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Mandi News: एक महीने के लिए नजरबंद हुए देवी-देवता
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भाद्रपद माह में डायनों से युद्ध करने के लिए घोघडाधार रवाना होंगे बड़ादेव कमरुनाग
नवविवाहिताएं भी ससुराल से मायके का करेंगी रुख
संवाद न्यूज एजेंसी
गोहर (मंडी)। भाद्रपद माह में जिले के बड़ादेव कमरुनाग और शिकारी देवी मंदिर के कपाट एक माह के लिए बंद हो गए हैं। यही नहीं, अनेक देवी-देवता पूरे माह के लिए नजरबंद हो गए हैं। अब गुग्गा जाहरपीर महाराज जिले के लोगों की रखवाली करेंगे। उधर, नई नवेली दुल्हनों ने ससुराल से मायके के लिए रुख कर दिया है।
यह माह डायनों और देवताओं के युद्ध का माना जाता है। बड़ादेव कमरुनाग अपने सहयोगी देवताओं समेत घोघडाधार डायनों से युद्ध करने की तैयारी में जुट गए हैं। उधर, गुग्गा महाराज घर-घर जाकर अपनी गाथा सुनाकर लोगों की रक्षा करेंगे। मंडी जिले की कमरुघाटी में बड़ादेव कमरुनाग के ज्येष्ठ पुत्र देव शिल्हि लटोगली के बजंतरी देवता की हार में जाकर अपने देवता के भक्तों को देवता के पूजे हुए सरसों के दाने बतौर रक्षा देते हैं। इसको लोग कपड़े में बांधकर सभी परिजनों के गले में बांधते हैं। एक माह कमरुघाटी के लोग अपने परिवार के सदस्यों को डायनों की छाया से बचाने के लिए देवता के दिए सुरक्षा कवचों का सहारा लेते हैं। कमरुघाटी के कून गांव की सौ वर्षीय शोभा देवी कहती हैं कि यह परंपरा कमरुघाटी में सदियों से है। उन्होंने कहा कि घोघडाधार में देवताओं और डायनों के बीच युद्ध होता है। नाग पंचमी के दिन कमरुनाग मंदिर में देवताओं और डायनों की हार जीत का खुलासा होता है। बड़ादेव कमरुनाग के गूर देवी सिंह ने बताया कि क्षेत्र में मंदिरों के कपाट बंद हो गए हैं।
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नवविवाहिताएं भी ससुराल से मायके का करेंगी रुख
संवाद न्यूज एजेंसी
गोहर (मंडी)। भाद्रपद माह में जिले के बड़ादेव कमरुनाग और शिकारी देवी मंदिर के कपाट एक माह के लिए बंद हो गए हैं। यही नहीं, अनेक देवी-देवता पूरे माह के लिए नजरबंद हो गए हैं। अब गुग्गा जाहरपीर महाराज जिले के लोगों की रखवाली करेंगे। उधर, नई नवेली दुल्हनों ने ससुराल से मायके के लिए रुख कर दिया है।
यह माह डायनों और देवताओं के युद्ध का माना जाता है। बड़ादेव कमरुनाग अपने सहयोगी देवताओं समेत घोघडाधार डायनों से युद्ध करने की तैयारी में जुट गए हैं। उधर, गुग्गा महाराज घर-घर जाकर अपनी गाथा सुनाकर लोगों की रक्षा करेंगे। मंडी जिले की कमरुघाटी में बड़ादेव कमरुनाग के ज्येष्ठ पुत्र देव शिल्हि लटोगली के बजंतरी देवता की हार में जाकर अपने देवता के भक्तों को देवता के पूजे हुए सरसों के दाने बतौर रक्षा देते हैं। इसको लोग कपड़े में बांधकर सभी परिजनों के गले में बांधते हैं। एक माह कमरुघाटी के लोग अपने परिवार के सदस्यों को डायनों की छाया से बचाने के लिए देवता के दिए सुरक्षा कवचों का सहारा लेते हैं। कमरुघाटी के कून गांव की सौ वर्षीय शोभा देवी कहती हैं कि यह परंपरा कमरुघाटी में सदियों से है। उन्होंने कहा कि घोघडाधार में देवताओं और डायनों के बीच युद्ध होता है। नाग पंचमी के दिन कमरुनाग मंदिर में देवताओं और डायनों की हार जीत का खुलासा होता है। बड़ादेव कमरुनाग के गूर देवी सिंह ने बताया कि क्षेत्र में मंदिरों के कपाट बंद हो गए हैं।
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