्ला के हाल
शहर के विक्टोरिया पुल के समीप हो रहे गृह निर्माण से निकलने वाला मलबा सरेआम ब्यास नदी में फेंका जा रहा है। शहर में गरीब, बेबस लोगों पर नियम थोपने वाली नगर निगम का इस ओर कोई ध्यान नहीं है। बंगला मोहल्ला के पास बनी पार्किंग के साथ सुकेती खड्ड में भी लोगों द्वारा मलबा फेंका जा रहा है। कई प्राकृतिक स्रोत भी बंद हो रहे हैं।
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बाईपास और मंगवाई के हाल
शहर के बाईपास रोड पुल घराट से मंडी व मंगवाई मार्ग के साथ सुकेती खड्ड पर भी लोग अवैध डंपिंग को अंजाम दे रहे हैं। वाहनों के माध्यम से डंपिंग करवाई जा रही है। जिससे खड्ड कंकरीट में बदल रही है। दोअंब से विद्युत बोर्ड मंडी तक सकोहड़ी खड्ड किनारे भी अवैध डंपिंग जोरों से हो रही है। खैरगढ़ी चौक के नीचे खड्ड में मलबा फंसने से गत वर्ष निर्माणाधीन चौक की शटरिंग पानी में बह गई थी। और पानी लोगों के घरों में घुस गया था। दो वर्ष पूर्व महामृत्युंजय मंदिर पास भी यहीं स्थिति पैदा हुई थी। पुल घराट से मंगवाई, बिंद्राबणी से लेकर सौली खड्ड, जवाहर नगर अस्पताल रोड़, पुरानी मंडी सहित अन्य स्थानों पर नियमित रूप से डंपिंग हो रही है।
अवैध डंपिंग वाले स्थान प्रशासन की निगाह में हैं। पुल घराट के पास चेतावनी बोर्ड भी लगाए हैं। यदि कोई व्यक्ति या वाहन चालक डंपिंग करता हुआ पाया जाता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई करते हुए चालान काटा जाएगा। निगम एरिया में डंपिंग साइट की तलाश की जा रही है।
-राजीव, एडीएम एवं नगर निगम आयुक्त मंडी