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फूड लाइसेंस घोटाले में कर्मी, कैफे संचालक से पूछताछ
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मंडी। स्वास्थ्य सुरक्षा एवं विनियमन कार्यालय मंडी में फूड लाइसेंस के नाम पर हुई हेराफेरी के मामले में विजिलेंस ने जांच तेज कर दी है। शुक्रवार को नौकरी से हटाए गए आउटसोर्स कर्मी डाटा ऑपरेटर व साइबर कैफे संचालक को तलब कर उनसे घंटों पूछताछ की।
विजिलेंस ने शहर के दस से अधिक दुकानदारों से पूछताछ कर उनके फूड लाइसेंस से संबंधित रिकॉर्ड जांचा। पूछताछ में विजिलेंस के हाथ कई अहम सुबूत लगे हैं। विजिलेंस ने निलंबित अधिकारी को भी पूछताछ के लिए शनिवार को बुलाया है। तीनों आरोपियों पर गिरफ्तारी की तलवार लटकी हुई है। साइबर कैफे मालिक को जिला एवं सत्र न्यायाधीश मंडी की अदालत से 28 जुलाई तक अग्रिम जमानत मिली है। नियमित जमानत के लिए कोर्ट में दोबारा 28 जुलाई को सुनवाई होगी।
डाटा ऑपरेटर पर निलंबित सहायक आयुक्त के साथ सांठगांठ कर जुर्माना राशि की फर्जी रसीदें तैयार कर सरकार को लाखों रुपये का चूना लगाने का आरोप है। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (विजिलेंस) मंडी कुलभूषण वर्मा ने कहा कि डाटा ऑपरेटर व सहायक आयुक्त से फर्जी रसीद मामले को लेकर पूछताछ की है। कई दुकानदारों का रिकॉर्ड भी जांचा गया है।
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यह है मामला
आरोप है कि जिला भर में जिन दुकानदारों ने फूड लाइसेंस का नवीनीकरण समय पर नहीं करवाया या फिर लाइसेंस नहीं बनवाया था उन्हें 10 से 15 हजार रुपये तक जुर्माना लगाया जाता था। ऐसे लोगों को जुर्माना राशि साइबर कैफे में जाकर भरने के विशेष निर्देश दिए जाते थे। साइबर कैफ मालिक कोषागार की फर्जी रसीद बनाकर दुकानदारों को थमा देता था। जुर्माना राशि सरकार के अकाउंट में जाने के बजाय निलंबित सहायक आयुक्त एवं साइबर कैफे मालिक की जेब में जाती थी।
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विजिलेंस ने शहर के दस से अधिक दुकानदारों से पूछताछ कर उनके फूड लाइसेंस से संबंधित रिकॉर्ड जांचा। पूछताछ में विजिलेंस के हाथ कई अहम सुबूत लगे हैं। विजिलेंस ने निलंबित अधिकारी को भी पूछताछ के लिए शनिवार को बुलाया है। तीनों आरोपियों पर गिरफ्तारी की तलवार लटकी हुई है। साइबर कैफे मालिक को जिला एवं सत्र न्यायाधीश मंडी की अदालत से 28 जुलाई तक अग्रिम जमानत मिली है। नियमित जमानत के लिए कोर्ट में दोबारा 28 जुलाई को सुनवाई होगी।
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डाटा ऑपरेटर पर निलंबित सहायक आयुक्त के साथ सांठगांठ कर जुर्माना राशि की फर्जी रसीदें तैयार कर सरकार को लाखों रुपये का चूना लगाने का आरोप है। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (विजिलेंस) मंडी कुलभूषण वर्मा ने कहा कि डाटा ऑपरेटर व सहायक आयुक्त से फर्जी रसीद मामले को लेकर पूछताछ की है। कई दुकानदारों का रिकॉर्ड भी जांचा गया है।
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यह है मामला
आरोप है कि जिला भर में जिन दुकानदारों ने फूड लाइसेंस का नवीनीकरण समय पर नहीं करवाया या फिर लाइसेंस नहीं बनवाया था उन्हें 10 से 15 हजार रुपये तक जुर्माना लगाया जाता था। ऐसे लोगों को जुर्माना राशि साइबर कैफे में जाकर भरने के विशेष निर्देश दिए जाते थे। साइबर कैफ मालिक कोषागार की फर्जी रसीद बनाकर दुकानदारों को थमा देता था। जुर्माना राशि सरकार के अकाउंट में जाने के बजाय निलंबित सहायक आयुक्त एवं साइबर कैफे मालिक की जेब में जाती थी।
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