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जर्जर भवन में जिंदगी गुजार रहा परिवार बीपीएल सूची में भी नहीं
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द्रंग क्षेत्र के पाली निवासी महेश कुमार अपने जर्जर मकान में परिवार के साथ। संवाद
- फोटो : Mandi
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पधर (मंडी)। वर्ष 2013-2014 के सर्वे में बीपीएल में शामिल द्रंग क्षेत्र के पाली निवासी महेश कुमार आज भी गरीबी के कारण जर्जर मकान में जिंदगी गुजार रहे हैं। आठ वर्ष बीत जाने पर भी उनकी गरीबी न तो जन प्रतिनिधियों को नजर आई और न ही प्रशासन को। पंचायत ने पात्र परिवार को वर्ष 2018 के सर्वे में साधन संपन्न परिवार मानते हुए बीपीएल सूची से बाहर कर दिया।
पधर उपमंडल की ग्राम पंचायत पाली के बाड़ी निवासी महेश कुमार पुत्र पूर्ण चंद बोटी (खाना बनाने) का काम कर अपनी तीन बेटियों की पढ़ाई को आगे बढ़ा रहे हैं। महेश और उसकी पत्नी दिन भर मेहनत मजदूरी करके परिवार का पालन पोषण करते हैं। महेश कुमार के बुजुर्गों के समय का बना दो कमरों का स्लेटपोश मकान गिरने के कगार पर है। बीपीएल के तहत मकान पंचायत के माध्यम से मंजूर हो इसका वह पिछले आठ वर्षों से इंतजार कर रहे हैं। महेश ने कई मर्तबा मकान निर्माण का मामला पंचायत की ग्राम सभा में उठाया है। लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है। पीड़ित ने बताया कि पिछले वर्ष उसने दोबारा पंचायत में मकान निर्माण का मुदा उठाया था। पंचायत प्रधान, वार्ड सदस्य, पंचायत सचिव ने संयुक्त रूप से उसके घर का मौका किया। लेकिन दुख इस बात का है कि नए मकान ऐसे परिवारों को पंचायत ने मंजूर किए, जिनके पास पहले से पक्के मकान हैं। मकान के गिरने का खतरा बना हुआ है। महेश कुमार ने मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर से मांग की है कि उसके परिवार की दयनीय हालत को देखते हुए एसडीएम पधर से बीपीएल सूची से नाम काटने के मामले की जांच करवाई जाए और मकान का मौका कर मकान निर्माण के लिए आर्थिक मदद दी जाए।
पंचायत प्रधान पाली जय स्वरूप ठाकुर ने बताया कि महेश कुमार के रिहायशी मकान की हालत दयनीय है। बीपीएल सूची से वर्ष 2018 में नाम काटा गया है। इसके पीछे क्या कारण रहे हैं तत्कालीन जनप्रतिनिधि ही बता सकते हैं। नए सर्वे में ही उसे बीपीएल सूची में शामिल किया जा सकता है।
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पधर उपमंडल की ग्राम पंचायत पाली के बाड़ी निवासी महेश कुमार पुत्र पूर्ण चंद बोटी (खाना बनाने) का काम कर अपनी तीन बेटियों की पढ़ाई को आगे बढ़ा रहे हैं। महेश और उसकी पत्नी दिन भर मेहनत मजदूरी करके परिवार का पालन पोषण करते हैं। महेश कुमार के बुजुर्गों के समय का बना दो कमरों का स्लेटपोश मकान गिरने के कगार पर है। बीपीएल के तहत मकान पंचायत के माध्यम से मंजूर हो इसका वह पिछले आठ वर्षों से इंतजार कर रहे हैं। महेश ने कई मर्तबा मकान निर्माण का मामला पंचायत की ग्राम सभा में उठाया है। लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है। पीड़ित ने बताया कि पिछले वर्ष उसने दोबारा पंचायत में मकान निर्माण का मुदा उठाया था। पंचायत प्रधान, वार्ड सदस्य, पंचायत सचिव ने संयुक्त रूप से उसके घर का मौका किया। लेकिन दुख इस बात का है कि नए मकान ऐसे परिवारों को पंचायत ने मंजूर किए, जिनके पास पहले से पक्के मकान हैं। मकान के गिरने का खतरा बना हुआ है। महेश कुमार ने मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर से मांग की है कि उसके परिवार की दयनीय हालत को देखते हुए एसडीएम पधर से बीपीएल सूची से नाम काटने के मामले की जांच करवाई जाए और मकान का मौका कर मकान निर्माण के लिए आर्थिक मदद दी जाए।
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पंचायत प्रधान पाली जय स्वरूप ठाकुर ने बताया कि महेश कुमार के रिहायशी मकान की हालत दयनीय है। बीपीएल सूची से वर्ष 2018 में नाम काटा गया है। इसके पीछे क्या कारण रहे हैं तत्कालीन जनप्रतिनिधि ही बता सकते हैं। नए सर्वे में ही उसे बीपीएल सूची में शामिल किया जा सकता है।
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